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निमोनिया क्या है और क्यों होता है, जानिए लक्षण और बचने के उपाय

बदलते मौसम के साथ बच्चों में डायरिया, हैजा के साथ-साथ निमोनिया का खतरा भी मंडराना शुरू हो जाता हैं। इसके लक्षण भी आम बीमारियों से काफी मिलते-जुलते हैं।

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nimoniya kya hai hindi me

बदलते मौसम में सर्दी, खांसी, जुकाम को न करें नजरअंदाज, हो सकती है यह बीमारी

ललितपुर. बदलते मौसम के साथ बच्चों में डायरिया, हैजा के साथ-साथ निमोनिया का खतरा भी मंडराना शुरू हो जाता हैं। इसके लक्षण भी आम बीमारियों से काफी मिलते-जुलते हैं, परंतु निमोनिया को लोग आमतौर पर मामूली बीमारी मानकर नजर अंदाज करने की गलती करते हैं। इस कारण यह बीमारी रोगी के लिए बेहद खतरनाक हो जाती हैं। इस बीमारी से छाती में संक्रमण और लगातार खांसी होती हैं।

भारत में बाल निमोनिया एक गंभीर बीमारी हैं। पांच साल से कम उम्र के किसी भी बालक को यह बीमारी कभी भी हो सकती हैं। बुखार, खांसी और सांस तेजी से चलना यह लक्षण होने पर इसे निमोनिया समझना चाहिए। यह बीमारी अक्सर जीवाणु या कभी-कभी विषाणुओं से होती हैं। आम सी बीमारी है निमोनिया लेकिन अगर सही इलाज न हो तो यह बड़ी परेशानी का सबब भी बन सकती हैं, खासकर बच्चों और बुजुर्गों में।

सेव द चिल्ड्रेन द्वारा फाइटिंग फॉर ब्रीथ 2017 की रिपोर्ट के अनुसार बताया गया कि वर्ष 2015 में निमोनिया की वजह से भारत में पांच साल से कम आयु के 1,78,717 बच्चों की मृत्यु हो गई थी। इसका मतलब है कि उस दौरान हर घंटे 20 बच्चे इस बीमारी के कारण से मर गए थे। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार, भारत में तीन मौतों में से एक निमोनिया के कारण होता है। भारत में निमोनिया शिशु मौत का प्रमुख कारण है। विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट 2016 के अनुसार भारत में निमोनिया से 5 साल से कम उम्र के बच्चों की सभी मौतों का 16 प्रतिशत हिस्सा हैं। वर्ष 2015 में 920136 बच्चों की मृत्यु सिर्फ निमोनिया के कारण हुई थी।

क्या है निमोनिया

निमोनिया सांस से जुड़ी एक गंभीर बीमारी है, जिसमें फेफड़ों में संक्रमण हो जाता हैं। आमतौर पर बुखार या जुकाम होने के बाद निमोनिया होता है और यह 10-12 दिन में ठीक हो जाता है, लेकिन कई बार यह खतरनाक भी हो जाता हैं, खासकर 5 साल से छोटे बच्चों और 60 साल से ज्यादा उम्र के लोगों में क्योंकि उनकी प्रतिरोधक क्षमता कम होतीं। दुनिया भर में होने वाली बच्चों की मौतों में 18 फीसदी सिर्फ निमोनिया की वजह से होती हैं। निमोनिया होने पर फेफड़ों में सूजन आ जाती है और कई बार पानी भी भर जाता हैं। बच्चों में आमतौर पर वायरल से निमोनिया होता हैं।

क्यों होता है निमोनिया

निमोनिया ज़्यादातर बैक्टीरिया, वायरस या फंगस के हमले से होता हैं। मौसम बदलने, सर्दी लगने, खसरा और चिकनपाक्स जैसी बीमारियों के बाद भी इसकी आशंका बढ़ जाती हैं। टीबी, एचआईवी पॉज़िटिव, अस्थमा, डायबिटीज़, कैंसर और दिल के मरीजों को निमोनिया होने की आशंका ज्यादा होती हैं।

क्या हैं निमोनिया के लक्षण

निमोनिया में बैक्टीरिया, वायरस, फंगस से फेफड़ों में एक टाइप का संक्रमण होता हैं जो फेफड़े में लिक्विड जमा करके खून और ऑक्सीज़न के फ़्लो में रुकावट पैदा करता हैं। बलगम वाली खांसी, सीने में दर्द, तेज बुखार और सांस तेजी से चलना निमोनिया के प्रमुख लक्षण हैं।

ललितपुर निवासी डॉक्टर राज नारायण, बाल रोग विशेषज्ञ ने बताया कि इस मौसम में यह बीमारी वायरल के कारण होती हैं। जब कोई संक्रमित व्यक्ति खांसते व छीकते हैं तो इसका वायरस व बैक्टीरिया सांस के द्वारा फेफड़ों तक पहुंच कर व्यक्ति को संक्रमित कर देता हैं। इसके अलावा उन्होंने बताया कि निमोनिया का अटैक बच्चों पर ज्यादा होता है खासतौर पर पांच साल से कम उम्र के ज़्यादातर बच्चों में निमोनिया होने पर उन्हें सांस लेने में दिक्कत होती हैं। दूध पीने में भी दिक्कत होती है और वह सुस्त हो जाता हैं। इसलिए निमोनिया के प्रति लोगों को जागरूक करने की जरूरत हैं।

ऐसे करें बचाव

इसके अलावा उन्होने बताया कि इस बीमारी से बचाव के लिए छोटे बच्चों को संक्रमित व्यक्ति से दूर रखना चाहिए, क्योंकि बच्चों की प्रतिरोधक क्षमता कम होती है और वह जल्द ही इस बीमारी से ग्रसित हो जाते हैं। इसके अलावा उन्होने बताया कि इस बीमारी से बचाव के लिए स्वच्छता का भी विशेष ध्यान रखना चाहिए। अगर सर्दी, जुकाम ठीक नहीं हो रहा है तो बिना समय गंवाए डॉक्टर को दिखाना चाहिए नहीं तो गंभीर स्थिति हो जाने पर निमोनिया से मृत्यु भी हो सकती हैं।