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प्रोजेक्ट नई किरण ने काउंसलिंग के जरिये दो परिवारों को टूटने से बचाया

उत्तर प्रदेश के ललितपुर जिले में बुजुर्ग दम्पत्ति के साथ युवा दम्पत्ति ने अपनी अपनी भूलों को स्वीकार कर एक दूसरे को पुष्प देकर अपनी गलती मान कर परिवार को बचाने जैसी अच्छी खबर पूरे दिन चर्चा का केंद्र रहीं। जिसमें प्रोजेक्ट नई किरण ने काउंसलिंग के जरिये दो परिवारों को टूटने से बचाया है।

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Lalitpur Police

ललितपुर जिले के जनपद में पिछले कई बर्षों से संचालित टूटते रिश्तों को जोड़ने की पहल कार्यक्रम "प्रोजेक्ट नई किरण" वास्तव में अपने आप में मील का पत्थर साबित हो रहा है। जिसकी चर्चा जनपद से लेकर प्रदेश मुख्यालय तक कई बार हो चुकी है। प्रोजेक्ट नई किरण कई ऐसे आपसी पारिवारिक विवादों को सुलझाया जिन के सुलझने की उम्मीद न्यायालय में भी टूट चुकी थी, लेकिन जब उक्त मामले प्रोजेक्ट नई करण में पहुंचे तब आसानी से सुलझाए गए और आज भी घर बसे हुए हैं। प्रोजेक्ट नई किरण के अंतर्गत पुलिस लाइन सभागार में दिनांक 29 मई 2022 रविवार को पारिवारिक विवादों की सुनवाई की गई। पुलिस अधीक्षक निखिल पाठक के कुशल निर्देशन में चलाएं जा रहे प्रोजेक्ट नई किरण में रविवार को पुलिस उपाधीक्षक अतुल कुमार पाण्डेय की अध्यक्षता में सुनवाई की गई। इस कार्यक्रम में 2 ऐसे मामले आए जिसमें एक बुजुर्ग दंपत्ति को एक दूसरे से शिकायत थी, तो एक अधेड़ दंपत्ति को भी एक दूसरे से शिकायत थी । जिसको लेकर आपसी तनातनी चल रही थी लेकिन काउंसलिंग के बाद दोनों ही परिवार एक हो गए।
रविवार को पुलिस लाइन सभागार में प्रोजेक्ट नई किरण के सामने बड़ी संख्या में मामले आएं, जिसमे एक बड़ा ही अनोखा मामला 75 वर्षीय बुजुर्ग दम्पत्ति का आया। दादा-दादी की उम्र के ये पति-पत्नी एक दूसरे की शिकायत लेकर एसपी ऑफिस पहुंच गए थे, जहां ये मामला प्रोजेक्ट नई किरण को मिला।

बूढ़ी दादी को शिकायत थी कि दादा, उनका ध्यान नहीं रखते, ना ही कुछ खर्चा देते है, केवल अपने लड़के बहू के अनुसार चलते है और उनको ही सब कुछ देते है। वहीं बूढ़े दादा को शिकायत थी कि उनकी पत्नी सबको परेशान करती है, छोटी सी बात पर भी विवाद कर देती है। सामान्य सी दिखने वाली इस शिकायत को प्रोजेक्ट नई किरण के विशेषज्ञों की टीम ने बारी बारी से गंभीरता से सुना।

उम्र के अंतिम पड़ाव पर खड़े दादा-दादी को एक दूसरे के महत्व से परिचित कराते हुए परस्पर बुढ़ापे की लाठी बनने की सलाह दी, पारिवारिक रिश्तों का विस्तार में महत्व समझाया। पुलिस उपाधीक्षक प्रशिक्षु की पहल पर दादा-दादी ने एक दूसरे को फूल भेंट कर अपने दाम्पत्य जीवन की फुलवारी को फिर से सुगन्धित कर, गिले शिकवे दूर किए। अंत में दादी ने घूंघट के अंदर से ही मुस्कराते हुए दादा के पारम्परिक अंदाज़ में पैर छू लिए। दादा दादी के इस मीठी नोक झोंक और प्यार को देखकर पुलिस लाइन का सभागार तालियों की गड़गढ़ाहट से गूंज उठा। सभी ने उनके आगे के सुखी और स्वस्थ्य जीवन की शुभकामना दी।

एक अन्य मामले में प्रोजेक्ट नई किरण टीम की गहन काउन्सलिंग के बाद पति ने घुटनो पर बैठकर नाराज़ पत्नी को मनाते हुए, अपनी सारी भूल चूक स्वीकार की और फूल देकर उसको हंसी खुशी चलने को मनाया।

परिवार को जोड़ने के इस पुनीत मिशन में नई किरण प्रोजेक्ट के सदस्य अजय बरया, डॉ0 दीपक चौबे, डॉ0 जनक किशोरी शर्मा ,एडवोकेट अरमान कुरेशी, डॉ एस पी पाठक, डॉ सुभाष जैन एवं सुधा कुशवाहा,डॉ0 संजीव शर्मा के साथ महिला थाना प्रभारी मिथिलेश कुमारी, महिला का. दिव्या, का. उमेश बंसल, का. राजेश आदि का विशेष सहयोग रहा। सभी ने पुलिस की इस शानदार पहल की खुले दिल से सराहना की।