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35000 करोड़ के अनाज घोटाले में 13 साल की जांच, 44 और पर मुकदमा

कोटेदारों से गरीबों का अनाज हासिल कर अवैध रूप से उरई से बांग्लादेश भेजने के मामले में 13 साल के लंबे वक्त के बाद आर्थिक अपराध शाखा ने आखिरकार केस दर्ज कर लिया है।

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लखनऊ

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Akansha Singh

May 04, 2019

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35000 करोड़ के अनाज घोटाले में 13 साल की जांच, 44 और पर मुकदमा

लखनऊ. कोटेदारों से गरीबों का अनाज हासिल कर अवैध रूप से उरई से बांग्लादेश भेजने के मामले में 13 साल के लंबे वक्त के बाद आर्थिक अपराध शाखा ने आखिरकार केस दर्ज कर लिया है। इसमें 44 लोगों को नामजद किया गया है, जिनमें फर्मों के मालिक और बिचौलिए हैं। 27 फरवरी 2006 को घोटाले की जांच ईओडब्ल्यू सौंपी गई थी। दिलचस्प बात यह है कि घोटाले में किसी नेता या अफसर को नामजद नहीं किया गया है। इससे पूर्व सीबीआई समेत अन्य एजेंसियां भी कई मुकदमे दर्ज कर चुकी हैं। प्रदेश के बहुचर्चित अनाज घोटाले का यह मामला है। 31 जिलों में अंजाम दिए गए इस घोटाले की कुल रकम 35000 करोड़ आंकी गई थी। उरई के मामले में अनाज की कालाबाजारी का खेल 29 सितंबर 2004 से 21 जनवरी 2005 के बीच हुआ था। हनुमान प्रसाद ओझा नामक बिचौलिए व सहयोगियों ने 40 फार्म के माध्यम से किसानों से अनाज खरीदने की बजाय कोटेदार से 19167.87 क्विंटल सस्ता अनाज खरीदा। कानपुर, कानपुर देहात, फतेहपुर, उन्नाव, बांदा, हमीरपुर, कौशांबी और कन्नौज में यह खेल खेला गया। जमा अनाज को हनुमान ने उरई रेलवे स्टेशन पर रैकों में लोड करवा कर प्रियंका ओवरसीज नई दिल्ली से भुगतान हासिल करना बताया जबकि हकीकत में अनाज कानपुर स्टेशन से लोड कर बांग्लादेश भेज दिया था।