
सेना के जवानों के लिए लाया गया Horlicks ऐसे बना हर घर की पसंद, अब इस कंपनी की सेहत में करेगा सुधार
नई दिल्ली। 145 साल पुराने ब्रांड Horlicks को हिंदुस्तान यूनिलीवर लिमिटेड (HUL) ने खरीद लिया है। लंबी बातचीत के बाद अब HUL बोर्ड ने GSK कंज्यूमर इंडिया के साथ विलय योजना को मंजूरी दे दी है। HUL 31,700 करोड़ रुपए में GSK इंडिया को खरीदेगी। यूके के प्रॉडक्ट हॉर्लिक्स की बिक्री भारत में सबसे ज्यादा होती है। हॉर्लिक्स की भारत में एंट्री होते ही देश में कंपनी की लोकप्रियता बढ़ गई थी।
भारत में कब हुई हॉर्लिक्स की एंट्री ?
पहले विश्वयुद्ध से लौटे ब्रिटिश आर्मी के भारतीय सैनिक सबसे पहले हॉर्लिक्स लाए थे। हालांकि इस बात का कोई पुख्ता सबूत नहीं है। 1940-50 में हॉर्लिक्स अपर मिडिल क्लास और अमीर लोगों का स्टेटस सिंबल बन गया था और पंजाब, बंगाल और मद्रास में इसे फैमिली ड्रिंक के रूप में अपनाया गया।
बता दें उससे पहले भारतीय लोगों को न्यूट्रीशन डायट नहीं मिल पा रही थी। 70 के दशक के पहले हमारे देश में दूध की कमी थी। श्वेत क्रांति के बाद भारत दुनिया का सबसे बड़ा दूध उत्पादक देश बना। बॉर्नवीटा और कॉम्प्लैन, देश के पश्चिमी और उत्तरी हिस्से में हॉर्लिक्स के प्रमुख प्रतिद्वंदी थे। भारत में हॉर्लिक्स का सबसे पहला फ्लेवर मॉल्ट था। उसके बाद वनीला, टॉफी, चॉकलेट, हनी और इलायची, केसर-बादाम फ्लेवर पेश किए गए।
हिंदुस्तान मिल्कफूड मैन्युफैक्चरर्स नामक कंपनी के तहत 1958 में पंजाब में भारत की पहली हॉर्लिक्स की फैक्ट्री खुली। फैक्ट्री खोलने में नाभा के महाराज महाराणा प्रताप सिंह ने कंपनी की मदद की थी। पंजाब के बाद हॉर्लिक्स की दूसरी फैक्ट्री आंध्र प्रदेश में खुली।
दुनिया में कैसे हुआ था हॉर्लिक्स का ईजाद ?
हॉर्लिक्स का ईजाद दो ब्रिटिश भाइयों द्वारा अमरीका में हुआ था। इनमें से जेम्स ड्राई बेबी फूड बनाने वाली कंपनी के लिए काम करने वाले एक केमिस्ट थे। जेम्स ने अपने बड़े भाई विलियम के साथ मिलकर 1873 में मॉल्टेड मिल्क ड्रिंक बनाने वाली कंपनी J&W हॉर्लिक्स शुरू की और अपने प्रॉडक्ट को डायस्टॉइड नाम दिया। इसके बाद 5 जून 1883 को दोनों भाइयों ने प्रॉडक्ट के लिक्विड में मिक्स हो जाने की योग्यता के लिए यूएस पेटेंट नंबर 278,967 हासिल कर लिया जिसके बाद यह पेटेंट पाने वाला पहला मॉल्टेड मिल्क प्रॉडक्ट बन गया।
लगातार बढ़ी हॉर्लिक्स की लोकप्रियता
1908 में दोनों भाइयों ने करीब 25 लाख की लागत से बनी बर्कशायर के स्लॉ में अपनी पहली यूके फैक्ट्री शुरू की, जिसके बाद धीरे धीरे ये प्रॉडक्ट पॉपुलर होना शुरू हो गया। माउंटेनियर्स इसे एक्सपेडीशंस पर साथ ले जाने लगे। इतना ही नहीं, एक माउंटेनियर रिचर्ड बायर्ड ने तो एक माउंटेन को हॉर्लिक्स माउंटेन का नाम भी दिया था। आम लोग और सैनिक इसे बहुत ही अच्छा सप्लीमेंट मानने लगे। उस वक्त इसे पानी में घोल के पिया जाता था। दूसरे विश्व युद्ध में हॉर्लिक्स टैबलेट्स को कैंडी की तरह बेचा गया और अमेरिकी, ब्रिटिश और अन्य सैनिकों ने इसे एनर्जी बूस्टर के रूप में इस्तेमाल किया।
1948 ओलंपिक में मिली अपार सफलता
1948 में लंदन में आयोजित ओलंपिक हॉर्लिक्स के लिए बेहद खास रहा। ऐसा इसलिए क्योंकि ऑर्गेनाइजिंग कमेटी ने 1948 ओलंपिक में भाग लेने वाले सभी लोगों को हॉर्लिक्स दिया। इसे बेडटाइम ड्रिंक और खेल के दौरान सर्व किया जाता था। हॉर्लिक्स अब तक कई प्रोग्राम्स और कॉम्पिटीशंस को स्पॉन्सर कर चुका है। हॉर्लिक्स की बढ़ती पॉपुलैरिटी के चलते इसे 1969 में बीशम ग्रुप ने खरीद लिया था।
Published on:
04 Dec 2018 02:30 pm
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