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ब्रेकअप के वक्त ध्यान रखें ये बातें, रिश्ते में ना को ना ही समझें

- गुस्से का कारण दोस्तों और रिश्तेदारों से करें शेयर - ना का मतलब ना समझें, तभी हिंसा से होंगेे दूर

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Deepesh Tiwari

Jun 29, 2023

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लोगों में लगातार बढ रहा गुस्सा समाज में धीरे धीरे एक अजीब स्थिति पैदा करता दिख रहा है। गुस्से में वृद्धि जहां लोगों को हिंसक बना रही है, वहीं इसके पीछे कई तरह के कारण भी छिपे हुए हैं। कहीं आपके घर में भी तो कोई बच्चा बहुत जल्दी गुस्सा होने के साथ ही हिंसक तो नहीं हो रहा है। यदि ऐसा है तो आपको उसके उपर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। इन्हीं में गुस्से में वृद्धि का एक विशेष कारण है रिजेक्शन...

दरअसल आज के दौर में ब्रेकअप होना बहुुुुत आम हो गया है। ऐसे में रिश्ते बनते-टूटते रहते हैं, लेकिन सवाल ये है कि किसी लड़की या लड़के के -नो- को दूसरा पार्टनर किस रूप में स्वीकार कर रहा है, ये जानना आवश्यक है। आमतौर पर रिजेक्शन को स्वीकार नहीं करना नॉर्मल है, फर्क ये है कि हम लोग इससेे हिंसक तो नहीं हो जाएंगे। ऐसे में इसके पीछे एक बड़ा सवाल यह है कि इस रिजेक्शन को वह व्यक्ति कैसे लेता है।

इस संबंध में केजीएमयू लखनऊ के मनोचिकित्सक आदर्श त्रिपाठी का कहना है कि ऐसे लोगों में छोटी-मोटी हरकतें जैसे कि छोटे बच्चों को परेशान करना, जानवरों के प्रति बहुत ज्यादा हिंसक होना या चोरी करना, नशे के आदि होना कॉमन होता है। लेकिन जरूरी नहीं है कि ऐसे लोग हिंसक होंगे ही...

वेबसीरीज भी कर रहीं प्रभावित-
दिल्ली में साक्षी और श्रद्धा मईर केसों में आरोपियों ने स्वीकार किया था कि घटना से पहले उन्होंने वेब सीरीज देखी थी। तो क्या युवाओं के दिमाग पर इनका भी असर पड़ रहा है? विशेषज्ञों का मानना है कि , हम जो कुछ देखते हैं, उसका भी अच्छा खासा असर हमारे दिमाग पर पड़ता है। आजकल का कंटेंट युवाओं को प्रभावित कर रहा है।

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केस 01- दिल्ली में एक युवक ने एक लड़की पर चाकू से कई कार वार किए। इसके बाद उसने कई बार पत्थर उठाकर भी मारा। इसके बाद वह चला गया। कुछ पलों के बाद फिर लौटा और पत्थर उठाकर मारा।

केस 02- दिल्ली के पालम थाना इलाके में केशव ने पिता पर चाकू से 18 से 20 वार कर हत्या कर दी। उसके पिता उसको पैसा देने का विरोध करते थे। इसकी साजिश कई दिनों से कर रहा था। फिर हत्या कर दी।

केस 03- फरिदाबाद में गेम खेलने के लिए
मोबाइल नहीं देने पर 10वीं की छात्रा पर अपने 12 साल के भाई की हत्या का आरोप लगा। किशोरी ने कहा कि मात्रा-पिता भाई को ही अधिक समय के लिए मोबाइल देते थे।

अपना ध्यान धैर्य बढ़ाने वाली चीजों पर दें-
अगर फोन किसी फाइल को खोलने में कुछ सेकंड ज्यादा वक्त ले लेता है तो हम झल्ला उठते हैं। हमारा इंटरनेट अगर स्लो हो जाए तो हमारा बीपी हाई हो जाता है। ऐसी तमाम छोटी-मोटी डिमांड जो हम तकनीक से करते जा रहे हैं और जो समय में पूरी ना हों, तो हमें गुस्सा आ जाता है।

बच्चे की परवरिश का माहौल-
बच्चे की परवरिश ऐसे माहौल में होती है, जहां मां-बाप हमेशा गुस्सा करते ओर चिल्लातें हैं तो बच्चे भी हिंसक व्यवहार करने लगते हैं।

कुछ कारण ये भी
चिंता, डर, कमजोरी या शक्तिहीनता और दुख व शोक भी गुस्से का कारण होते हैं। कारण सामान्य लगते हैं और हर किसी के इमोशन हैं, लेकिन इनके कारण यदि आपका दैनिक जीवन प्रभावित होने लगा है या बार-बार आत्मनियंत्रण खोने लगे हैं, तो आपको सजग होने की जरूरत है।

ये उपाय भी अपनाएं-
- बच्चों को बचपन से ही सही सीख दें। उन्हें अपने संस्कारों से जोड़ें।

- टीनएजर्स के मन को समझें, इसके अलावा उनके साथ समय भी बिताएं।

- टीनएजर्स से रिश्ते को इतना खुला रखें कि वह हर अच्छी-बुरी बात आपसे शेयर कर सकें।

- उन्हें ये भी सिखाएं कि समाज में लड़का और लड़की के बीच बराबरी है।

- टीनएजर्स को रिजेक्शन और झगड़ों से कैसे निपटें ये भी बताएं।

- गुस्स को कंट्रोल करने की तकनीक भी उन्हें बताएं।

- अगर गुस्सा कंट्रोल नहीं हो रहा है या पर्सनैलिटी डिसॉर्डर लग रहा है तो डॉक्टर का परामर्श लें।