
महिलाएं 'अंतरा' को नकार रहीं, 'छाया' से हो रहीं दूर
नाहरगढ़. परिवार नियोजन के लिए स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा लाई गई अब तक की सबसे महत्वपूर्ण अंतरा योजना को ग्रहण सा लग गया है। हालात यह हैं कि अब यह योजना ठंडी पड़ गई है। महिलाओं द्वारा अंतरा इंजेक्शन को नकारा जाने लगा है। वजह है कि, इंजेक्शन का डोज लेने के बाद महिलाओं को इसके साइड इफेक्ट हो रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार तीन माह में एक बार लगाए जाने वाले इस इंजेक्शन की पहली डोज लेने से ही महिलाओं को 6 महीनों तक लगातार कई तरह की समस्या का सामना करना पड़ रहा है। डोज लेने वाली महिला के पति दीपक टेटवाल ने बताया कि अंतरा इंजेक्शन लगाने के बाद साइड इफेक्ट, रक्तस्राव की समस्या आ रही है। कई बार अस्पताल के चक्कर काटने के बाद भी इस समस्या का हल नहीं निकला। दीपक ने बताया कि वे इसके उपचार पर अब तक बीस हजार रुपए खर्च कर चुके हैं। उन्होंने बताया कि अंतरा का यह अनुभव अच्छा नहीं रहा।
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2017 में शुरू हुई योजना
उल्लेखनीय है कि, अगस्त 2017 में अंतरा योजना शुरू की गई थी। साइड इफेक्ट की समस्या से अब यह अटक गई है। महिलाओं में तीन माह तक गर्भनिरोधक क्षमता बनाए रखने वाले इस इंजेक्शन का डोज लगने के बाद अचानक रक्तस्राव व अन्य शारीरिक समस्याएं महिलाओं को हो रही हैं। परिवार नियोजन के लिए लगाए जाने वाले अंतरा इंजेक्शन व छाया टेबलेट की शुरुआत सरकार ने एकसाथ की थी। सरकारी अस्पतालों में लगने वाले अंतरा इंजेक्शन से महिलाओं ने दूरी बनाई तो छाया टेबलेट भी कुछ खास नहीं असर दिखा पाई।
विभाग की दिलचस्पी नहीं
अंतरा योजना मूर्त रुप लेने से पहले ही गर्त में चली गई। इसका कारण महिलाओं का इससे दूरी बनाना है। स्वास्थ्य विभाग की भी उदासीनता रही है। शासन के निर्देशानुसार जिन महिलाओं ने इंजेक्शन का पहला डोज लिया है और दूसरे एवं तीसरे डोज लगवाने के लिए नहीं पहुंची है, उनसे विभाग के कर्मचारियों द्वारा संपर्क करने का प्रावधान है। स्थानीय स्वास्थ्य अमला न तो कभी उनके घर जाता और न ही कभी संपर्क करने का प्रयास करता है। विभाग सिर्फ कागजी आंकड़े बढ़ाकर पर्दा डालने का काम करता है।
- अंतरा इंजेक्शन का डोज लेने वाली लगभग 30 फीसदी महिलाओं को साइड इफेक्ट होता है। ब्लीडिंग व अन्य समस्या होती है। इसे दवाइयों के माध्यम से ठीक किया जाता है।
डॉ. नितिन कुशवाह
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- अन्तरा इंजेक्शन हार्मोन्स को नियंत्रित करता है। इसे पहली बार लगाने पर चार-पांच दिन तक अधिक महावारी आने की तकलीफ रहती है, लेकिन दवा लेने से ठीक हो जाता है। इससे किसी तरह का नुकसान नहीं है। बच्चों में अंतराल के लिए सबसे अच्छा इंजेक्शन है। तीन इंजेक्शन लगाने पर दो वर्ष तक अनचाहे बच्चे से राहत रहती है।
डॉ. सीताराम वर्मा, डिप्टी सीएमएचओ (परिवार कल्याण)
Published on:
07 Dec 2020 12:23 am
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