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प्रभात गुप्ता हत्याकांड: 3 बार फैसला सुरक्षित, क्या इस बार होगा केंद्रीय मंत्री टेनी के भविष्य का फैसला?

Ajay Mishra Teni: हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में लखीमपुर खीरी के छात्र नेता प्रभात गुप्ता हत्याकांड की सुनवाई पूरी हो गई है। इस मामले में फैसले को सुरक्षित रखा है.।अब कोर्ट 19 मई को अपना फैसला सुनाएगी।

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high court bench will give verdict in prabhat gupta murder case

प्रभात गुप्ता हत्याकांड में कोर्ट आज फैसला सुुनाएगी।

Ajay Mishra Teni: लखीमपुर में 23 साल पहले हुए प्रभात गुप्ता हत्याकांड में आज फैसला आ सकता है। केंद्रीय मंत्री अजय मिश्रा टेनी मुख्य आरोपी हैं। 2004 में यह मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ में पहुंचा। तब से अब तक लखनऊ बेंच ने हत्याकांड में 3 बार फैसला सुरक्षित रखा, लेकिन फैसला नहीं आ पाया। आज जस्टिस AR मसूदी और OP शुक्ला की बेंच केस पर फैसला सुना सकती है।

लखीमपुर के तिकुनिया में 8 जुलाई 2000 को लखनऊ विश्वविद्याल के छात्र नेता प्रभात गुप्ता की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस हत्याकांड में 4 लोग सुभाष मामा, शशि भूषण उर्फ पिंकी, राकेश उर्फ डालू के साथ-साथ अभी के केंद्रीय गृह राज्य मंत्री भी शामिल हैं। प्रभात गुप्ता के पिता संतोष गुप्ता की तरफ से दर्ज कराई गई FIR में आरोप लगाया गया था कि उनके बेटे प्रभात गुप्ता को दिनदहाड़े अजय मिश्र टेनी ने गोली मारी थी।

जिला जज की अदालत में टेनी 2003 को हुए पेश
मामले में 25 जून 2003 को अजय मिश्र टेनी जिला जज चंद्रमा सिंह की अदालत में हाजिर हुए। इसके बाद अभियोजन पक्ष ने उनकी तरफ से सुनवाई के लिए पांच दिन का समय मांगा, लेकिन, उनकी अर्जी नामंजूर कर दी गई। अदालत ने अभियुक्त के विरुद्ध चार्जशीट दाखिल होने का हवाला दिया।

जिला जज ने अजय मिश्र टेनी की जमानत को कैंसिल कर दिया। हालांकि, उनके दिल का मरीज होने के कारण जेल के बजाय अस्पताल में भर्ती कराने के आदेश दिए। वहीं अगले दिन अपर जिला जज ने अजय मिश्र ट्रेनी की जमानत मंजूर करते हुए रिहा कर दिया।

2004 में ही हाईकोर्ट में दाखिल की गई थी अपील
इसके बाद 29 मार्च 2004 को लखीमपुर जिला कोर्ट में सुनवाई होने के बाद 15 मई 2004 को अजय मिश्र टेनी समेत चारों आरोपियों को पर्याप्त साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया गया। इस फैसले के खिलाफ वर्ष 2004 में ही हाईकोर्ट में अपील दाखिल की गई थी।

तीन बार फैसला किया जा चुका है सुरक्षित
बता दें कि हाईकोर्ट लखनऊ में तीन बार फैसला रिजर्व किया जा चुका है। सबसे पहले 12 मार्च 2018 को जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और दिनेश कुमार सिंह ने फैसला सुरक्षित रखा। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर 10 नवम्बर 2022 को जस्टिस रमेश सिन्हा और रेनु अग्रवाल ने फैसला सुरक्षित किया। वहीं, तीसरी बार 21 फरवरी 2023 को जस्टिस अट्टू रहमान मसूदी और जस्टिस ओम प्रकाश शुक्ला की बेंच ने फैसला सुरक्षित रखा। अब जस्टिस अट्टू रहमान मसूदी और जस्टिस ओम प्रकाश शुक्ला की बेंच शुक्रवार को मामले में फैसला सुनाएगी, जिस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।