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89 साल की हो चुकी इस महिला गणितज्ञ की देन है जीपीएस प्रणाली

89 साल की हो चुकी इस महिला गणितज्ञ की देन है जीपीएस प्रणाली -रात के अंधेरे में हम जो खगोलीय पैटर्न देखते हैं, उसने हमें कैलेंडर बनाने और आने वाले सालों को नेविगेट करने में मदद की है। लेकिन मानव निर्मित कृत्रिम रोशनी और पर्यावरण में मौजूद धूल-कणों से बनने वाली नई कलाकृतियां आकाश के बारे में हमारा दृष्टिकोण बदल सकती हैं?

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जयपुर

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Mohmad Imran

Sep 23, 2019

89 साल की हो चुकी इस महिला गणितज्ञ की  देन है जीपीएस प्रणाली

89 साल की हो चुकी इस महिला गणितज्ञ की देन है जीपीएस प्रणाली

ग्लेडिस वेस्ट आज 89 साल हो चुकी हैं लेकिन हमारी मॉडर्न तकनीक आज इतनी उन्नत न होती अगर इन्होंने जीपीएस प्रणाली न बनाई होती। सैटेलाइट, वाहन, मोबाइल से लेकर सुरक्षा की उच्च तकनीकें आज ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम यानि जीपीएस पर ही आधारित हैं। उन्होंने ऐसे समय में साइंस और तकनीक के क्षेत्र में महिलाओं का प्रतिनिधित्व किया जब अमरीका में रंगभेद चरम पर था और महिलाओं को ज्यादा अवसर नहीं थे। उन्होंने अपनी मेहनत के बूते उपग्रह की परिस्थितियों का लेखा-जोखा तैयार किया और उसके आधार पर जटिल गणितीय गणनाएं कीं जिससे भौगोलिक स्थिति को पहचानने की सटीक प्रणाली का जन्म हुआ। आज अगर हम गूगल मैप या किसी भी ऐप से दिशा ढूंढने की सहूलियत के लिए हमें वेस्ट का आभारी होना चाहिए। वे अब एक सेवानिवृत्त गणितज्ञ के रूप में अमरीका के वर्जीनिया में रहती हैं। उनके पूर्व नियोक्ता यूएस नेवी ने उन्हें जीपीएस तकनीक विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने का श्रेय देते हैं। 1956 से 1999 में अपने रिटायरमेंट तक वे एक नौसेना बेस में इंजीनियरों की टीम के साथ काम करती रहीं।
उनकी तकनीक ने हम सभी का जीवन बदल दिया। वेस्ट ने छात्रवृत्ति पर वर्जीनिया स्टेट यूनिवर्सिटी में प्रवेश लिया था और मास्टर डिग्री हासिल करने से पहले दो साल तक एक गणित शिक्षक के रूप में काम किया। जब वह 1956 में नौसैनिक अड्डे पर नियुक्त हुईं तो वहां केवल चार अफ्रीकी मूलज के अमरीकी कर्मचारी तैनात थे।


अपने शुरुआती उपग्रह-डेटा प्रोजेक्ट को याद करते हुए वेस्ट बताती हैं कि उन्होंने 1950 और 1960 में इंजीनियरों और वैज्ञानिकों के साथ काम किया। देश की नौसेना और सुरक्षा तकनीकों को और अधिक पुख्ता करने के मकसद से उन्होंने भविष्य को ध्यान में रखते हुए नवीन तकनीकों पर काम करना शुरू किया। उन्होंने उपग्रह जियोडेसी (वह विज्ञान जो पृथ्वी के आकार और स्वरूप को मापता है) पर काम किया और जीपीएस की सटीकता और उपग्रह डेटा की माप में योगदान दिया। साल 2000 में उन्हें वर्जीनिया पॉलिटेक्निक संस्थान से सार्वजनिक प्रशासन में डॉक्टरेट की उपाधि दी गई। उन्होंने जिस तकनीक को बनाने में मदद की आज पूरी दुनिया में उसका उपयोग किया जाता है। जीपीएस तकनीक ने दुनिया की सोच और क्षमताओं को बदल दिया है, विशेष रूप से सफर को। हालांकि वे अब भी अपनी कारों में जीपीएस का इस्तेमाल नहीं करती हैं।