
Grok AI Ban in Indonesia (Image: Gemini)
Grok AI Ban in Indonesia: एलन मस्क अक्सर अपनी नई टेक्नोलॉजी और बेबाक बयानों के लिए सुर्खियों में रहते हैं, लेकिन इस बार मामला उल्टा पड़ गया है। टेक्नोलॉजी की दुनिया में फ्रीडम की वकालत करने वाले मस्क के AI चैटबॉट Grok पर इंडोनेशिया ने ताला लगा दिया है।
यह खबर इसलिए भी बड़ी है क्योंकि इंडोनेशिया दुनिया का पहला ऐसा देश बन गया है, जिसने मस्क के AI को ब्लॉक करने की हिम्मत दिखाई है। वजह कोई तकनीकी खामी नहीं, बल्कि इंसानियत और सुरक्षा है।
बात सिर्फ एक ऐप पर बैन लगाने की नहीं है, बल्कि उसके गलत इस्तेमाल की है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, Grok AI का इस्तेमाल करके बड़ी संख्या में लोग महिलाओं और यहां तक कि बच्चों की आपत्तिजनक और अश्लील तस्वीरें (Deepfakes) बना रहे थे, वो भी बिना उनकी मर्जी के।
इंडोनेशिया सरकार ने इसे लेकर बेहद सख्त रुख अपनाया है। वहां की कम्युनिकेशन मिनिस्टर, मेउत्या हाफिद ने इसे सीधे तौर पर मानवाधिकारों का उल्लंघन बताया है। उन्होंने एक बहुत सही शब्द डिजिटल हिंसा' (Digital Violence) का इस्तेमाल किया है। सरकार का कहना है कि अगर कोई टूल समाज में गंदगी फैला रहा है और महिलाओं की गरिमा को चोट पहुंचा रहा है, तो उसे चलने की इजाजत नहीं दी जा सकती।
इस पूरे विवाद में एलन मस्क और उनकी कंपनी xAI का रवैया भी देखने लायक है। जब विवाद शुरू हुआ, तो कंपनी ने चेतावनी दी थी कि गलत काम करने वालों पर कानूनी कार्रवाई होगी। लेकिन आलोचना बढ़ने पर मस्क का एक अलग ही रूप सामने आया।
हाल ही में उन्होंने एक पोस्ट को री-पोस्ट करते हुए इशारा किया कि "डीपफेक इमेज बनाने की जिम्मेदारी प्लेटफॉर्म की नहीं, बल्कि यूजर्स की है।" आसान भाषा में कहें तो उनका तर्क यह था कि अगर कोई गाड़ी से एक्सीडेंट करता है, तो गलती गाड़ी बनाने वाली कंपनी की नहीं, ड्राइवर की है। लेकिन सरकारें अब इस तर्क को मानने के मूड में नहीं हैं। इंडोनेशिया ने X (ट्विटर) के अधिकारियों को तलब किया है और साफ कहा है पहले सिस्टम सुधारो, फिर बैन हटेगा।
मामला सिर्फ इंडोनेशिया तक नहीं रुका है। अमेरिका में भी इसका विरोध शुरू हो गया है। वहां के तीन सीनेटरों ने तो सीधे गूगल और एपल को चिट्ठी लिख दी है। उनकी मांग है कि जब तक Grok सुधर नहीं जाता, इसे ऐप स्टोर से हटा दिया जाए। उनका आरोप है कि यह ऐप अपने ही बनाए नियमों की धज्जियां उड़ा रहा है।
इंडोनेशिया की इस कार्रवाई ने एक बड़ी बहस छेड़ दी है। भारत में भी पिछले कुछ समय में डीपफेक के कई मामले सामने आए हैं, चाहे वह रश्मिका मंदाना का केस हो या आम लड़कियों का। हम अक्सर टेक्नोलॉजी के नाम पर नरमी बरतते हैं, लेकिन इंडोनेशिया ने दिखा दिया है कि जब बात नागरिकों की सुरक्षा की हो, तो कड़े फैसले लेने से हिचकना नहीं चाहिए।
अब सवाल यह है कि क्या बाकी देश और भारत भी इससे सीख लेंगे? क्या सोशल मीडिया और AI कंपनियों की मनमानी पर लगाम लगाने के लिए अब और सख्त कानूनों की जरूरत है? इंडोनेशिया ने तो शुरुआत कर दी है, अब बारी बाकी दुनिया की है।
Published on:
11 Jan 2026 03:25 pm
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