
one rupee
लखनऊ। भारत में एक रुपए के सौ साल पूरे हो चुके हैं। राजधानी स्थित आरबीआइ से जुड़े अधिकारियों ने बताया कि इन नोटों को 1926 में बंद कर दिया गया। इसके बाद दूसरे विश्व युद्ध के दौरान 1940 में इसे एक बार फिर शुरू किया गया। 1994 में दुबारा इन नोटों की प्रिंटिंग बंद कर दी गई। हालाँकि बाजार में यह नोट चलता रहा। मोदी सरकार के गठन के बाद वर्ष 2015 में इसकी छपाई दोबारा शुरू करवाई गयी।
एक का नोट यादगार
राजधानी के एक सरकारी बैंक में कार्ययत क्षितिज शुक्ल ने कहा कि एक रूपए के नोट को अधिकतर लोग कलेक्ट करते हैं। उन्हें उम्मीद नहीं थी कि अधिकतर लोग ये जानते होंगे कि 1 रूपए के नोट के सौ साल पूरे हुए हैं। बीते दिन कुछ लोग एक रूपए का नोट लेने आये लेकिन बैंक के पास नोट न होने के चलते उन्हें मिल नहीं सके।
कैसे शुरू हुआ इन नोटों का चलन
पहले विश्व युद्ध के दौरान चांदी के पर्याप्त सिक्के ढालने में नाकाम रही ब्रिटिश सरकार ने एक रुपए के नोट की छपाई शुरू की थी। एक रुपए का पहला नोट 30 नवंबर, 1917 को छपकर आया। इसमें किंग जॉर्ज पंचम की तस्वीर थी।एक रूपए के नोट को जारी करती है भारत सरकार
- भारत सरकार ने अपनी मुद्रा का अवमूल्यन किया तो लेन देन में एक रुपये के नोट की अहमियत कम होना शुरू हो गयी।
-भारतीय मुद्रा में सबसे छोटा नोट है एक रुपये का नोट
- इकलौता ऐसा नोट जिसे आरबीआइ नहीं भारत सरकार सीधे जारी करती है।
- इन नोटों पर भारत सरकार लिखा पाएंगे और इस पर वित्त मंत्री का हस्ताक्षर भी होता है। बाकी नोट रिज़र्व बैंक डिज़ाइन करता है।
- एक रुपये की क़ीमत होने के बावजूद, इसकी छपाई में काफ़ी खर्च आता है। इसी कारण से 1995 में, सरकार ने इसकी छपाई बंद कर दी थी। मोदी सरकार ने वर्ष 2015 में इसकी छपाई दोबारा शुरू करवाई।
Published on:
01 Dec 2017 01:31 pm
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