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भारतीय युवा इंजीनियर जिनके इनोवेशन बने देश की पहचान

ऑटो टेक में नई सोच से नवाचार कर रहे इन चेहरों पर है सबकी नज़र , जो अपनी सोच और आइडिया के बूते मोबिलिटी और टेक्नोलॉजी को नए सिरे से परिभाषित कर रहे हैं।

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जयपुर

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Mohmad Imran

Feb 06, 2021

भारतीय युवा इंजीनिअर जिनके इनोवेशन बने देश की पहचान

भारतीय युवा इंजीनिअर जिनके इनोवेशन बने देश की पहचान

इंडियन बुलेट ट्रैन को इन्होंने दिया 'चीता'
ये हैं 29 वर्षीय चक्रधर आल्ला। 2023 में जब देश की पहली बुलेट ट्रेन चलेगी, तो उस पर इन्हीं का बनाया लोगो अंकित होगा। इसे उन्होंने 30असफल प्रयासों के बाद बनाया।

कीटों से प्रेरित 'ड्रोन'
ऑस्ट्रेलिया की यूनिवर्सिटी ऑफ न्यू साउथ वेल्स के डॉ. श्रीधर रवि भंवरे से प्रेरित अगली पीढ़ी के ड्रोन 'यूएनएसडब्ल्यू' विकसित कर रहे हैं।

ई-वेस्ट से बनाते ड्रोन
कर्नाटक के प्रताप पुराने सामान और ई-वेस्ट से टेलीग्राफी, यातायात प्रबंधन, मानवरहित और ऑटो-पायलट जैसे 600 से ज्यादा ड्रोन बना चुके हैं।

'हाइपरलूप' पॉड भी
आइआइटी मद्रास के छात्र सुयश सिंह ने जो हाइपरलूप पॉड बनाया है उससे एलन मस्क भी प्रभावित हैं। मस्क हाइपरलूप बनाने में उनकी मदद भी करेंगे।

इनका गोताखोर ड्रोन
एमआइटी यूनिवर्सिटी की सम्प्रीति भट्टाचार्य ने गोताखोर ड्रोन बनाए हैं। ये ड्ऱोन तस्करों की निगरानी, समुद्र में राहत कार्यों, रेडिएशन-रिसाव में मदद कर सकते हैं।

बनाया उड़ने वाला रोबोट
भारतीय मूल के मिहिर गरिमेल्ला की रोबोट्स में रुचि दो साल की उम्र में हुई। एक रोबोटिक पेट डॉग के साथ खेलकर बड़े हुए मिहिर ने 10 साल की उम्र में ही अपने लिए एक असिस्टेंट रोबोट 'मोज़ार्ट' बना लिया जो उसे संगीत की कक्षा के दौरान गलतियां करने पर टोक देता था। इसके बाद उन्होंने ज्यादा उपयोगी कामों को ध्यान में रखते हुए 14 साल की उम्र में फ्लाइबोट बनाया। यह एक कम लागत का ड्रोन रोबोट है जो आपातकालीन स्थितियों, आपदा और पहुंच से दूर जगहों पर लोगों की सही लोकेशन और मदद पहुंचाने में सक्षम है। इस रोबोट ने उन्हें 2015 में गूगल के साइंस फेयर में अपनी श्रेणी में शीर्ष पुरस्कार भी दिलवाया।