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63 साल पुराने इस सी-प्लेन पर टिकी हैं “ई-फ्लाइट” की उम्मीदें

-इलेक्ट्रिक विमान विकसित करने की दौड़ में बोइंग, नासा और उबेर के साथ एक छोटी कनाडाई एयरलाइन भी शामिल हो गई है जिसने हाल ही एक पुराने सीप्लेन में इलेक्ट्रिक मोटर लगाई है।

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जयपुर

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Mohmad Imran

Jan 20, 2020

63 साल पुराने इस सी-प्लेन पर टिकी हैं

63 साल पुराने इस सी-प्लेन पर टिकी हैं

इलेक्ट्रिक कारों के बाद इलेक्ट्रिक विमान के लिए भी airospace companies में प्रतिस्पर्धा शुरू हो गई है। इलेक्ट्रिक विमान विकसित करने की इस दौड़ में बोइंग (Boeing) , नासा (NASA) और उबेर(UBER) के साथ एक छोटी कनाडाई एयरलाइन भी शामिल हो गई है जिसने हाल ही 63 साल पुराने एक सीप्लेन में इलेक्ट्रिक मोटर लगाई है। कंपनी ने अपने हार्बर एयर के संशोधित डी हैविलैंड बीवर विमान ने वैंकूवर के पास पानी के ऊपर से अपनी पहली उड़ान भरी। विमान कुछ मिनटों तक हवा में रहने के बाद जमीन पर उतर आया। कंपनी का दावा है कि उसने दुनिया की पहली वाणिज्यिक इलेक्ट्रिक उड़ान भरने की उपलब्धि हासिल कर ली है।

हार्बर एयर के मुख्य कार्यकारी अधिकारी और विमान की पहली उड़ान के पायलट ग्रेग मैकडॉगल ने कहा कि यह एयरलाइंस व्यवसाय के लिए एक सस्ता, प्रदूषण रहित और शांत विमान की ओर हमारा पहला बड़ा कदम है। ग्रेग के अनुसार हाल के सालों में इलेक्ट्रिक प्लेन के प्रति विमानन कंपनियों की रुचि बढ़ी है। इसमें स्थापित कंपनियों के अलाव स्टार्टअप समूह भी शामिल हैं। इलेक्ट्रिक मोटर से उड़ान भरने की यह प्रौद्योगिकी (TECHNIQUE) पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए बिना हवाई टैक्सी और उडऩे वाली कारों जैसे नए प्रकार के विमानन व्यवसायों के लिए अवसर के दरवाजा खोल सकती है। दरअसल, प्रौद्योगिकी में इतनी प्रगति के बाद, अब भी इलेट्रिक विमान की राह में चुनौतियां कम नहीं हैं। आज की बैटरियां उतनी ऊर्जा (ईंधन से उत्पन्न थस्र्ट) पैदा नहीं कर सकती हैं जितना कि तेल से चलने वाले इंजन।

यूं भरी पहली उड़ान
बीते साल फरवरी में मोटर कंपनी मैग्नी एक्स ने ग्रेग को इस प्रोजेक्ट में शामिल किया। मोटर की क्षमता को बढ़ाने और तकनीक को उन्नत करने के बाद गत 10 दिसंबर को बीवर नाम के इस सी-प्लेन ने उड़ान भरी। बिना शोर के उडऩे के कारण भी इसने विमान नीतियां बनाने वाले अधिकारियों का ध्यान खींचा। नवंबर में सीनेटर बैन कार्डिन ने अपने साथियों के साथ नासा को इस प्रोजेक्ट को 120 करोड़ रुपए का फंड देने का अनुरोध किया। इस तरह यह विमान अब 2040 में बोइंग के 737 विमानों के बराबर आ गया है।
गौरतलब है कि नासा की टीम ने पहले से ही एक बैटरी सेटअप विकसित कर लिया है जो विमान की 5000 डबल-ए-आकार के सेल्स में आग लगने से बचाती है।

क्लार्क की टीम ने इस सी-प्लेन में धीरे-धीरे और अधिक इलेक्ट्रिक तकनीक को शामिल करने की योजना बनाई है, जो अगले साल के अंत तक उड़ान भरेगी। इस अंतिम प्रोटोटाइप डिजाइन में सभी 14 मोटरें होंगी जो विमान की दक्षता में सुधार करेंगी। यह एक ऐसी तकनीक है जो अगले 20 या 30 वर्षों में लोगों के जीवन को बदल सकती है।