
CNAP vs Truecaller (Image: Gemini)
CNAP vs Truecaller: जब भी फोन की घंटी बजती है और स्क्रीन पर कोई अनजान नंबर दिखता है, तो हमारा हाथ सीधा Truecaller की तरफ जाता है। हमारी आदत पड़ चुकी है यह चेक करने की कि फोन किसने किया है। लेकिन, क्या आपने कभी गौर किया है कि कई बार वहां नाम कुछ अजीब सा आता है। जैसे अनुराग मैकेनिक, लोन वाला, रवि मटन शॉप या मेघा पिज्जा?
ऐसा इसलिए होता है क्योंकि हम अब तक सुनी-सुनाई जानकारी पर भरोसा कर रहे थे। लेकिन अब भारत सरकार इस खेल को बदलने जा रही है। सरकार एक ऐसी तकनीक ला रही है जो कच्ची जानकारी नहीं, बल्कि सरकारी दस्तावेजों वाली पक्की पहचान आपकी स्क्रीन पर दिखाएगी।
आइए आसान भाषा में समझते हैं कि यह नया सिस्टम क्या है और क्या इसके आने के बाद आपको अपने फोन से Truecaller हटा देना चाहिए?
सरकार और टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (TRAI) मिलकर CNAP (Calling Name Presentation) नाम का फीचर ला रहे हैं। इसे आप सरकारी कॉलर आईडी कह सकते हैं। अभी तक कॉलर आईडी सिर्फ नंबर दिखाती थी, लेकिन CNAP आने के बाद जब भी आपके फोन की घंटी बजेगी, नेटवर्क तुरंत चेक करेगा कि वह सिम किसके नाम पर रजिस्टर्ड है। जो नाम सिम लेते समय आधार कार्ड या KYC दस्तावेजों में दिया गया था, वही नाम आपकी स्क्रीन पर दिखेगा। यानी अब कोई ठग बैंक मैनेजर बनकर कॉल करेगा, तो स्क्रीन पर उसका असली नाम दिख जाएगा।
अच्छी बात यह है कि इस सर्विस के लिए आपको अपने फोन में कोई अलग से ऐप डाउनलोड नहीं करना पड़ेगा और न ही इंटरनेट की जरूरत होगी। यह काम सीधा नेटवर्क (4G/5G) के जरिए होगा। फिलहाल यह ट्रायल फेज में है और उम्मीद है कि मार्च 2026 तक यह पूरी तरह से हर मोबाइल पर काम करने लगेगा।
यहीं पर असली पेंच है। देखिये, Truecaller एक जुगाड़ पर चलता है जिसे तकनीकी भाषा में क्राउडसोर्सिंग कहते हैं। यह ऐप लोगों की फोनबुक से डेटा उठाता है। अगर दस लोगों ने मेरा नंबर आयुष इलेक्ट्रीशियन के नाम से सेव किया है, तो Truecaller मुझे इलेक्ट्रीशियन ही बताएगा, भले ही मैं कोई और हूं।
दूसरी तरफ, CNAP सीधे टेलीकॉम कंपनी के डेटाबेस से जुड़ा है। यह वही नाम दिखाएगा जो सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज है। यानी राहुल यादव है तो राहुल यादव ही दिखेगा। यह 100% असली पहचान होगी।
अब सबसे बड़े सवाल पर आते हैं। क्या सरकारी सिस्टम आने के बाद Truecaller की जरूरत खत्म हो जाएगी? जवाब है - पूरी तरह नहीं।
अगर आपको सिर्फ सच जानना है: तो CNAP बेस्ट है। यह आपकी प्राइवेसी के लिए भी अच्छा है क्योंकि यह आपके कॉन्टैक्ट्स को अपने सर्वर पर अपलोड नहीं करता।
अगर आपको स्पैम से बचना है: तो अभी Truecaller आगे है। सरकारी सिस्टम आपको असली नाम तो बता देगा, लेकिन फिलहाल उसमें यह बताने की क्षमता नहीं है कि सामने वाला व्यक्ति स्कैमर है, मार्केटिंग वाला है या कोई फ्रॉड। Truecaller का वो लाल रंग का अलर्ट जो हमें ठगों से बचाता है, वो फीचर फिलहाल सरकारी सिस्टम में नदारद है।
कुल मिलाकर, बात यह है कि सरकारी कॉलर आईडी (CNAP) पारदर्शिता और सुरक्षा की दिशा में एक बहुत बड़ा कदम है। इससे फेक कॉल करने वालों के पसीने छूटेंगे। लेकिन जब तक इस सिस्टम में स्पैम कॉल्स को पहचानने और ब्लॉक करने की सुविधा नहीं जुड़ जाती, तब तक शायद आपको अपने फोन में Truecaller जैसी ऐप्स को थोड़ी जगह देनी पड़े।
सरकार ने यह भी ध्यान रखा है कि अगर कोई अपनी पहचान गुप्त रखना चाहता है, तो उसके लिए नियम (CLIR) के तहत नाम न दिखाने का विकल्प भी मौजूद रहेगा।
Published on:
03 Jan 2026 03:20 pm
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