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यूपी ने दुत्कारा, सरहद लांघकर काबिलियत का बजाया डंका

कहानी क्रिकेटर अंजनी की....

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Cricketer Anjani Yadav career history and biography in Hindi

यूपी ने दुत्कारा, सरहद लांघकर काबिलियत का बजाया डंका

आलोक पाण्डेय

ललितपुर. हौसलों की उड़ान कौन रोक सकता है। जज्बा और जिद कायम रहेगी तो मंजिल तक पहुंचने की राह मिल ही जाती है। ललितपुर की अंजनी यादव ने अपने सपने को पूरा करने के लिए खेल के मैदान में बारिश की मानिंद पसीना बहाया और देश की अंडर-19 महिला क्रिकेट टीम में अपना स्थान पक्का कर लिया। ऐसा नहीं है कि अंजनी को यह मुकाम आसानी से हासिल हुआ है। उसे यूपी के भ्रष्ट तंत्र और निकम्मी अफसरशाही से जूझना पड़ा। गुहार को सुनने वाला कोई नहीं मिला तो सरहद लांघकर मध्यप्रदेश में प्रतिभा का प्रदर्शन करना पड़ा। गली क्रिकेट से शुरु हुआ अंजनी का क्रिकेट फिलहाल अंडर-19 के पड़ाव तक पहुंच गया है। उसे अफसोस है कि अपनी माटी के लिए खेलने का मौका नहीं मिला। इस अफसोस के साथ अंजनी को सुकून है कि यूपी छूट गया, लेकिन हिंदुस्तान के लिए खेलने का मौका अब करीब है।

हमीरपुर की बेटी ने ललितपुर में तराशा अपना क्रिकेट

यूपी के हमीरपुर जनपद का छोटा और पिछड़ा गांव है गुंदेरा। डेढ़ हजार की आबादी वाले गुंदेरा गांव की लाड़ली है अंजनी यादव। बाबा-दादी और चाचा-चाची आज भी गांव में रहते हैं। अंजनी के पिता रविंद्र यादव फायर ब्रिगेड में बतौर सिपाही तैनात हैं। तबादलों के चलते खाना-बदोश जैसी जिंदगी को ललितपुर में एक ठहराव मिला तो मकान बना लिया। फिलहाल ललितपुर में ठहराव के 17 बरस गुजर चुके हैं। इसी दौर में अंजनी के सपनों को संजोया और क्रिकेट की दुनिया में बड़ा नाम कमाने का इरादा बना लिया। अब स्कूल और स्टेडियम ही अंजनी की जिंदगी का हिस्सा थे। शुुरुआत में कुछ रिश्तेदारों ने लडक़ी के क्रिकेट खेलने पर ऐतराज किया तो मां उर्मिला ने बेटी का हौसला बढ़ाया। पिता ने तर्क देकर लोगों का मुंह बंद कर दिया। अब अंजनी को आगे बढऩे से रोकने का माद्दा किसी में नहीं था शायद।

अफसरों को पैसा चाहिए, पिता के पास जुगाड़ भी नहीं

रविद्र-उर्मिला की चार संतानों में तीसरे नंबर की अंजनी का वक्त राजकीय कन्या इंटर कालेज और ललितपुर के खेल स्टेडियम में गुजरता था। माही की बल्लेबाजी की दीवानी अंजनी को कुछ दिन बाद सपने बिखरते दिखने लगे। स्कूल के खेल शिक्षक बृज बिहारी मिश्रा ने एक मैच में अंजनी के बल्ले से आतिशबाजी देखी तो उसे तराशने का फैसला कर लिया था। स्कूल की तरफ से मंडलीय क्रिकेट प्रतियोगिताओं में अंजनी के नाम से गेंदबाज डरने लगे थे। झांसी में जिला क्रिकेट एसोसिशयन में अंजनी ने आगे बढऩे के लिए दस्तक देना चाहा तो उसे नकार दिया गया। कारण पूछने पर फटकार मिली। बाद में मालूम हुआ कि सेटिंग के जरिए ही किसी स्पोट्र्स हॉस्टल में पहुंच पाएगी। पिता रविंद्र यादव रिश्वत देने के खिलाफ थे। पिता ने समझाया कि अपनी काबिलियत के दम पर मुकाम हासिल होगा तो डंका बजेगा। जुगाड़ की सीट स्थाई नहीं होती है। यह बात अंजनी को जंच गई। खेल टीचर बृज बिहारी ने अंजनी को मध्यप्रदेश की जमीन से क्रिकेट खेलने को कहा। अब अंजनी के सामने एक विकल्प था।

मुरैना के रास्ते अंडर-19 तक पहुंच गई सलामी बल्लेबाज

अंजनी ने मध्यप्रदेश के मुरैना के चंबल संभाग से वर्ष 2015 में अपना रजिस्ट्रेशन करा लिया। फिर मुरैना और ग्वालियर में अपनी बल्लेबाजी की ऐसी धाक जमाई कि इंदौर से खेलने का न्योता मिल गया। वर्ष 2016 के अंत में अंजनी का नया ठिकाना इंदौर बन चुका था। इंदौर में धाकड़ बल्लेबाजी जारी थी। इसी दौरान काबिलियत का डंका बजा और अंजनी का नाम अंडर-19 स्टेट टीम के लिए मध्यप्रदेश की 25 खिलाडिय़ों में शामिल हो गया। ट्रायल में बल्ला रन उगलता रहा और अंतिम 15 की लिस्ट में अंजनी का नाम दमकता दिखा। अंजनी को एक पड़ाव मिल चुका है। उसकी मंजिल इंडिया टीम की ब्लू जर्सी है। मिताली राज और अपर्णा बिष्ट से प्रभावित अंजनी को मलाल है कि यूपी की टीम से खेलने का मौका नहीं मिला। अंजनी ने जिला खेल अफसरों के भ्रष्टाचार की शिकायत कई चौखटों तक पहुंचाई, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। बहरहाल, अंजनी ने हालात से हारने के बजाय दूसरे रास्तों को अख्तियार किया और अपनी मंजिल की तरफ हौले-हौले कदम बढ़ाना जारी रखा है।







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