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कर्मचारियों को गिफ्ट में कार देने वाले हीरा कारोबारी सावजी ढोलकिया बेटे को दे चुके हैं ‘वनवास’

सूरत के हीरा कारोबारी ने एक बार फिर अपने कर्मचारियों को दिवाली बोनस के रूप में कार गिफ्ट की हैं।

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Savji Dholakiya

कर्मचारियों को गिफ्ट में कार देने वाले हीरा कारोबारी सावजी ढोलकिया बेटे को दे चुके हैं 'वनवास'

नई दिल्ली। सूरत के हीरा कारोबारी सालवजी ढोलकिया ने एक बार फिर दिवाली बोनस के रूप में अपने कर्मचारियों को कार और फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) गिफ्ट के रूप में दिए हैं। इस बार ढोलकिया ने 600 कर्मचारियों को गिफ्ट के तौर पर कारें दी हैं। इसमें से चार कारें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दी हैं। इसके अलावा 900 कर्मचारियों को गिफ्ट के रूप में एफडी दी है। इन कर्मचारियों ने कार के बदले एफजी की मांग की थी। इस कारनामे के बाद सावजी ढोलकिया एक बार फिर सुर्खियों में बने हुए हैं। ढोलकिया इससे पहले दिवाली बोनस के रूप में अपने कर्मचारियों को मकान, कार और मोटरसाइकिल दे चुके हैं। ढोलकिया ने हाल ही में कंपनी में 25 साल पूरे करने वाले तीन कर्मचारियों को एक करोड़ की कीमत वाली मर्सिडीज कार उपहार में दी थी। लेकिन शायद आप यह नहीं जानते होंगे कि अपने कर्मचारियों को दिवाली बोनस के रूप में अपने इकलौते बेटे को एक माह के 'वनवास' दे चुके हैं। आइए आपके बताते हैं कि ढोलकिया ने एेसा क्यों किया...

इसलिए दिया 'वनवास'

6 हजार करोड़ के सालाना टर्नओवर की कंपनी के मालिक सावजी ढोलकिया ने शून्य से शिखर का मुकाम पाया है। वह अपने बेटे द्रव्य को भी पैसे की चकाचौंध से दूर रखकर जीवन के मूल्यों का खान देना चाहते थे। इसके लिए उन्होंने अपने बेटे को एक खास प्रकार की ट्रेनिंग दी। इस ट्रेनिंग के तहत जब द्रव्य अमरीका से एमबीए की पढ़ाई करके सूरत लौटे तो उन्हें पारिवारिक कारोबार में शामिल करने के बजाए एक फ्रेशर की तरह नौकरी करने की सलाह दी। दरअसल ढोलकिया परिवार की परंपरा के अनुसार, प्रत्येक बच्चे को पारिवारिक कारोबार में शामिल करने से पहले उसे जीवन और नौकरी से जुड़ी समस्याओं के समझने और उनसे जूझने के लिए बाहर भेजा जाता है। इसमें बाहरी लोगों के सामने आम आदमी और परिवार की पहचान छुपाकर रहने की शर्त भी शामिल है।

चॉल में बिताए तीन हफ्ते

सावजी ढोलकिया ने अपनी पारिवारिक परंपरा अपने बेटे के साथ भी निभाई। सावजी ने अपने बेटे को सस्ती जगह पर रहने खाने की शर्त के साथ एक महीने में तीन नौकरी तलाश करने के लिए परिवार से दूर भेजा गया। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, द्रव्य नौकरी की तलाश में कोच्चि पहुंचे। यहां द्रव्य को पहली नौकरी एक बीपीओ कंपनी में मिली। लेकिन परिवार की शर्त के अनुसार उन्होंने एक हफ्ते बाद ही बिना सैलरी लिए यह नौकरी छोड़ दी। दूसरी नौकरी तलाशने में द्रव्य को काफी समय लगा। इस दौरान वे भूखे तक रहे। द्रव्य को दूसरी नौकरी एक बेकरी और तीसरी नौकरी एक रेस्टोरेंट में मिली। इन सभी नौकरियों को छोड़कर चौथी नौकरी उन्हें मैकडोनाल्ड में मिली। हालांकि, द्रव्य ने यह नौकरी ज्वाइन नहीं की। इस दौरान द्रव्य करीब तीम हफ्ते तक कोच्चि में रहे और एक चॉल में जीवन गुजारा। इस चॉल में रहने के लिए द्रव्य ने एक महीने के लिए 250 रुपए का किराया दिया।