
Karwa Chauth 2018: कन्या, मिथुन, मकर, कुंभ, वृष व तुला राशि वाली महिलाओं के लिए होगा विशेष
ललितपुर. शनिवार को करवा चौथ है। सुहागिन महिलाओं को इस दिन का बड़ा बेसब्री से इंतजार रहता है। इस बार करवा चौथ का व्रत सुहागिनों के लिए विशेष फलदायी है। 27 साल बाद ऐसा संयोग बना है। यह संयोग इससे पहले 1991 में बना था। इस करवाचौथ में चंद्रमा के रोहिणी नक्षत्र में होने से अमृत सिद्धि के विशेष संयोग बन रहे हैं। 27 अक्टूबर यानी शनिवार को करवा चौथ का व्रत है, यह व्रत 27 साल बाद विशेष फलदायी होगा। करवाचौथ के दिन सुहागिन महिलाएं अखंड सौभाग्य की कामना के साथ निर्जल व्रत धारण कर चंद्रदेव से अपने पति के दीर्घायु की कामना करती हैं। इस बार का यह व्रत काफी महत्वपूर्ण होगा। इस साल चंद्रमा रोहिणी नक्षत्र का होगा, इसलिए करवाचौथ का व्रत रखने वाली महिलाओं को इस बार विशेष फल प्राप्ति के संयोग बनेंगे।
इस बार मगर शुक्र अस्त रहने के कारण महिलाएं व्रत का उद्यापन नहीं कर पाएंगी। आचार्य पंडित अशोक पांडेय के मुताबिक करवाचौथ का व्रत कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को होता है। इस बार चंद्रमा शाम 7.35 बजे उदय होगा, लेकिन चतुर्थी शाम 7.58 बजे से आरंभ होगी। ऐसे में शाम 7.58 के बाद अध्र्य देना अत्यंत लाभकारी होगा। आचार्य पंडित अशोक पांडेय ने बताया कि इस बार का करवाचौथ व्रत ऐसे समय में पड़ रहा है। जब शुक्र तारा अस्त रहेगा। शुक्र अस्त के समय में कोई शुभ कार्य नहीं किए जाते हैं, इसलिए इस वर्ष सुहागिनें करवाचौथ व्रत का उद्यापन नहीं कर पाएगी। उन्होंने बताया कि चंद्रमा के वृष गति में होने के कारण कन्या, मिथुन, मकर, कुंभ, वृष व तुला राशि वाली महिलाओं को पति से विशेष सुख प्राप्त होगा।
पूजा का मुहूर्त
आचार्य पंडित अशोक पांडेय ने बताया कि धर्मग्रंथों के मुताबिक, ज्योतिष में जो 27 नक्षत्र बताए गए हैं ये सभी चंद्रमा की पत्नियां हैं। इनमें से एक रोहिणी चंद्रमा की सबसे प्रिय हैं। रोहिणी नक्षत्र में चंद्रमा के उदय होने से पति-पत्नी में प्रेम और सुख-समृद्धि बढ़ेगी, इसलिए रोहिणी नक्षत्र में चंद्रमा की पूजा-अर्चना विशेष फलदायी है। पूजा का शुभ मुहूर्त 5.40 से 6.47 बजे तक रहेगा, लेकिन चंद्रमा को अध्र्य 7.58 बजे के बाद देना शुभकारी होगा।
Published on:
26 Oct 2018 06:55 pm
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