
लखनऊ. सहायक अध्यापक पद से शिक्षामित्रों का समायोजन रद होेने के बाद अब यूपी में करीब पांच हजार प्राइमरी टीचरों पर बर्खास्तगी की तलवार लटक रही है। फर्जी मार्कशीट के जरिए प्राइमरी स्कूलों में अध्यापक बने 4570 शिक्षकों की बर्खास्तगी तय है। इन पर आपराधिक धाराओं में रिपोर्ट दर्ज करने की भी तैयारी है। एसआईटी की जांच में पूरे मामले का खुलासा हुआ है। फर्जी अंकपत्र मामले में बेसिक शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव राजप्रताप सिंह ने परिषदीय विद्यालयों में कार्यरत इन शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई के आदेश दे दिए हैं। राजप्रताप सिंह ने बताया कि जांच में करीब पांच हजार शिक्षकों की डिग्रियां फर्जी पाई गई हैं। ऐसे टीचरों पर विभागीय कार्रवाई के तहत सेवा से बर्खास्तगी के साथ ही इनके खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करने की तैयारी शुरू कर दी गई है। बेसिक शिक्षा विभाग ने सभी बीएसए को ऐसे अध्यापकों की सूची सौंप दी है।
एसआईटी की जांच में हुए कई खुलासे
एसआईटी की जांच में खुलासा हुआ है कि आगरा के आगरा जिले में डॉ. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय में बीएड की मार्कशीट में फर्जीवाड़ा हुआ है। रिपोर्ट में सामने आया है कि विवि के बीएड सत्र 2005 में कुल हुए दाखिलों में 3,517 छात्रों को अतिरिक्त बीएड की डिग्री बांटी गईं। इतना ही नहीं 1,053 छात्रों की अंकपत्र में छेड़छाड़ कर नंबर भी बढ़ा दिए गए।
एसआईटी रिपोर्ट में हुआ खुलासा
आगरा विश्वविद्यालय के बीएड सत्र 2004-2005 की चार्ट में 84 महाविद्यालयों के 12,472 छात्रों के परिणाम दर्ज मिले, जबकि आगरा विवि को एनसीटीई से 82 महाविद्यालयों के 8,150 छात्रों को बीएड का कोर्स कराने की अनुमति थी। इस सत्र में विश्वविद्यालय के 82 डिग्री कॉलेज में कुल 8,030 छात्रों के नाम दर्ज थे, जबकि 12,472 को परिणाम मिले।
नंबर भी बढ़ाए गए
एसआईटी की जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि आगरा विश्वविद्यालय से संबंध इन कॉलेजों में फर्जी अंकपत्र के अलावा 1053 छात्रों की मार्कशीट से भी छेड़छाड़ की गई। तृतीय और द्वितिय श्रेणी में पास छात्रों को प्रथम श्रेणी से उत्तीर्ण दिखा गया। ऐसे छात्रों के नंबर बढ़ाकर 80 से 85 तक कर दिए गए।

Updated on:
28 Oct 2017 12:24 pm
Published on:
28 Oct 2017 10:34 am
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