प्रोमोटर्स में झगड़े के बीच इंडिगो का बयान, कहा - सभी थर्ड पार्टी सौदे साफ-सुथरे हैं

  • कंपनी ने एजीएम में कहा- सभी रिलेटेड पार्टी ट्रांजैक्सन (आरपीटीज) साफ सुथरे हैं।
  • एयरलाइन के को-प्रोमोटर राकेश गंगवाल ने पहले आईपीटीज पर सवाल उठाए थे

By: Ashutosh Verma

Updated: 28 Aug 2019, 09:21 AM IST

नई दिल्ली। अपने प्रोमोटर्स के बीच चल रहा झगड़ा खत्म होने का संकेत देते हुए इंडिगो एयरलाइन की मालिकाना वाली कंपनी इंटरग्लोब एविएशन ने मंगलवार को शेयरधारकों से सालाना आमसभा (एजीएम) में कहा कि सभी रिलेटेड पार्टी ट्रांजैक्सन (आरपीटीज) साफ सुथरे हैं और किसी प्रकार का कदाचार नहीं है।

एयरलाइन के को-प्रोमोटर राकेश गंगवाल ने पहले आईपीटीज पर सवाल उठाए थे और बाजार नियामक सेबी से कार्रवाई की मांग की थी। वे इस जरूरी बैठक में शामिल नहीं हुए। इस विवादग्रस्त मामले में गंगवाल का समर्थन करनेवाले स्वतंत्र निदेशक अनुपम खन्ना भी इस बैठक से अनुपस्थित थे।

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रोनोंजय दत्ता ने शेयरधारकों को दिया जवाब

इंटरग्लोब के शेयर बीएसई पर मंगलवार को 1.85 फीसदी की गिरावट के साथ 1,649 रुपये प्रति शेयर के भाव पर बंद हुए थे। इस मुद्दे पर शेयरधारकों के सवालों का जवाब देते हुए इंडिगो के सीईओ रोनोंजय दत्ता ने कहा कि कंपनी ने सह-प्रमोटर राहुल भाटिया की कंपनी के साथ 156 करोड़ रुपये मूल्य के आरपीटीज पर हस्ताक्षर किए हैं, जो कि कंपनी के कुल राजस्व 30,000 करोड़ रुपये के एक फीसदी से भी कम है।

दत्ता ने आमसभा में कहा, "यह कोई पहला मामला नहीं है कि आपीटी को कंपनी के प्रमोटरों से जुड़ी कंपनी के साथ किया गया है।" कुछ शेयरधारकों ने गंगवाल के द्वारा लगाए गए आरोपों के कारण कंपनी के शेयरों के मूल्य में आई गिरावट पर चिन्ता व्यक्त की। वे यह भी जानना चाहते थे कि गंगवाल आम सभा में क्यों नहीं आए।

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इस साल में जून माह में हुई थी दोनों संस्थापकों के बीच झगड़े की शुरुआत

एयरलाइन के दोनों सह-संस्थापकों के बीच झगड़े की शुरुआत इस साल जून में हुई थी, जब एक बाजार नियामक सेबी को पत्र लिख कर आरपीटीज और कॉर्पोरेट प्रशासन संबंधी मामले उठाए तथा इस पत्र की एक-एक प्रति प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण और अन्य शीर्ष सरकारी अधिकारियों को भेजी।

कंपनी में गंगवाल और उनके परिवार की 37 फीसदी हिस्सेदारी है, जबकि भाटिया और उनके परिवार की 38 फीसदी हिस्सेदारी है। देश की सबसे बड़ी निजी एयरलाइंस की बाजार हिस्सेदारी घरेलू मार्ग में करीब 50 फीसदी है तथा इसके बाद विमानों का सबसे बड़ा बेड़ा है।

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