कहा
जाता है कि सभी पौराणिक संरचनाएं, भगवान विश्वकर्मा द्वारा निर्मित हैं।
भगवान विश्वकर्मा के जन्म को देवताओं और राक्षसों के बीच हुए समुद्र मंथन
से माना जाता है। पौराणिक युग के अस्त्र और शस्त्र, भगवान विश्वकर्मा
द्वारा ही निर्मित हैं। वज्र का निर्माण भी उन्होने ही किया था। माना जाता
है कि भगवान विश्वकर्मा ने ही लंका का निर्माण किया था। पंडित माधव ने
बताया इसके पीछे कहानी है कि भगवान शिव ने माता पार्वती के लिए एक महल का
निर्माण करने के लिए भगवान विश्वकर्मा को कहा, तो भगवान विश्वकर्मा ने
सोने के महल को बना दिया।
इस महल के पूजन के दौरान, भगवान शिव ने
राजा रावण को आंमत्रित किया। रावध, महल को देखकर मंत्रमुग्ध हो गया और जब
भगवान शिव ने उससे दक्षिणा में कुछ लेने को कहा, तो उसने महल ही मांग लिया।
भगवान शिव ने उसे महल दे दिया और वापस पर्वतों पर चले गए। इसी प्रकार,
भगवान विश्वकर्मा की एक कहानी और है- महाभारत में पांडव जहां रहते थे, उस
स्थान को इंद्रप्रस्थ के नाम से जाना जाता था। इसका निर्माण भी
विश्वकर्मा ने किया था। कौरव वंश के हस्तिनापुर और भगवान कृष्ण के
द्वारका का निर्माण भी विश्वकर्मा ने ही किया था। अंत: विश्वकर्मा पूजन,
भगवान विश्वकर्मा को समर्पित एक दिन है। इस दिन का औद्योगिक जगत और भारतीय
कलाकारों, मजबूरों, इंजीनियर्स आदि के लिए खास महत्व है। भारत के कई
हिस्सों में इस दिन काम बंद रखा जाता है और खूब पंतबाजी की जाती है।
पंडित
शक्ति मिश्रा ने कहाकि विश्वकर्मा पूजा जन कल्याणकारी है। इसीलिए
प्रत्येक व्यक्तियों को सृष्टिकर्ता, शिल्प कलाधिपति, तकनीकी ओर विज्ञान
के जनक भगवान विशवकर्मा जी की पुजा-अर्चना अपनी व राष्टीय उन्नति के लिए
अवश्य करनी चाहिए।
विश्वकर्मा पूजा का मुहूर्त
>पूजा
करने का शुभ महूर्त समय 18:47 सुबह से शुरू हो जायेगा क्योंकि यह योग
बहुत ही कम होता हैं गणेश चतुर्थी के समय में है यह योग ।