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‘तुम्हीं हो माता… पिता तुम्हीं हो’

अन्ता नगरपालिका चुनाव : लगाया पूरा जोर, थम गया शोर  

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कोटा

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Mukesh Gaur

Dec 09, 2020

'तुम्हीं हो माता... पिता तुम्हीं हो'

'तुम्हीं हो माता... पिता तुम्हीं हो'

विजय बत्रा. अन्ता. नगरपालिका चुनाव प्रचार के अंतिम दिन बुधवार को यहां सभी प्रत्याशियों ने मतदाताओं को रिझाने में पूरा जोर लगा दिया। ऐसे में एक के बाद दूसरे उम्मीदवार का जुलूस निकलने से कई महिलाएं एवं बच्चे पूरे दिन दरवाजे पर खड़े रह ढोल-नगाड़ों का आनंद लेते नजर आए। इस बीच उम्मीदवारों ने देवी देवताओं को ढोकने तथा विभिन्न साधु संतों का आशीर्वाद लेने में भी कसर नहीं छोड़ी। वहीं 'जीतेगा भई जीतेगाÓ, 'चाचा से भी बोल दो चाची से भी बोल दोÓ आदि आकर्षक नारों के साथ वार्ड के हर घर में दस्तक दी। कई जगह अमरूद से तुुले। वहीं कुछ मालाओं की ही अलटा-पलटी कर दर्जनों मतदाताओं से पहनने का सिलसिला चलता रहा। किस परिवार में कौन मतदाता किसकी बात मानेगा। इस रणनीति के तहत भी काम हुआ। कई समर्थकों ने प्रत्याशी के कान में पहले ही फूंक मार दी कि फलां घर में फलां को साथ ले जाने से आता हुआ वोट भी खिसक जाएगा। वहीं कई मतदाता प्रत्याशियों को यह कहने में भी नहीं चूक रहे कि 'बड़ी देर कर दी हजूर आतेे आतेÓ। कुछ मोहल्लों में प्रचार करती महिलाओं ने 'पीली लूंगड़ी का झालाÓ जैसे गीतों पर नृत्य कर धूम मचाए रखी। वहीं पुरूष उम्मीदवारों के लिए उनकी पत्नियों ने इस दिन चुनावी मैदान में आ पूरी ताकत झोंक दी। ऐसे में चुनाव प्रचार के दौरान बीते एक सप्ताह में यहां के प्रत्येक मतदाता को अपने पांव छुआने का दर्जनों बार मौका मिला। किन्तु ऑटो रिक्शा एवं मैजिक पर चलती प्रचार प्रसार की ऑडियो कैोट के कारण कान पका चुके मतदाताओं को अब जाकर राहत मिली है।

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हो चुकी जेबें ढीली
कुछ निर्दलीय प्रत्याशियों ने वार्ड वासियों को अपने चुनाव चिन्ह के रूप वाला सामान ही घर पहुंचा दिया तो कई जगह समर्थक तथा दिहाड़ी पर लगे कई कार्मिक दिन मेें कहीं तों शाम को कहीं जाकर झक्क हो रहे हैं। 'जिसने पिलाई अंगूरी उसी की जी हजूरीÓ वाली तर्ज पर मदमस्त हो रहे ऐसे लोग प्रत्याशी को जीत का पूरा भरोसा दिलाने मेंं कोई कसर नहीं छोड़ रहे। चुनाव प्रचार के इस झमेले में कई उम्मीदवारों की सारी जेबें ढीली हो चुकी।

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शादियों के कारण धुकधुकी तेज
मतदान के दिन किस मतदाता को कहां से लाना है। उनके लिए कौनसा वाहन जाएगा यह गणित बिठाई जाना शुरू हो चुका। प्रमुख प्रत्याशियों को सबसे बड़ी चिन्ता तो यह खाए जा रही है कि 11 दिसम्बर को मतदान के दिन शादियों का जोर होने से कई मतदाता कस्बे से बाहर रहेंगे। ऐसे में उनके वोटों की पूर्ति कैसे होगी। इस बात ने दोनों दलों की धुकधुकी तेज कर दी है। एक पार्टी प्रत्याशी की तो बारात ही 10 दिसम्बर की रात लौटेगी।