मोहल्लेवासियों को शिवजी की पूजा प्रतिष्ठा करनी थी इसलिए लोगों की आम सहमति के बाद आनन फानन में तत्काल इस मंदिर का निर्माण कराया गया था। इसलिए इसका नाम स्थिति परिस्थिति के मुताबिक तुरंतानाथ रखा गया। शुरू में यह छोटी सी मठिया थी, इसके बाद 1993 में इसका जीणोद्धार करा कर मोहल्लेवासियों ने ही इसे भव्य स्वरूप प्रदान किया। तबसे तुरंतानाथ मंदिर भक्तों के लिए श्रद्धा का केंद्र है।