
साइबर सिक्योरिटी: ऐसी 'फिंगरप्रिंट' तकनीक जो हैकर्स को रोकेगी
आज हैकर्स से अपना डेटा सुरक्षित रखना एक बड़ी चुनौती बन गया है। बीते कुछ सालों में हैकर्स ने कई अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और निजी डिजिटल लॉकर्स में सेंधमारी कर लाखों लोगों की महत्वपूर्ण जानकारी इंटरनेट और डार्क वेब पर सार्वजनिक कर दी। ब्लैकमेलिंग और जालसाजी की घटनाएं तो अब आम हो गई हैं। 2016 के अमरीकी राष्ट्रपति चुनावों पर भी इसका असर देखने को मिला था। लेकिन अब आइटी एक्सपट्र्स ने ऐसी तकनीक विकसित की है कि वे हैकर्स के फिंगरप्रिंट्स के जरिए उन्हें ट्रैक करने में सक्षम होंगे।
सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि विंडोज हैक करने वाले हैकर्स ने अपनी इस उन्नत तकनीक को पूरी दुनिया के लिए सिरदर्द बन चुकी रूसी हैकिंग गैंग एपीटी और ऐसी ही दूसरे हैकर समूहों को बेच दी है। साइबर सिक्योरिटी फर्म चेक प्वॉइंट्स के ब्लॉग में भी इस बात का जिक्र है जिसमें कहा गया है कि विंडोज को करप्ट कर उन्हें हैक करने की यह तकनीक एक कस्टमर रेस्पॉन्स साइबर अटैक के दौरान हुई जब हैकर्स ने उस व्यक्ति के निजी कम्प्यूटर में ६४-बिट का वायरस इंस्टॉल कर दिया और उसकी सारी जानकारी हैक कर ली। जब चेक प्वॉइंट्स की टीम ने इस बग का विश्लेषण किया तो पाया कि यह वायरस सिस्टम की किसी भी कमजोर कड़ी का फायदा उठाकर जानकारी चुराने के लिए बनाया गया था। इस बग का पीडीबी पाथ कोड एक वास्तविक एक्सप्लॉइट टूल था जिसे पेशेवर हैकर और साइबर अपराधी इस्तेमाल करते हैं।
नई फिंगरप्रिंट तकनीक की विकसित
इस घटना से सबक लेते हुए साइबर सुरक्षा शोधकर्ताओं ने हैकर्स की पहचान के लिए ऐसी फिंगरप्रिंट तकनीक विकसित की है जो विशेष रूप से ऐसे लोगों की पहचान करती है जो अनाधिकृत तरीके से कम्प्यूटर तकनीक, इंटरनेट और विशिष्ट हैकिंग स्ट्रेटजी इस्तेमाल करते हैं। इन्हें हैकर्स और साइबर सुरक्षा की दुनिया में 'स्पेसिफिक एक्सप्लॉइट डवलपर्स' कहा जाता है। चेक प्वाइंट ने ऐसे ही एक और ३२-बिट बग से एक दूसरे व्यक्ति के सिस्टम को हैक होने से भी बचाया, इसमें भी पहले वाले हैकर का हाथ था। सुरक्षा शोधकर्ताओं ने साइबर अपराधियों के हाइटेक तकनीकों का भी विश्लेषण किया। उन्होंने इंटर्नल फाइल का नाम, बाइनरी कोड, पीबीडी पथ और हार्डकोड कोड वैल्यू जैसे क्रिप्टो कॉन्सटैंट्स का भी अध्ययन किया। इतना ही नहीं चेक प्वॉइंट्स की टीम ने इस बग की गार्बेज वैल्यू, स्ट्रिंग यूसेज, डेटा टेबल, सिस्कॉल रैपर्स और कोड स्निपेट्स का भी अध्ययन किया।
सुरक्षा शोधकर्ताओं की टीम ने हैकर की उन पसंदीदा तकनीकों का भी खुलासा किया जिससे वे आसानी से अकाउंट, विंडो और डेटा हैक कर लेते थे। उन्होंने हैकिंग और विंडो एक्सप्लॉइट की सामान्य प्रक्रिया की भी जांच की। जब हैकर्स ने दोबारा इन सिस्टम्स पर साइबर हमला किया तो एक्सपट्र्स के बनाए नए चेक प्वाइंट हंटिंग पर आधारित थे। इस बार सुरक्षा विशेषज्ञों ने इन नए नमूनों का अवलोकन कर हैकर्स की तमाम जानकारी हासिल कर ली जिस्से उन्हें रोकने में वे कामयाब हो गए।
Published on:
03 Oct 2020 07:23 pm
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