
श्रीकृष्ण क्यों कहलाए रणछोड़, जानना है तो ललितपुर के इस मंदिर का कीजिए दर्शन
पत्रिका स्पेशल स्टोरी
सुनील जैन
ललितपुर. आध्यात्म नगरी ललितपुर अपनी खूबसूरत पर्वत श्रृंखलाओं के साथ ऐतिहासिक मंदिरों के लिए जाना है। यहां भगवान श्रीकृष्ण और माता सीता की तपस्वी स्थली प्रमुख दर्शनीय स्थल हैं। जिले में 100 से अधिक ऐसे मंदिर हैं जहां हर साल दूर-दूर से हजारों श्रद्धालु पहुंचते हैं। क्षेत्रफल मंदिर, अटा मंदिर, तुवन मंदिर, चंडी धाम मंदिर, छोटी देवी मंदिरों की मान्यता तो ऐसी है कि यहां देश-विदेश से लोग आते हैं। आइए जानते हैं जिले के प्रमुख 10 मंदिरों के बारे में जिनकी मान्यता जगजाहिर है-
1.रणछोड़ धाम
रणछोड़ धाम भगवान श्री कृष्ण से जुड़ा हुआ है। घनघोर जंगल में बेतवा नदी के किनारे बने इस मंदिर का आकार रथनुमा है। इस मंदिर से लगभग 1 किलोमीटर की दूरी पर ऋषि मुचकुंद की गुफा है। जनश्रुति है कि अपनी घनघोर तपस्या के बाद वह इस गुफा में अपना पीतांबर ओढकऱ चिर निद्रा में सो गए थे। ऋषि मुचकुंद को वरदान था कि जब भी वह नींद से जागेंगे और उनकी पहली दृष्टि जिसके ऊपर पड़ेगी वह जलकर भस्म हो जाएगा। महाभारत युद्ध के दौरान जब कालयवन राक्षस ने भगवान श्रीकृष्ण को युद्ध के लिए ललकारा तब भगवान श्रीकृष्ण रणछोड़ कर वहां से भाग निकले। उनके पीछे राक्षस कालयवन भी उनका वध करने के लिए भागा। कथा है कि भगवान श्रीकृष्ण भागते-भागते बेतवा नदी के किनारे अपना रथ लेकर रुक गए और ऋषि मुचकुंद गुफा में छुप गए। जब कालयवन राक्षस गुफा में दाखिल हुआ तब उसकी दृष्टि पितांबर ओढ़े व्यक्ति पर पड़ी। उसने पीतांबर खींच लिया। ऋषि मुचकुंद की आंख खुली और वह राक्षस जलकर राख हो गया।
2.देवगढ़ मंदिर
ललितपुर का देवगढ़ मंदिर विंध्याचल पर्वत श्रृंखला पर है। यहां जैन धर्म से जुड़े भगवान शांतिनाथ का भव्य मंदिर है। इसके अलावा जैन धर्म से जुड़े कई और मंदिर हैं जो हजारों साल पुराने हंै। यहीं विश्व प्रसिद्ध दशावतार मंदिर है। जिसमें मूलनायक की मूर्ति पूरे विश्व में सिर्फ दो ही जगह है। जिसमें से एक देवगढ़ है। जहां यह मंदिर हैं वह स्थल बेतवा नदी का भराव क्षेत्र है। इससे यह स्थल मनमोहक बन जाता है। देवगढ़ के चारों तरफ घनघोर जंगल है। यह पर्यटन की दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण हैं।
3.नीलकंठेश्वर मन्दिर
पाली में बना शिव मंदिर हिन्दू धार्मिक आस्था का प्रमुख केंद्र बिंदु है। यहां आए श्रद्धालुओं की सच्चे मन से मांगी गई मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। मंदिर के नीचे से एक प्राकृतिक जलस्रोत से पानी निकलता है। यह जल भक्तों के शारीरिक कष्ट हरकर उन्हें निरोगी बना देता है। यह तीर्थ स्थल लगभग 2000 वर्ष पुराना है। यहां स्थापित चंदेल कालीन भगवान शिव की त्रिमूर्ति प्रतिमा पूरे भारतवर्ष में और कहीं नहीं है। बताते हैं कि औरंगजेब देश में मंदिरों को तोड़ता हुआ जब नीलकंठेश्वर धाम पर आया तो उसने शिव प्रतिमा पर तलवार से प्रहार किया लेकिन तभी शिव प्रतिमा से दूध और गंगाजल की धारा बह निकली। इस चमत्कार को देखकर औरंगजेब भगवान के आगे नतमस्तक होकर लौट गया। ऐसी आस्था है कि मंदिर के नीचे बने झरने में नहाने से चर्म रोग दूर हो जाते हैं। यहीं से 5 किमी दूर ऋषि च्युवन का रमणीय आश्रम है।
4.दुधई मंदिर
पाली से10 किमी दूर जंगलों के बीच ग्राम दुधई में सूर्य मंदिर बना है। यह मंदिर उड़ीसा के कोर्णाक सूर्य मंदिर की तरह है। फर्क सिर्फ इतना है कि उसका रूप बड़ा है और इसका स्वरूप छोटा है। यहां भी सर्वप्रथम सूर्य की किरणें मंदिर के अंदर पहुंचती हैं।
5.डोंगरा कलां का बरवासन शक्ति पीठ
पाली होते हुए सडक़ मार्ग से बरवासन शक्तिपीठ तक पहुंचा जा सकता है। यहां चमत्कारिक मंदिर एक पहाड़ी के शिखर पर बना है। यह शक्तिपीठ अपने चमत्कार के लिए मशहूर है।
6.अमझराघाटी मन्दिर
बरवासन शक्तिपीठ होते हुए हाईवे सडक़ मार्ग से प्रसिद्ध चमत्कारिक हनुमान मंदिर अमझरा घाटी तक पहुंचा जा सकता है। यह मंदिर झांसी सागर नेशनल हाईवे पर ललितपुर से 45 किलोमीटर दूर स्थित है। विंध्याचल पर्वत श्रंृखला की गोद में बने इस मंदिर में हनुमान जी विराजमान हैं।
7.डोंगरा का पांडव वन
अमझरा घाटी के बाद पांडव वन पहुंचा जा सकता है। शास्त्रों के अनुसार पांडव वन की स्थापना महाभारत काल में अज्ञातवास के दौरान हुई। यहां पांडवों के चित्र तथा निशानियां हैं। जामनी नदी के किनारे बने मंदिर के दर्शन के लिए आने के लिए नवम्बर से लेकर जून तक का समय उपयुक्त होता है।
8.राख पंचमपुर
यह मंदिर अपने अद्भुत चमत्कार के लिए विश्व विख्यात है। सेरोंन के बाद सीधे इस अद्भुत चमात्कारिक मंदिर तक पहुंचा जा सकता है। श्रद्धालुओं का मानना है कि इस मंदिर के हवन कुंड की चमत्कारिक राख लगाने से शरीर का फोड़ा-फुंसी चर्म रोग ठीक हो जाता है।
9.सेरोंन जी
यह जैन तीर्थ स्थल है। जो चंदेल कालीन है। यहां भगवान शांतिनाथ की मूर्ति विराजमान है। यहीं बने संग्रहालय मेंं जैन धर्म के साथ-साथ हिंदू धर्म की कई ऐसी विलक्षण मूर्तियां है जो विश्व में कहीं और नहीं हं। इस क्षेत्र मेें मुगल शासन काल में टूटे कई मंदिरों के अवशेष खुदाई में मिलते हैं। इसके अलावा यहां से कुछ दूर पर चांदपुर जहाजपुर गांव में जैन मंदिर है। यह मंदिर चांदपुर जहाजपुर गांव के आसपास बने हुए हैं। यहां खासतौर पर जैन धर्म के लिए मशहूर मंदिर हैं। जैन धर्म के चंदेलकालीन चमात्कारिक मंदिरों की कलात्मकता अद्भुत है। यह मंदिर पुरातत्व विभाग के अधीन हैं। इसके अलावा बालाबेहट का जैन मंदिर भी दर्शनीय है। दूधी के बाद सडक़ मार्ग से वालाबेहट पहुंचा जा सकता है। यहां तिलिस्मी किला बना है। जैन मंदिर में पारसनाथ भगवान की ऐसी चमत्कारिक मूर्ति है जिसको जो श्रद्धालु सच्चे मन से निहार लेता है उसके जीवन के सारे कष्ट दूर हो जाते हैं। हजारों साल पुराने इस मंदिर को अब जैन समाज द्वारा नया रूप दिया जा रहा है।
10.तुवन मन्दिर और सदनशाह
ललितपुर शहर के मध्य स्थित यह मंदिर हिंदू-मुस्लिम कौमी एकता के लिए जाना जाता है। तुवन मंदिर और ईदगाह की दीवार एक ही है। यहां के राजा ने यह ऐतिहासिक मंदिर और ईदगाह का निर्माण एक साथ कराया था। एक ओर मंदिर में हिंदू श्रद्धालुओं द्वारा पूजा अर्चना की जाती है तो वहीं दूसरी ओर ईदगाह में उसी समय नमाज अदा की जाती है। इसके अलावा यहां सदनशाह की मजार भी है। सूफी संत बाबा सदन शाह की यादगार में इस मजार का निर्माण लगभग 1000 वर्ष पूर्व किया गया था। पूरे भारतवर्ष में यहां पर दूसरे नंबर का सबसे बड़ा उर्स मेला लगता है। सूफी संत बाबा सदन शाह की महिमा बड़ी निराली है। ऐसा कहा जाता है कि यदि प्रसव पीड़ा से ग्रसित महिला कष्टों से गुजर रही है तो उसके परिवार का कोई भी सदस्य दो अगरबत्तियां लेकर सूफी संत बाबा सदन शाह की मजार पर लगाकर मन्नत मांगता है तब सारे कष्ट दूर हो जाते हैं।
कैसे पहुंचें
दिल्ली-मुंबई रेल लाइन पर ललितपुर रेलवे स्टेशन पर उतरकर प्राइवेट वाहन से इन स्थानों पर जाया जा सकता है। देवगढ़ और सेरोन जी जैन मंदिरों पर रात्रि विश्राम और खाने पीने की व्यवस्था है। शेष मंदिरों के दर्शन कर जिला मुख्यालय पर लौट कर आना होगा जहां पर रुकने और खाने पीने के लिए अच्छे-होटल और धर्मशालाएं हैं।
Updated on:
28 Aug 2019 12:47 pm
Published on:
28 Aug 2019 12:44 pm
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