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 रामकोला विधानसभा: यहां जीत की तस्वीर तय करते हैं मुस्लिम और दलित मतदाता

क्षत्रिय और सैंथवार मतदाताओं का भी इस सीट पर वर्चस्व 

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Ashish Kumar Shukla

Oct 02, 2016

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कुशीनगर. परिसीमन के बाद बर्ष 2012 में रामकोला विधानसभा सीट सामान्य से अनुसूचित हो गई। नतीजतन सारे समीकरण उलट - पलट गए। नए राजनीतिक माहौल व समीकरण के बीच हुए इस इलेक्शन में सपा ने अपनी सीट बचा ली। जातिय आंकड़ों के हिसाब से इस विधानसभा सीट में सैंथवार क्षत्रिय, मुस्लिम और हरिजनों की निर्णायक भूमिका रहती है। प्रदेश सरकार में राज्यमंत्री और इस सीट से विधायक रह चुके राधेश्याम सिंह भी व्यक्तिगत तौर पर इस विधानसीट में प्रभावकारी शख्सियत माने जाते हैं।

2012 में सपा ने मारी बाजी
प्रदेश विधानसभा के लिए वर्ष 2012 में हुए चुनाव की बात करें तो 3,02316 मतदाओं में से 52.09 प्रतिशत वोटरों ने अपने संवैधानिक अधिकार का प्रयोग किया था। लखनऊ की लालसा पाले 17 प्रत्याशी चुनाव मैदान में उतरे थे । इन सबको पछाड़ते हुए डॉ. पूर्णमासी देहाती 50861 मत हासिल कर इस सीट को सपा की झोली में डाल दिया था।


ये है राजनैतिक इतिहास
1991 में रामलहर के बीच हुए चुनाव में रामकोला विधानसभा सीट से भाजपा प्रत्याशी अंबिका सिंह को मतदाताओं ने विधानसभा में भेजा था। 1993 में भाजपा प्रत्याशी की हैसियत से अंबिका सिंह एकबार फिर चुनाव मैदान में उतरे और उन्होंने सपा उम्मीदवार अजीमुलहक को हराकर अपनी सीट बचा ली। इस चुनाव में अंबिका सिंह को 44038 मत मिले थे। 1996 के इलेक्शन में निर्दलीय प्रत्याशी की हैसियत से राधेश्याम सिंह मैदान ने भाजपा प्रत्याशी अंबिका सिंह को करारी शिकस्त दे दी। राधेश्याम सिंह को 67668 मत मिले थे जबकि भाजपा प्रत्याशी अंबिका सिंह 38109 मतों पर सिमट गए थे। चौदहवीं विधानसभा के लिए हुए चुनाव में राधेश्याम सिंह को सपा के टिकट दे दिया। उन्होंने बसपा प्रत्याशी अजीमुलहक 22 हजार से ज्यादा मतों से हराकर अपनी सीट बचा ली। 2007 के चुनाव में भाजपा प्रत्याशी जसवंत उर्फ अतुल सिंह ने सपा प्रत्याशी राधेश्याम सिंह को हराकर जीत का सेहरा अपने सिर बांध लिया। इस चुनाव में अतुल सिंह को 45097 मत मिले थे और सपा प्रत्याशी राधेश्याम सिंह को 40810 वोट प्राप्त हुए थे।
दिलचस्प होगा 2017 विधानसभा चुनाव
चुनाव के कदमों की आवाज साफ सुनाई देने के बाद भी भाजपा और कांग्रेस ने अपने उम्मीदवारों की घोषणा नहीं की है। सपा ने इस सीट से मौजूदा विधायक पूर्णमासी देहाती को अपना प्रत्याशी बनाया है। बसपा ने पूर्व विधायक शंभू चौधरी को चुनाव मैदान में उतारा है। सभी दलों के प्रत्याशियों की घोषणा न होने से चुनावी समीकरण की अभी कोई तस्वीर नहीं बन पा रही है लेकिन प्रत्याशियों को लेकर कयासबाजी का खूब चल रही है।

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