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वह शिव मंदिर जिसके डर से औरंगजेब को भी भागना पड़ा, और फिर शुरू हुआ जलाभिषेक

सावन के पहले सोमवार पर दुनियाभर में शिव मंदिरों और स्थलों पर भक्तों का जमावड़ा लगा हुआ है। वहीं उत्तर प्रदेश में एक ऐसा शिवलिंग भी है, जहां से खुद औरंगजेब भी डरकर भागा था। विश्व में से आए लोगों का अर्धनारीश्वर शिव मंदिर में तांता लगा रहता है।

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फ़ाइल फोटो औरंगजेब और ललितपुर में मौजूद शिवलिंग

फ़ाइल फोटो औरंगजेब और ललितपुर में मौजूद शिवलिंग

यह शिव मंदिर आस्था के केंद्र बिंदु के साथ साथ ऐतिहासिक एवं पर्यटन की दृष्टि से भी बहुत महत्वपूर्ण है । इतना ही नहीं यह शिव मंदिर विश्व पर्यटन मानचित्र पर भी अंकित है। श्रद्धालुओं के अनुसार इस मंदिर की सबसे बड़ी खास बात यह है कि यहां पर आए हुए श्रद्धालुओं की सच्चे पवित्र ह्रदय से मांगी गई मनोकामनाएं पूर्व होती है ।

प्रकृतिक जल प्रपात से ठीक होती हैं बीमारियाँ

एक प्राकृतिक जलप्रपात से निकलता हुआ पानी अपने भक्तों के शारीरिक कष्टों को हरकर निरोगी शरीर देता है । लोग बताते है कि इस जलप्रपात का पानी पीने से यहां क्षेत्रवासियों के साथ-साथ दूर-दूर से आये हुए श्रद्धालुओं की कई शारीरिक बीमारियां अपने आप ठीक हो जाती है। सावन के महीने में यहां पर भक्तों की अटूट श्रद्धा का नजारा देखा जा सकता है।

विंध्या पर्वत श्रंखला से शुरुआत

जनपद की तहसील पाली के स्थानीय कस्बे से 5 किलोमीटर दूर विंध्याचल पर्वत श्रंखला की गोद में बसे आध्यात्मिक प्राकृतिक पर्यटन तीर्थ स्थल नीलकंठेश्वर धाम की। क्षेत्र की बड़ी आस्था का केंद्र बिंदु नीलकंठेश्वर धाम की महिमा निराली है यह तीर्थ स्थल लगभग 2000 वर्ष पुराना बताया गया है । यह शिव मंदिर चंदेल कालीन है इस मंदिर में भगवान शिव की जो त्रिमूर्ति प्रतिमा बनी हुई है वह पूरे भारतवर्ष में कहीं नहीं है।

औरंगजेब भी भाग गया था शिव के चमत्कार से डरकर

ऐसा कहा जाता है कि, चमत्कार देखकर मुगल शासक औरंगजेब जो मंदिर तोड़ने के लिए आया था यहां का चमत्कार देख यहां से नतमस्तक होकर गया था । यहां के बुजुर्ग लोग बताते है कि यहां के मंदिर के बारे में ऐसा वर्णित कि जब औरंगजेब ने हिंदू आस्था मंदिरों को अपना निशाना बनाया और उन्हें तहस-नहस करने की ठानी । तब वह मंदिरों को तोड़ता हुआ इस नीलकंठेश्वर धाम पर भी आया और यहां चमत्कारिक शिव की प्रतिमा पर उसी खंडित करने के उद्देश्य तलवार से प्रहार किया और गोली चलाई । तब शिव की प्रतिमा से पहले दूध की धार निकली फिर गंगाजल की धारा निकली एवं ओम नमः शिवाय के साथ साथ शंख झालर घंटों की आवाजें आने लगी। तब यह चमत्कार देखकर औरंगजेब भगवान के आगे नतमस्तक होकर लौट गया। अब यह प्राचीन शिव मंदिर पुरातत्व विभाग के अधिकार क्षेत्र में है।


सड़क से मंदिर तक पहुंचने के लिए सीढ़ियां बनी हुई है जो बरसात के समय में पानी से सराबोर रहती हैं। सीढ़ियां चढ़ते समय ऐसा महसूस होता है कि जैसे मानो हम किसी पहाड़ी पर्यटन स्थल पर आ गए हो चारों तरफ विंध्याचल पहाड़ी के साथ साथ लगे हुए पेड़ पौधे मन को मोह लेते हैं । यहां का बाताबरण और दृश्य किसी भी हिल स्टेशन की।याद दिलाता है।

मंदिर के नीचे मंदिर पर चढ़ाने के लिए प्रसाद सहजता से उपलब्ध हो जाता है। श्रद्धालुओं की ऐसी आस्था है कि मंदिर के नीचे बने झरने में नहाने से शरीर की चर्म रोग दूर हो जाती है तो वहीं इस झरने का पानी पीने से शरीर के अंदर की कई बीमारियां भी ठीक हो जाती है। मान्यता है कि इस झरने का पानी पीने वालों को कभी पेट की बीमारियों से ग्रसित नहीं होना पड़ता। यहां पूरे भारतवर्ष से हजारों की तादाद में श्रद्धालु आते हैं और अपने वाहनों में झरने का पानी भरकर ले जाते हैं जो एक गंगा जल की तरह काम करता है।

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