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इस नेता ने बीजेपी से की बगावत, पत्नी को चुनाव जिताने के लिए मैदान में आया ये बॉलीवुड एक्टर

फिल्म पद्मावती पर अभिनेता रजा मुराद ने बयान दिया कि लोग बेकार में इस फिल्म को लेकर झगड़ा फसाद कर रहे हैं।
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ललितपुर

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Akansha Singh

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Updated: 20 Nov 2017, 8:48 AM IST

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ललितपुर. नेताओं ने फ़िल्म अभिनेताओं की लोकप्रियता का सहारा अपने चुनाव में शुरू कर दिया है। भाजपा के बागी विधायक ने अपनी पत्नी को ललितपुर नगर पालिका परिषद से अध्यक्ष पद का नामांकन कर भाजपा के खिलाफ बगावत की ताल ठोक दी। अपनी साफ छवि और कुशवाहा समाज के थोक वोटों की बदौलत बे नगरपालिका परिषद की नैया पार करने की जुगत में है और कोई रिस्क भी नहीं उठाना चाहते। उन्होंने फिल्म इंडस्ट्रीज के चर्चित कलाकार और वर्तमान में फिल्म पद्मावती जिसका विरोध रिलीज होने के पहले ही काफी हो रहा गया है, उसमें एक अहम रोल निभा रहे फिल्म इंडस्ट्रीज के चर्चित अभिनेता रजा मुराद को ललितपुर बुलाया।

फिल्म पद्मावती पर बोले रजा मुराद

फिल्म पद्मावती पर अभिनेता रजा मुराद ने बयान दिया कि लोग बेकार में इस फिल्म को लेकर झगड़ा फसाद कर रहे हैं। भारत के इतिहास में आज तक इस तरह की फिल्म नहीं बनी। जिस ने राजपूतों के इतिहास को उनकी वीरता को और उनकी कुर्बानियों को पर्दे पर दिखाया हो। अगर राजपूत इस फिल्म को देखेंगे तो उनका सीना गर्व से चौड़ा हो जाएगा। अभी तक यह फिल्म किसी ने नहीं देखी तो फिर इसका विरोध क्यों किया जा रहा है जो लोग इस फिल्म में विदेशों का पैसा लगाया होना बता रहे हैं क्या वह यह साबित कर सकते हैं कि इसमें दुबई का पैसा लगा हुआ है। इस फिल्म के प्रदर्शन के बाद मैं दावे से कह सकता हूं कि किसी की भी छवि को धक्का नहीं पहुंचेगा किसी की छवि खराब नहीं होगी। और न ही इस फ़िल्म में इतिहास को तोड़-मरोड़ कर दिखया गया है। यह फिल्म बहुत अच्छी फिल्म है संजय लीला भंसाली यह बहुत बड़ी डायरेक्टर हैं। वह सभी पहलुओं पर संजीदा से विचार कर फिल्म का निर्माण करते हैं जिससे उनकी फिल्म में विरोधाभास उत्पन्न ना हो।

राम मंदिर मुद्दे पर बोले रजा मुराद

रजा मुराद ने बयान दिया कि श्री श्री रविशंकर ने एक बार पहले भी मंदिर मुद्दे को सुलझाने का प्रयास किया था। व्यक्ति को हमेशा प्रयास करना चाहिए प्रयास करने में कोई बुराई नहीं है। कोई मुद्दा सुलझे या न सुलझे यह अलग बात है। अगर अयोध्या का राम मंदिर मुद्दा आपसी सुलह समझौते के आधार पर सुलझ जाता है तो इसमें कोई बुराई नहीं है। क्योंकि किसी भी चीज को लेकर झगड़ा खुद एक मसला है और मसले से मसले को हल नहीं किया जा सकता। अगर सबकी सहमति बनती है और यह मुद्दा निपट जाता है तो इससे अच्छी कोई बात नहीं हो सकती। नहीं तो फिर यह मामला कोर्ट में चल ही रहा है सुप्रीम कोर्ट का जो फैसला आएगा उसे हम सर झुका कर स्वीकार करेंगे।