
कुछ दिनों में स्कूल खुल जाएंगे। बच्चे स्कूल जाने लगेंगे। इनमें ऐसे बच्चे भी होंगे जो पहली बार स्कूल जा रहे हैं। अगर आपके घर में भी ऐसा बच्चा है जो पहली बार आपके बिना कहीं जा रहा है तो यही सही समय है कि उसे गुड टच-बैड टच की जानकारी दें। एक बात जान लें, आप बच्चे को कितने भी अच्छे स्कूल भेज लें, वहां कितने भी अच्छे लोग काम करते हों, लेकिन यह एक ऐसी जानकारी है जो हर बच्चे को पता होनी चाहिए, ताकि कभी भी किसी भी परिस्थिति में उसके साथ अगर कोई कुछ गलत करे तो वह आपको आकर सबसे पहले बताए।
चॉकलेट दे या डराये, हमें जरूर बताना
साइकोलॉजिस्ट सोनम छतवानी कहती हैं, बच्चों को ये जरूर बताएं कि जब कभी आपको लगे कि कोई बैड टच कर रहा है, तो उन्हें क्या करना चाहिए। अगर स्कूल में कोई करे, तो जोर से चिल्लाएं हेल्प, बचाओ। फिर तुरंत किसी टीचर के पास जाएं। अगर कोई टीचर करे, तो दूसरे टीचर के पास भागकर जाएं या प्रिंसिपल के पास जाएं। ऑटो, बस, लिफ्ट कहीं भी बैड टच हो जोर-जोर से चिल्लाएं। मदद के लिए बुलाएं। भले ही सामने वाले ने आपको किसी को न बताने को कहा हो। सीक्रेट रखने को कहा हो। चॉकलेट दिलाई हो, किसी तरह से डराया हो। मारने की धमकी दी हो। आपको पैरेंट्स को बताना है। वो हमारे फ्रेंड होंगे, रिश्तेदार होंगे, तो भी आपको बताना है। हमारे लिए आप सबसे ज्यादा जरूरी हो। हम आपकी बात पर जरूर यकीन करेंगे। आपको सेफ रखेंगे।
सरल भाषा में इस तरह बताएं
अगर कोई आपको टच करता है और आपको अच्छा लगता है तो यह गुड टच है। जैसे मम्मी-पापा, दीदी, दादी के छूने से अच्छा फील होता है। इसके अलावा जब कोई आपको इस तरह छूता है कि आपको बुरा लगता है, यह बैड टच होता है। इसके साथ ही अगर कोई व्यक्ति आपके प्राइवेट पाट्र्स को छूने की कोशिश करता है तो यह भी बैड टच है। अगर कोई व्यक्ति, भले ही हम उसे जानते हैं, आपको ऐसे छूता है कि आपको अच्छा फील नहीं होता, और आपको इसके बारे में किसी से ना बताने के लिए कहता है, तो यह बैड टच है।
ये जरूर बताएं-
बच्चों को बताएं कि कपड़े पहनना जरूरी है। बिना कपड़ों के सब शेम-शेम बोलते हैं। साथ ही बताएं कि शरीर के किन हिस्सों को किसी को भी टच करने नहीं देना है।
अपनी झिझक खत्म कर बात करें
कि सी भी पैरेंट के लिए बच्चों से ऐसे विषय पर बात करना आसान नहीं होता। झिझक होती है। लेकिन अब समय आ गया है कि पैरेंट अपनी झिझक खत्म करें। बच्चों की सुरक्षा के लिए ये जरूरी है। शुरुआत में थोड़ी झिझक होती है, लेकिन संयम और नियंत्रित भाषा के जरिए इसे आसानी से समझाया जा सकता है।
टिप्स फॉर पैरेंट्स
- बच्चों को वहीं खेलने जाने दें, जहां आप उन्हें जब चाहें, देख सकते हैं।
- अगर बच्चा किसी खास व्यक्ति के पास जाना पसंद नहीं करता, तो फोर्स न करें। वजह जानें।
- हंसता-खेलता, मस्ती करने वाला बच्चा अचानक गुमसुम रहने लगे, तो सतर्क हो जाएं।
बच्चों की परवरिश इस तरह करें
चाइल्ड साइकोलॉजिस्ट डॉ. अनुभा वर्मा कहती हैं, पैरेंट्स को चाहिए कि बच्चों के दोस्त बनें। उनकी बातों को सुनें। उन्हें प्रोत्साहित करें ताकि वे आपको हर चीज बताएं। इसके साथ ही बच्चों से हमेशा पूछते रहें कि स्कूल में आज क्या हुआ? किसने क्या कहा? क्या उसे कोई बात स्कूल में अच्छी नहीं लगती? याद रखें, बच्चे जब भी अपनी कोई बात आपसे शेयर करें, तो भले ही उनकी गलती हो, आप उन पर चिल्लाएं नहीं। वरना अगली बार से वो आपको कोई भी बात नहीं बतायेंगे।
Published on:
10 Jun 2023 01:13 pm
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