
World Mysterious Place Svalbard Island | (फोटो सोर्स- Freepik)
Svalbard Island: कल्पना कीजिए एक ऐसी जगह की जहां न तो कोई बच्चा जन्म लेता है और न ही किसी की अंतिम संस्कार(Funeral) किया जा सकता है। इतना ही नहीं, अगर आप घर से बाहर निकलें तो हाथ में लोडेड राइफल होना बहुत जरूरी है। सुनने में यह किसी हॉलीवुड फिल्म की स्क्रिप्ट जैसा लग सकता है, लेकिन यह सच्चाई है 'स्वालबार्ड' (Svalbard Island) द्वीप की। नॉर्थ पोल से केवल 1300 किलोमीटर दूर स्थित यह द्वीप इन दिनों सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है। हाल ही में एक ट्रैवल इंफ्लुएंसर ने यहां के चौंकाने वाला एक्सपीरियंस शेयर किए है। आइए जानते हैं आखिर इस अजीबोगरीब जगह के पीछे का असली सच क्या है?
स्वालबार्ड के मुख्य शहर लॉन्गइयरब्येन (Longyearbyen) में 1950 से ही दफनाने पर रोक है। इसके पीछे की वजह यहां साल भर कड़ाके की ठंड रहती है और जमीन 'परमाफ्रॉस्ट' (हमेशा जमी रहने वाली बर्फ) की स्थिति में होती है। इस कड़ाके की ठंड के कारण शव सड़ते नहीं हैं। सालों पुराने शवों में आज भी वायरस और बैक्टीरिया जिंदा पाए गए हैं, जो बिमारी फैला सकते हैं। इसलिए, यदि कोई इंसान गंभीर रूप से बीमार होता है, तो उसे हवाई जहाज से मुख्य नॉर्वे भेज दिया जाता है।
हैरानी की बात यह है कि यहां बच्चे को जन्म देने की भी परमिशन नहीं है। असल में, बहुत ज्यादा दुर्गम एरिया होने की वजह से यहां कोई बड़ा हॉस्पिटल नहीं है। इमरजेंसी की स्थिति में मां और बच्चे की जान को खतरा हो सकता है, इसलिए गर्भवती महिलाओं को डिलीवरी से कुछ हफ्ते पहले ही नॉर्वे भेज दिया जाता है।
इस द्वीप की आबादी करीब 2500 है, लेकिन यहां इंसानों से ज्यादा पोलर बियर रहते हैं। शहर के सुरक्षित एरिया से बाहर कदम रखते ही राइफल साथ रखना कानूनी रूप से जरूरी है। यह हमला करने के लिए नहीं, बल्कि सेल्फ- डिफेंस के लिए जरूरी है।
स्वालबार्ड की सबसे खास बात यह है कि यह दुनिया का इकलौता 'वीजा फ्री जोन' है। 1920 की स्वालबार्ड संधि के कारण भारत सहित कई देशों के लोग यहां बिना किसी इमिग्रेशन प्रोसेस के रह सकते हैं और काम कर सकते हैं। लेकिन शर्त यह है कि, आपके पास रहने का इंतजाम और रोजगार हो।
यहीं पर दुनिया का फेमस 'ग्लोबल सीड वॉल्ट' भी है। इसे 'डूम्सडे वॉल्ट' (Doomsday Vault) भी कहा जाता है। इसमें दुनिया भर की फसलों के बीज सुरक्षित रखे गए हैं, ताकि किसी वैश्विक आपदा या युद्ध की स्थिति में लोगों के लिए खेती को दोबारा शुरू किया जा सकें।
डिस्क्लेमर: यह जानकारी सोशल मीडिया व सार्वजनिक स्रोतों पर आधारित है। इसके तथ्यों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की गई है, इसलिए पाठक अपनी समझ से सत्यापन करें।
Updated on:
12 Jan 2026 03:40 pm
Published on:
12 Jan 2026 12:00 pm
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