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World Hypertension Day 2023: बच्चों और युवाओं को भी जकड़ रहा ‘साइलेंट किलर’, ये लक्षण दिखें तो हो जाएं सावधान!

World Hypertension Day: भागदौड़ भरी जिंदगी, अनियंत्रित व गलत खानपान, नौकरी, व्यवसाय, पढ़ाई व घरेलू मामलों को लेकर अत्यधिक तनाव के चलते आज की पीढ़ी को उच्च रक्तचाप अथवा हाई बीपी (हाइपरटेंशन) का शिकार हो रही है।

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कोटा

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Kirti Verma

May 17, 2023

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कोटा /पत्रिका न्यूज़ नेटवर्क.World Hypertension Day: भागदौड़ भरी जिंदगी, अनियंत्रित व गलत खानपान, नौकरी, व्यवसाय, पढ़ाई व घरेलू मामलों को लेकर अत्यधिक तनाव के चलते आज की पीढ़ी को उच्च रक्तचाप अथवा हाई बीपी (हाइपरटेंशन) का शिकार हो रही है। चिंता की बात यह है कि हाई बीपी बच्चों व युवाओं को भी बड़ी तादात में अपनी गिरफ्त में ले रहा है। जबकि कुछ वर्षों पहले तक इसे अधेड़ उम्र की बीमारी माना जाता था। एक प्रतिष्ठित जर्नल में प्रकाशित शोध के अनुसार, 20 से 40 वर्ष की उम्र के हर 8 में से 1 युवा उच्च रक्तचाप का शिकार है। बच्चे प्रतियोगी परीक्षाओं की पढ़ाई के चलते तनाव में रहते हैं। तनाव के चलते जंक फूड का इस्तेमाल बढ़ा है। साथ ही शारीरिक व्यायाम से दूरी का नतीजा मोटापे व हाई बीपी के रूप में सामने आता है।

लक्षण
शुरुआत में वैसे तो हाई बीपी के कोई लक्षण नजर नहीं आते, इसलिए इसे साइलेंट किलर भी कहते है। समय के साथ सिर का भारीपन, सिर दर्द, नींद की कमी, चिडचिड़ापन रहने लगना, इन्हें नजरअंदाज करने पर कुछ वर्ष बाद गंभीर हृदय रोग, किडनी फेल्योर, लकवा व अन्य बीमारियों के रूप में सामने आता है। आमजन को इस बीमारी के बारे में शिक्षित करने व जागरूकता लाने के लिए प्रति वर्ष 17 मई को वर्ल्ड हाइपरटेंशन डे मनाया जाता है।

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यह है कारण

- मानसिक तनाव

- शारीरिक व्यायाम की कमी

- चिकनाईयुक्त खाने व नमक का अत्यधिक उपयोग

- ध्रूमपान, शराब व अन्य नशीले पदार्थ की लत


- आनुवांशिक कारण

- अत्यधिक वजन व मोटापा

क्या है हाइपरटेंशन
ब्लड प्रेशर का 140-90 से ऊपर होना हाई बीपी की श्रेणी में आता है।

बचाव

- हाई ब्लड प्रेशर जीवनशैली से जुड़ी बीमारी है। जिससे जीवनशैली से संबंधित गतिविधियों में परिवर्तन कर बचा जा सकता है।

- बच्चों में संतुलित, पौष्टिक, कम नमक व वसा रहित खाने की आदत डालें।

- बच्चों को जंक फूड खाने की आदत टोकें।

- शारीरिक व्यायाम को दिनचर्या का हिस्सा बनाएं।

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बच्चों को आउटडोर गेम्स के लिए प्रोत्साहित करें।

- शराब, धूम्रपान व नशीले पदार्थ से दूरी बनाएं।

- मानसिक तनाव से बचने के लिए योगा, प्राणायाम व ध्यान को अपनाएं।

- बच्चों को पढ़ाई के तनाव से बचाने के लिए नियमित संवाद करते रहें। उनका मनोबल बनाए रखें।

- कम से कम 7 से 8 घंटे की नींद जरूर लें।

- कैल्शियम व पौटेशियम युक्त खाद्य पदार्थ, मौसमी फल, सब्जियां, दूध, दही, टमाटर, सूखे मेवे का सेवन करें।