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घाटे में चल रही है सांभर साल्ट लिमिटेड

हर साल करोड़ों का घाटा झेल रही है सांभर साल्ट लिमिटेड

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Sambhar Salt Limited running in loss

Sambhar Salt Limited running in loss

हेमन्त जोशी.

कुचामनसिटी. सार्वजनिक वितरण प्रणाली द्वारा कमजोर तबके को आयोडीनयुक्त नमक पहुंचाने और नमक स्त्रोतों का प्रभावी उपयोग करने वाली सांभर साल्ट लिमिटेड केन्द्र सरकार के लिए घाटे का सौदा साबित हो रही है। अंग्रेजी हुकुमत के समय यह कम्पनी भले ही अच्छा मुनाफा कमाती थी लेकिन आजादी के बाद केन्द्र सरकार के अधीन होने के बाद से यह कम्पनी घाटे में चल रही है। वित्तीय घाटे से उभरने के लिए सांभर साल्ट ने अपना 70 फीसदी कार्य किराए पर और ठेके पर भी दे दिया। जिससे किराएदार व ठेकेदार भले ही कमा रहे हैं लेकिन कम्पनी घाटे से नहीं निकल रही। जबकि निजी क्षेत्र में सभी नमक उत्पादक एवं रिफाइनरी संचालक लाखों रुपए का मुनाफा कमा रहे हैं।
जी हां, हम बात कर रहे है प्रदेश की सबसे बड़ी नमक उत्पादन की सरकारी कम्पनी सांभर साल्ट लिमिटेड की। जो भारत सरकार का उपक्रम है। आजादी से पहले अंग्रेजी हुकुमत की ओर संचालित हिन्दुस्तान साल्ट लिमिटेड आजादी के बाद केन्द्र सरकार के अधीन आ गई। गुजरात, राजस्थान और कई राज्यों में हिन्दुस्तान साल्ट लिमिटेड की अलग-अलग कम्पनियां है, जो नमक उत्पादन कर रही है। लेकिन यदि राजस्थान की सांभर साल्ट लिमिटेड पर गौर किया जाए तो यह कम्पनी सरकार को बड़ा वित्तीय घाटा पहुंचा रही है।


यूं समझे सांभर साल्ट लिमिटेड के कार्य

सांभर साल्ट लिमिटेड आजादी के पहले से सांभर झील के पानी से नमक का उत्पादन कर रहा है। करीब 4 दशक पहले तक सांभर साल्ट लिमिटेड अकेले ही नमक का उत्पादन कर रहा था, लेकिन 1980 के बाद नागौर जिले और अजमेर जिले में निजी क्षेत्र में भी नमक का उत्पादन शुरु कर दिया गया। इसके बाद सांभर साल्ट लिमिटेड घाटे में जाने लगा और अब सांभर साल्ट लिमिटेड की स्थिति ज्यादा बिगड़ गई है। कारण भी स्पष्ट है कि सांभर झील पूरी तरह सूख गई और सरकारी सिस्टम की लापरवाही के चलते समुचित देखरेख के अभाव में पूरी कम्पनी घाटे में जाने लगी।

यह है सांभर साल्ट का घाटा


वर्ष 2016-17 में यह सांभर साल्ट लिमिटेड ने 1874 लाख की बिक्री की थी। इस दौरान कम्पनी कुल 855 लाख रुपए घाटे में रही। इसके बाद वर्ष 2017-18 में इस कम्पनी ने अपने घाटे की भरपाई के लिए सांभर झील क्षेत्र के पुराने खारड़े वापस शुरु किए और कई जगहों पर नई क्यारियां बनवा कर किराए पर दी। जिससे यह कम्पनी घाटे में कमी करते हुए 2017-18 में 258.11 लाख रुपए घाटे में रही थी। वर्ष 2018-19 में भी सांभर साल्ट लिमिटेड घाटे में रही है। गत वित्तीय वर्ष की अब तक घाटे की गणना नहीं हुई है।

बढाया गया नमक का उत्पादन


सांभर साल्ट लिमिटेड के नमक उत्पादन में पिछले सालों में काफी गिरावट आई थी। लेकिन वर्ष 2017-18 में कम्पनी ने वापस अपना नमक का उत्पादन बढा लिया। वर्ष 2016-17 में कम्पनी का नमक उत्पादन 2 लाख 62 हजार 458 मैट्रिक टन उत्पादन था जो वर्ष 2017-18 में बढकर 2 लाख 65 हजार 314 मैट्रिक टन हो गया। जबकि रिफाइनरी से उत्पादित नमक में कमी आई है। रिफाइंड नमक जहां 2016-17 में 19 हजार 65 टन था वहीं 2017-18 में 14 हजार 375 मैट्रिक टन हो गया। ऐसे में साफ तौर पर जाहिर है कि सांभर साल्ट अपनी नमक रिफाइनरी से घाटा झेल रहा है।

सांभर साल्ट के भाव भी अधिक


आम तौर पर जहां निजी नमक उत्पादकों के नमक के भाव 60 से 80 रुपए के बीच रहते है वहीं सांभर साल्ट की ओर से उत्पादित नमक के भाव 90 रुपए से 110 रुपए क्विंटल तक रहते है। जिसका कारण है कि सांभर साल्ट का नमक अच्छी गुणवत्ता का होता है। लेकिन इसके बावजूद सांभर साल्ट लिमिटेड घाटे में चल रहा है।
रिफाइनरी के घाटे का यह है बड़ा कारण
सांभर साल्ट की रिफाइनरी जहां प्रतिदिन 20-40 टन नमक को रिफाइंड कर रही है वहीं दूसरी ओर निजी क्षेत्र की नमक रिफाइनरियां 500 टन प्रतिदिन नमक रिफाइंड कर रही है। जबकि सरकारी और निजी क्षेत्र की नमक रिफाइनरी एक क्षमता की है। इसी प्रकार यदि रिफाइनरी की लागत पर नजर डाली जाए तो सूत्रों के अनुसार सांभर साल्ट ने हाल ही गत वर्ष नावां में नई नमक रिफाइनरी स्थापित की है जो 10 करोड़ से अधिक की लागत से लगी है जबकि निजी क्षेत्र में उसी क्षमता से की रिफाइनरी करीब 5 करोड़ में लगी है। निजी रिफाइनरियां जहां प्रतिदिन औसत 12-14 घंटे चलाई जाती है वहीं सांभर साल्ट की रिफाइनरियां महज 3-4 घंटे ही औसतन चलती है।

रिफाइनरी- सांभर साल्ट की ओर से संचालित है 2 नमक रिफाइनरी, दोनों रिफाइनरियां घाटे में जबकि निजी रिफाइनरी से लाखों का सालाना मुनाफा
नमक उत्पादन- सांभर साल्ट के पास है अच्छी गुणवत्ता के खारड़े और झील का पानी फिर भी लिमिटेड नहीं उभर रहा है घाटे से जबकि निजी क्षेत्र में नमक उत्पादक कमा रहे हैं अच्छा लाभ

इनका कहना-
सांभर साल्ट लिमिटेड घाटे में चल रहा है। हालांकि विगत कुछ वर्षों से घाटे में कमी आई है लेकिन अब भी लाभ की स्थिति नहीं है। गत वर्ष भी सांभर साल्ट को घाटा लगा है।
एस. के. टाक
महाप्रबंधक, वित्त एवं लेखा
सांभर साल्ट लिमिटेड, जयपुर।