
Photo: Patrika
दुनिया में 20 अगस्त को विश्व मच्छर दिवस के रूप में मनाया जाता है। ब्रिटिश डॉ. सर रोनाल्ड रॉस ने मादा एनाफिलीज मच्छर की खोज की थी। इस दिन को मनाने का मुख्य उद्देश्य लोगों को मच्छरों के काटने से होने वाली बीमारियों के प्रति जागरूक करना और बचाव के उपाय बताना है। कोटा शहर में तीन तरह के मच्छर लोगों को तकलीफ देते हैं। खास बात यह है कि तीनों मच्छर मादा हैं। शहर में मादा एनाफिलीज, मादा एडीज व क्यूलेक्स नामक मच्छर से ही बीमारियां फैलती हैं। इसके चलते हर साल बड़ी तादाद में लोग बीमार होकर अस्पतालों में पहुंचते हैं। मच्छरों के काटने से डेंगू, चिकनगुनिया, मलेरिया का खतरा बढ़ जाता है। सबसे बड़ी बात यह है कि प्रतिरोधक क्षमता बढ़ने से मच्छर अब शक्तिशाली हो चुके हैं।
मच्छर खून चूसने के दौरान हमारे अन्दर कुछ ऐसे परजीवी डाल देते हैं, जो बीमारियों के वाहक होते हैं। ये मलेरिया का कीटाणु मनुष्य में फैलाते हैं। इसके बाद मलेरिया पीड़ित को काट कर दूसरे व्यक्ति तक फैला देते हैं। एडीज भी इसी तरह संक्रमण फैलाता है। डेंगू वायरस से संक्रमित मच्छर के काटे जाने के 3-5 दिनों में डेंगू के लक्षण दिखने लगते हैं। यह अवधि 3 से 10 दिन तक की भी हो सकती है।
मच्छरों को पैदा होने से रोकने के लिए घर या ऑफिस के आसपास पानी जमा नहीं होने दें।
गड्ढों को मिट्टी से भर दें, रुकी हुई नालियों को साफ करें।
अगर पानी जमा होेने से रोकना मुमकिन नहीं है तो उसमें पेट्रोल या केरोसिन डालें।
कूलर, पक्षियों को दाना-पानी देने के बर्तन को रोज पूरी तरह से खाली करें, उन्हें सुखाएं और फिर भरें।
घर में टूटे-फूटे डिब्बे, टायर, बर्तन, बोतलें आदि नहीं रखें। अगर रखें तो उलटा करके रखें।
खिड़कियों और दरवाजों पर बारीक जाली लगवाकर मच्छरों को घर में आने से रोकें।
मच्छरों को भगाने और मारने के लिए क्रीम, स्प्रे, मैट्स, कॉइल्स आदि इस्तेमाल करें।
फोटो फ्रेस, पर्दों, कैलेंडरों आदि के पीछे और घर के स्टोर रूम और सभी कोनों में दवा छिड़कें।
ऐसे कपड़े पहनें, जिससे शरीर का ज्यादा हिस्सा ढका रहे। बच्चों को डेंगू सीजन में नेकर व टी-शर्ट नहीं पहनाएं। बच्चों को मच्छर भगाने की क्रीम लगाएं। रात को सोते समय मच्छरदानी लगाएं। किसी को डेंगू हो गया है तो उसे मच्छरदानी के अंदर रखें, ताकि मच्छर उसे काटकर दूसरों में बीमारी नहीं फैलाए।
एक बार में मादा एडिज मच्छर 100-125 अंडे देती है।
अंडे से 2-3 दिन में लार्वा में बदल जाता है।
लार्वा से प्यूपा 4-5 दिन में बन जाता है।
प्यूपा से वयस्क मच्छर 1-2 दिन में बन जाता है।
वयस्क मच्छर 2-3 सप्ताह तक जीवित रहता है।
एडिज मच्छर के सर्वाइवल के लिए अनुकूल तापमान 18 से 32 डि.से. एवं 60-80 प्रतिशत आर्द्रता होती है।
चिकित्सा विभाग की ओर से डेंगू, मलेरिया रोकथाम के लिए इन दिनों ’स्वास्थ्य दल आपके द्वार’ अभियान चला रखा है। चिकित्सा विभाग के एंटेमोलॉजिस्ट (कीट वैज्ञानिक) डीपी चौधरी के अनुसार, एडिज मच्छर डेंगू व चिकनगुनिया, एनाफिलीज मलेरिया व क्यूलेक्स बीमारी नहीं फैलाता है, लेकिन तादात ज्यादा रहती है। यह नालियों में पनपता है जबकि मादा एडीज व एनाफिलीज साफ पानी में पनपता है। यह दिन में काटता है। इनके शरीर में चीते जैसी धारियां होती हैं। एक व्यस्क मच्छर 2-3 सप्ताह तक जीवित रहता है। एडीज मच्छर घरों में अंधेरे कोनों, परदे के पीछे, कपड़ों पर टेबल के नीचे छुपा रहता है। डेंगू बरसात के मौसम और उसके फौरन बाद जुलाई से अक्टूबर में सबसे ज्यादा फैलता है, क्योंकि इस मौसम में मच्छरों के पनपने के लिए अनुकूल परिस्थितियां होती हैं। एडीज मच्छर बहुत ऊंचाई तक नहीं उड़ पाता।
मच्छर जनित बीमारियों से निपटने के लिए चिकित्सा विभाग का सहयोग करें। इसके लिए डेंगू-मलेरिया पर वार अभियान के तहत हर रविवार ड्राई डे मनाएं। इस दिन घरों टंकियां, कूलर व अन्य स्थानों की सफाई करें, तभी हम कोटा को कामयाब बना सकते हैं। डॉ. नरेंद्र नागर, सीएमएचओ
Published on:
20 Aug 2025 02:47 pm
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