
नई दिल्ली। देश के बड़े उद्योग घरानों की बात बिना टाटा ग्रुप के पूरी नहीं हो सकती है। लेकिन अब आपको जानकर हैरानी होगी कि 149 साल के इतिहास में पहली बार टाटा ग्रुप अपनी कंपनी को बेचने का मन बना रहा है। टाटा ग्रुप की टेलिकॉम सेक्टर के लिए बिजनेस करने वाली कंपनी टाटा टेलिसर्विसेज लंबे समय से घाटे में चल रही है। जिस कारण कई बार कंपनी टीसीएस को बेचने की योजन बना चुका है लेकिन सफल नहीं हो सका। ताजा मामले में अब टाटा ग्रुप के चेयरमैन एन.चंद्रशेखरन इस कारोबार को समेटने का विचार कर रहे हैं। हालांकि इस कंपनी के बंद होने से टाटा समूह की बैलेंस शीट पर भी गहरा असर पड़ेगा। इस कंपनी पर करीब 34,000 करोड़ रुपये का कर्ज है। इसी कर्ज को चुकाने के लिए कंपनी पर देनदारों का दवाब भी है। पहली बार ऐसा हुआ है कि टाटा समूह की कोई कंपनी मुश्किल में आ गई है।
कुल 4.5 करोड़ ग्राहक
टाटा टेलिसर्विसेज के कुल 4.5 करोड़ सबस्क्राइबर्स हैं। भारत के मोबाइल टेलिफोनी मार्केट में कंपनी की हिस्सेदारी 4 फीसदी की है। हालांकि कंपनी यदि अपने टेलिकॉम स्पेक्ट्रम को बेचती है तो उसे अपने कर्ज को घटाने में कुछ मदद मिलेगी। टाटा संस के प्रवक्ता ने बताया 'टाटा टेलिसर्विसेज की जहां तक बात है तो समूह सभी विकल्पों पर विचार कर रहा है। इससे पहले हाल में ही कंपनी की भारती एयरटेल और रिलायंस जियो से बातचीत चल रही थी, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकल सका। कंपनी के जापानी साझेदार डोकोमो की ओर से हाथ खींचे जाने के बाद से ही विकल्पों पर विचार चल रहा है। डोकोमो की टाटा टेलिसर्विसेज में 26 फीसदी की हिस्सेदारी थी।
ऐसे खड़ा हुआ 8.45 लाख करोड़ का टाटा बिजनेस एंपायर
भारत में नमक से लेकर ट्रक बनाने तक के बिजनेस से जुड़ा टाटा ग्रुप आज एक बड़ा एंपायर बन चुका है। 1868 में एक ट्रेडिंग फर्म से शुरू हुए टाटा ग्रुप में अब 93 कंपनियां हैं. वहीं, शेयर बाजार में लिस्टेड टाटा ग्रुप की 29 कंपनियों के पास बीएसई में 7 फीसदी हिस्सेदारी है. इसके अलावा, दुनियाभर में इसके 6,95,699 कर्मचारी है।
Published on:
15 Sept 2017 04:09 pm
बड़ी खबरें
View Allकॉर्पोरेट वर्ल्ड
कारोबार
ट्रेंडिंग
