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फिर छात्रों की फीस डकारने की तैयारी

locationनागौरPublished: Jan 16, 2015 12:04:50 pm

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नागौर। राजस्थान सरकार इस बार भी कॉलेज विद्यार्थियों से वसूली गई कम्प्यूटर फीस को डका...

नागौर। राजस्थान सरकार इस बार भी कॉलेज विद्यार्थियों से वसूली गई कम्प्यूटर फीस को डकारने की फिराक में है। जिला मुख्यालय पर बीआर मिर्घा कॉलेज में पिछले पांच सालों से यही खेल चल रहा था, लेकिन इस बार 31 अक्टूबर को कॉलेज शिक्षा आयुक्तालय, जयपुर ने प्राचार्य को पत्र लिखकर एक नवम्बर से स्थानीय स्तर पर कम्प्यूटर अनुदेशक लगाने के आदेश दिए थे।

प्राचार्य ने अभी अनुदेशक की नियुक्ति भी नहीं की थी कि 21 नवम्बर को कॉलेज शिक्षा आयुक्तालय के संयुक्त निदेशक डॉ. अनूप श्रीवास्व ने दुबारा पत्र भेजकर अनुदेशक लगाने की प्रक्रिया तुरंत प्रभाव से निरस्त करने के आदेश जारी कर दिए।

अब तक लाखों डकारे
ऎसा नहीं है कि कम्प्यूटर अनुदेशक की नियुक्ति केवल मिर्घा कॉलेज में ही नहीं है, बल्कि प्रदेश के सैकड़ों कॉलेजों में यही खेल चल रहा है। पिछले पांच साल से कॉलेज में प्रवेश के समय विद्यार्थियों से 450 रूपए कम्प्यूटर फीस के नाम पर वसूले जा रहे हैं।

कॉलेज में पहला कदम होने के कारण छात्र भी इसका विरोध नहीं कर पाते हैं। इसी का फायदा उठाकर कॉलेज शिक्षा आयुक्तालय एवं स्थानीय प्रशासन उनसे वसूली कर रहे हैं।

एलीमेंट्री कम्प्यूटर शिक्षा अनिवार्य
गौरतलब है कि कॉलेज स्तर पर कम्प्यूटर शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए वर्ष 2009 में राजस्थान सरकार ने एलीमेंट्री कम्प्यूटर शिक्षा को अनिवार्य किया था, इसके तहत प्रथम वर्ष के विद्यार्थियों से 450 रूपए फीस के रूप में लिए जाने लगे।

सरकार ने कॉलेजों में कम्प्यूटर शिक्षण के लिए निजी कम्पनी को ठेका दिया। यहीं से भ्रष्टाचार की शुरूआत हुई और कम्पनी ने मिर्घा कॉलेज में कम्प्यूटर लैब तो स्थापित कर दी, लेकिन विद्यार्थियों को पढ़ाने के लिए अनुदेशक की नियुक्ति नहीं की।

बिना अनुदेशक के कम्प्यूटर लैब का ताला भी नहीं खुला, लेकिन उच्चाधिकारियों की मिलीभगत से अंदर ही अंदर कम्पनी को भुगतान होता रहा। इस बात का खुलासा खुद मिर्घा कॉलेज के पूर्व प्राचार्य ने किया था।

पत्रिका ने उजागर किया घपला
वर्ष 2012 में पूरे मामले को उजागर करते हुए राजस्थान पत्रिका ने 6 दिसम्बर 2012 को "कम्प्यूटर शिक्षा में करोड़ों का घालमेल" शीर्षक से समाचार प्रकाशित कर कॉलेज प्रबंधन का ध्यान आकर्षित किया।

इसके बाद विद्यार्थियों ने भी कम्प्यूटर शिक्षण के अभाव में फीस वापस लौटाने की मांग कर दी। मामला बढ़ता देखकर कॉलेज शिक्षा आयुक्तालय ने फीस लौटाने का आश्वासन तो दे दिया, लेकिन कार्रवाई नहीं की।

इसके बाद पत्रिका ने 4 मार्च 2014 को दुबारा इस मामले को उठाते हुए "शिक्षा के नाम पर डकारे लाखों रूपए" शीर्षक से समाचार प्रकाशित किया।

बार-बाार मामला उठाने तथा विद्यार्थियों की मांग पर आयुक्तालय ने गत 31 अक्टूबर को स्थानीय स्तर पर कम्प्यूटर अनुदेशक लगाने की स्वीकृति दे दी, लेकिन मात्र 20 दिन बाद ही अपने ही आदेशों को निरस्त करते हुए कम्प्यूटर अनुदेशक लगाने की कार्रवाई को पूरी तरह निरस्त करने के आदेश दे दिए।

करेंगे आंदोलन
कॉलेज शिक्षा आयुक्तालय छात्रों के साथ अन्याय कर रहा है। पिछले पांच वर्षो से कम्प्यूटर फीस वसूली जा रही है, लेकिन आज तक कम्प्यूटर लैब का ताला भी नहीं खुला। स्थानीय स्तर पर अनुदेशक लगाने के आदेश निरस्त करना दुर्भाग्यपूर्ण है, हम इसके खिलाफ आंदोलन करेंगे।
- महेन्द्र भाकल, छात्रसंघ अध्यक्ष, मिर्घा कॉलेज, नागौर

आयुक्तालय के आदेश हैं
कॉलेज में कम्प्यूटर अनुदेशक लगाने के लिए हमने आवेदन मांगे थे, लेकिन 21 नवम्बर को आयुक्तालय के आदेश आ गए कि इस प्रक्रिया को निरस्त कर दें।
- एसआर रिणवां, कार्यवाहक प्राचार्य, मिर्घा कॉलेज, नागौर
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