Anand Mahindra ने कहा, Lockdown में हुआ इजाफा तो बढ़ जाएगा आर्थिक हारा-किरी का जोखिम

  • Mahindra के अनुसार लॉकडाउन से बची है लाखों लोगों की जान
  • Lockdown बढऩे से गरीब लोगों के लिए खड़ी हो सकती है मुसीबतें

By: Saurabh Sharma

Updated: 12 May 2020, 12:12 PM IST

नई दिल्ली। देश के बड़े उद्योगपतियों में से एक और महिंद्रा ग्रुप के चेयरमैन आनंद महिंद्रा ( Anand Mahindra ) साफ कहा कि अगर देश में कोरोना वायरस लॉकडाउन ( Coronavirus Lockdown ) बढ़ाया गया तो इकोनॉमी के लिए आत्मघाती साबित हो सकता है। वास्तव में उन्होंने आर्थिक हारा-किरी ( Economic Hara Kiri ) शब्द का इस्तेमाल किया है। जिसका मतलब इकोनॉमी के लिए आत्मघाती होता है। उन्होंने इस बात से मना नहीं किया कि देश में लॉकडाउन की वजह से लाखों लोगों की जान बची है, लेकिन उन्होंने इस बात से भी इनकार नहीं किया कि अगर इस लॉकडाउन को आगे बढ़ाया गया तो गरीब तबके के लोगों के लिए मुसीबतें खड़ी हो सकती है। आपको बता दें कि हारा किरी मतलब जापान में युद्ध में पराजित होने वाले योद्धाओं के बंदी बनाए जाने से बचने के लिए अपने ही चाकू को अपने पेट में घोंपकर आत्महत्या करने की प्रथा से है।

इस तरह से कम नहीं होगा वायरस
आनंद महिंद्रा ने ट्वीट कर कहा कि बीते कुछ दिनों में नए मामलों की संख्या में इजाफा हुआ है, ग्राफ की तेजी में अंकुश लगा है। उन्होंने कहा दुनिया की आबादी के मुकाबले भारत की आबादी की तुलना और मामलों की जांच को देखें तो नए मामलों में वृद्घि होना कोई बड़ी बात नहीं है। देश आसानी से बढ़ते ग्राफ को आसानी से नीचे आने की उम्मीद नहीं कर सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि लॉकडाउन ने ग्राफ को तेजी के साथ और ज्यादा ना बढऩे में काफी मदद की है। उन्होंने कहा कि लॉकडाउन ने लाखों लोगों क मौत को टाला है। आंकड़ों को देखें तो भारत में 10 लाख लोगों पर मौत की दर 1.4 है, जो वैश्विक औसत 35 और 228 अमरीकी औसत से काफी कम है।

लॉकडाउन बढऩे से इकोनॉमी को होगा नुकसान
आनंद महिंद्रा ने कहा कि अगर लॉकडाउन को और लंबे समय के लिए बढ़ाया जाता है तो तो देश के लिए आर्थिक आत्मघाती यानी आर्थिक हारा-किरी जैसा कदम होगा। उनके अनुसासर कामकाज करती और वृद्धि करती इकोनॉमी आजीविका के लिए एक प्रतिरक्षा प्रणाली की तरह है। लॉकडाउन इसे नुकसान पहुंचाता और देश को प्रतिरक्षा प्रणाली को कमजोर करता है और हमारे समाज में सबसे अधिक हानि पहुंचाता है।

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Saurabh Sharma Desk/Reporting
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