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गे्रटर फ्लेमिंगो के साथ खिलखिला रही सांभर झील

हेमन्त जोशी. कुचामनसिटी. Sambhar Lake blossoming with Grater Flamingo सांभर झील में विदेशी पक्षियों की गणना ऐसे समय होती है जब झील सूखकर वीरान पड़ी होती है। बारिश के बाद अब सांभर झील में पर्याप्त पानी की आवक होने के बाद हजारों की तादाद में विदेशी पक्षी राजहंस (फ्लेमिंगो) ने यहां डेरा जमा लिया है। यह पक्षी झील में करीब तीन माह के प्रवास पर आते है और प्रजनन के बाद दिसम्बर माह तक वापस उड़ जाते है।

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kuchaman. Sambhar Lake blossoming with Grater Flamingo

kuchaman. Sambhar Lake blossoming with Grater Flamingo

Sambhar Lake blossoming with Grater Flamingo खारे पानी के लिए पूरे देश में अपनी पहचान रखने वाली यह झील इन दिनों हर किसी का मन मोह रही है। सुदूर देशों से उड़ान भरकर यहां हजारों की संख्या पहुुंचे ग्रेटर और लेसर फ्लेमिंगो की अठखेलियां पर्यटकों को लुभा रही है। इन पक्षियों की चहलकदमी झील की आभा को चार चांद लगा रही है वहीं इनकी उड़ान पूरे आसमान को सुनहरा बना देती है। अपने सफेद पंख, गुलाबी सुर्ख गर्दन और नुकीली चोंच का पक्षी काफी मनमोहक है।

सरकारी आंकड़ों में शून्य

गत चार वर्षों से सरकार वन विभाग की ओर से सांभर झील में विदेशी पक्षियों की गणना करवा रही है। लेकिन गणना ऐसे समय में की गई जब यह पक्षी झील क्षेत्र से पलायन कर जाते है। यही कारण रहा है कि सरकार के आंकड़ों में इन पक्षियों की गणना शून्य रही। Sambhar Lake blossoming with Grater Flamingo ऐसे में इन पक्षियों के बनने वाली योजना भी तैयार नहीं हो सकी। वर्ष 2016 से वन विभाग की ओर से जनवरी माह में करवाई गई जा रही विदेशी पक्षियों की गणना में सांभर झील में एक भी फ्लेमिंगों सहित अन्य पक्षी नजर नहीं आया है। जबकि कारण भी स्पष्ट है कि सांभर झील में इन प्रवासी पक्षियों का प्रवास केवल अगस्त, सितम्बर व अक्टूबर माह में रहता है। झील में पानी का भराव रहने पर यह पक्षी कुछ संख्या में नवम्बर तक भी प्रवास पर रहते है।

सरकार को करना है ठोस प्रबंधन

राज्य सरकार की ओर से सांभर झील को पर्यटन की दृष्टि से विकसित करने के लिए कई प्रयास किए गए। झील को वेट लेण्ड घोषित हुए भी बरस बीत गए। लेकिन विदेशी पक्षियों के प्रवास के लिए कोई प्रबंधन नहीं हुआ। हर बार झील से अतिक्रमण हटाने और अवैध बोरवेल हटाने की फौरी कार्रवाई होकर रह गई। इसी पर करोड़ों रुपए खर्च भी हो गए। लेकिन स्थिति वही ढाक के तीन पात जैसी है।


झील के विस्तार पर एक नजर
कैचमेंट एरिया- 7500 वर्ग किलोमीटर
लंबाई- 35.5 गुणा 9.5 किलोमीटर
बारिश के दौरान- 230 वर्ग किलोमीटर
गहराई- 0.61 मीटर
परिधि- 96 किलोमीटर
फैलाव- जयपुर, अजमेर, सीकर, नागौर तक समुद्र तट से ऊंचाई- 360 से 364 मीटर
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सांभर झील का आधा हिस्सा जयपुर में है और आधा नागौर में है। ऐसे में सांभर झील में गणना जयपुर वन विभाग की ओर से ही करवाई जाती है। नागौर में उस समय पक्षी नहीं रहते हैं।
मोहित गुप्ता
डीएफओ, नागौर
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सांभर झील में पक्षियों की गणना के लिए दिल्ली से टीम आती है, वही गणना करती है। जनवरी में भी कुछ पक्षी मिलते है, जिनकी गणना होती है।
नरेश शर्मा
डीएफओ, जयपुर।