
गर्मियों में बाघों के लिए बजी खतरे की घंटी, कड़े किए गए सुरक्षा के इंतजाम
लखीमपुर खीरी. भीषण गर्मी में पानी की तलाश में जंगल से निकलकर इन दिनों बाघ तथा अन्य वन्य जीव नदियों व नहर के किनारे तक खूब पहुंच रहे हैं। खासकर किशनपुर सेंचुरी के झादीताल में अक्सर बाघों को पानी पीते देखा जा सकता है। शिकारी ऐसे ही मौके की तलाश में रहते हैं कि जब बाघ अकेले हो तभी मौका पाकर मांस के टुकड़े में जहर मिलाकर बाघ का शिकार करते हैं।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम
दुधवा पार्क के अधिकारियों ने इस खतरे को भागते हुए अभी से ही सुरक्षा के कड़े इंतजाम कर लिए हैं। फील्ड डायरेक्टर सुनील चौधरी ने बताया कि दुधवा पार्क, किशनपुर सेंचुरी, बफर जोन और बहराइच के कर्तनिया घाट के वन्य जीवों की सुरक्षा के लिए एडवाइजरी जारी की है। पेट्रोलिग टीमों को नदियों के किनारे नियमित गस्त करने के निर्देश दिए गए हैं। वैसे तो हर साल दुधवा पार्क अधिकारी दावा करते हैं। कि जंगल में जलाशयों, वाटरहोल, कृत्रिम वाटर-होल और नदियों में पानी पर्याप्त है। लेकिन जमीनी हकीकत इससे काफी दूर होती है। पानी की तलाश में हर साल जंगली जानवरों आबादी वाले क्षेत्र का रुख करते हैं। जंगली जानवरों के बाहर आने से कई बार मानव-बाघ संघर्ष की घटनाएं प्रकाश में आती हैं।
गर्मी का मौसम बाघों के लिए संवेदनशील
दुधवा में सुहेली नदी, किशनपुर में शारदा नदी मैलानी में उल्ल नदी और शारदा कैनाल, भीरा में शारदा नदी मोहम्मदी में कठिना नदी का किनारा गर्मी में बाघों के लिए बेहद संवेदनशील हो जाता है। शिकारी ताक में रहते हैं कि कब बाघ पानी पीने के लिए बाहर आए और उसे खाबड़ में फसाएं और मांस के टुकड़ों में जहर मिलाकर अपना शिकार बना ले। दुधवा सहित अन्य जंगली क्षेत्रों में ऐसी कई घटनाएं सामने आ चुके हैं। वर्ष 2009 में मैलानी के बाकेगज रेज के पास शारदा कैनाल में एक 4 साल के बाद का शव बरामद हो चुका है।
शिकारियों के नेटवर्क का खुलासा
इसी तरह से वर्ष 2012-13 में मानसून के दौरान जंगल से सटे गांवों में शिकारियों का नेटवर्क फेले होने का खुलासा हुआ था। इसलिए गर्मी और मानसून के दिनों में इस साल भी शिकारियों की मौजूदगी से इनकार नहीं किया जा सकता है। दुधवा पार्क एरिया के इस अजान खतरे को भाप कर फील्ड डायरेक्टर ने डीडी महावीर कॉजलागि, बफर जोन के डीडी अनिल कुमार पटेल, कर्तनिया घाट के अधिकारियों से सतर्कता बढ़ने के निर्देश दिए हैं। ताकि समय रहते संबंधित अधिकारी सुरक्षा इंतजामों को मजबूत कर सके।
पहले ही जारी हो चुकी है एडवाइजरी
वहीं बफर जोन के डी डी डॉक्टर अनिल कुमार पटेल का कहना है कि सुरक्षा इंतजामों के लिए पहले ही फील्ड डायरेक्टर की ओर से एडवाइजरी जारी हो चुकी है। टाइगर प्रोजेक्शन फोर्स के सीओ भी जवानों को ऐसी चेतावनी से निपटने के लिए तैयार कर रहे हैं। शिकारी गिरोह पर भी पूरी नजर रखी जा रही है। और नियमित गश्त बढ़ाने के निर्देश दिए जा चुके हैं।
Published on:
22 May 2018 10:57 am
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