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भारतीय ने बनाया घड़ी जैसा उपकरण, जो शरीर के आर-पार डाटा ट्रांसमीट कर सकता है

प्रोटोटाइप डिवाइस कलाई पर पहना जाता है और यह बहुत हल्की आवृत्ति वाले विद्युत चुम्बकीय संकेतों का उपयोग करके मानव शरीर के माध्यम से डेटा भेजता है

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जयपुर

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Mohmad Imran

Dec 06, 2020

भारतीय ने बनाया घड़ी जैसा उपकरण, जो शरीर के आर-पार डाटा ट्रांसमीट कर सकता है

भारतीय ने बनाया घड़ी जैसा उपकरण, जो शरीर के आर-पार डाटा ट्रांसमीट कर सकता है

फिंगरप्रिंट की मदद से हम अपने स्मार्टफोन और कम्प्यूटर को अनलॉक करने के आदि हो गए हैं। लेकिन क्या आपको पता है कि वैज्ञानिक ऐसी टच टेक्नोलॉॅजी पर काम कर रहे हैं जो इससे कहीं बढ़कर हमारे लिए कमाल के काम कर सकेंगी। ऐसी ही एक तकनीक पड्र्यू विश्वविद्यालय की टीम ने विकसित की है। भारतीय मूल के प्रोफेसर श्रेयस सेन और उनकी टीम ने एक नया प्रोटोटाइप डिवाइस बनाया है जिसका उपयोग ऑनलाइन पेंमेंट करने, पासवर्ड दर्ज करने और सिर्फ हल्के से टच मात्र से ही फोटो भेजने के लिए इसका उपयेग किया जा सकेगा। पड्र्यू टीम द्वारा विकसित यह तकनीक वर्तमान में मौजूद अन्य डेटा ट्रांसमिशन तकनीकों के समान ही है, जो ब्लूटूथ की तुलना में बेहतर डेटा सुरक्षा प्रदान करने के लिए डिजाइन किया गया है। घड़ी जैसे दिखने वाले एक उपकरण की मदद से श्रेयस की बनाई टच टेक्नोलॉजी ब्लूटूथ की बजाय बेहद धीमी आवृत्ति वाली विद्याुत चुंबकीय संकेतों (electromagnetic field) का उपयोग कर के मानव शरीर के माध्यम से डेटा संचारित करती है। इससे हैकर्स के लिए ब्लूटूथ सिग्नल को रोकना कठिन बना देती हैं।

घड़ी की तरह पहन सकते हैं
श्रेयस के अनुसार उनकी बनाई इस प्रोटोटाइप प्रणाली को एक घड़ी की ही तरह कलाई पर पहन सकते हैं। यह डिवाइस डेटा को कम आवृत्ति के लो-पावर इलेक्ट्रोमैग्रेटिक फील्ड का उपयोग करके मानव शरीर के आर-पार भेज देती है। इस प्रक्रिया में जब उपयोगकर्ता की उंगली एक रिसीवर के साथ टच होती है तभी डेटा आगे जाता है, यानी डिवाइस और रिसीवर के बीच हमारा शरीर ही डेटा चैनल के लिए कनेक्शन का काम करता है। जिसका अर्थ है कि रिसीवर के साथ शारीरिक संपर्क में न होने पर डेटा हमारे शरीर तक ही सीमित रहता है।

बायोमेट्रिक्स पर निर्भर नहीं
पड्र्यू विश्वविद्यालय में इलेक्ट्रिकल और कम्प्यूटर इंजीनियरिंग के एसोसिएट प्रोफेसर श्रेयस सेन का कहना है कि उपकरणों को अनलॉक करने के लिए यह तकनीक बायोमेट्रिक्स पर निर्भर नहीं होगी। यह डिजिटल सिग्नल पर संचालित होगी। यानी सिर्फ स्पर्श मात्र से ही हम किसी और व्यक्ति के फोन पर अपनी पसंद की ऐप खोल सकेंगे, उसे ऑपरेट कर सकेंगे। आप जिसे भी स्पर्श करेंगे वह और अधिक पावरफुल हो जाएगा क्योंकि डिजिटल जानकारी इसके माध्यम से प्रसारित हो रही होगी। हालांकि, श्रेयस का कहना है कि इस डिवाइस पर अभी और काम करने की जरूरत है।

अभी इन कामों में कर सकते उपयोग
लेकिन फिलहाल इसके सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल डेटा ट्रांसमिशन के सामान्य काम जैसे भुगतान करने के लिए क्रेडिट कार्ड की जानकारी या ऑथेंटिकेशन डेटा का उपयोग कर किसी परिसर में प्रवेश करने के लिए प्रोग्राम किया जा सकता है। आप पर छूकर ऐसे बहुत से सामान्य डाटा प्रोसेसिंग के काम कर सकेंगे वह भी बिना किसी उपकरण को अपनी जेब या बैग से निकाले। यह शोध जर्नल ट्रांजेक्शंस ऑन कम्प्यूटर-ह्यूमन इंटरेक्शन में प्रकाशित हुआ था।