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JTRI में 65 सिविल जजों को मिला प्रशिक्षण, निष्पक्ष निर्णय और मैनेजमेंट कॉन्सेप्ट्स पर दिया जोर

Refresher Training: न्यायिक प्रशिक्षण और अनुसंधान संस्थान (JTRI), लखनऊ ने जूनियर डिवीजन के सिविल जजों के लिए चल रहे रेफ्रेशर प्रशिक्षण कार्यक्रम के अंतर्गत आज यानी बुधवार को 'निष्पक्ष निर्णय लेने और विवादों के बेहतर प्रबंधन करने’ विषय पर एक ट्रेनिंग सेशन का आयोजन किया गया।

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लखनऊ

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Aniket Gupta

Oct 04, 2023

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JTRI में 65 सिविल जजों को मिला प्रशिक्षण, निष्पक्ष निर्णय और मैनेजमेंट कॉन्सेप्ट्स पर दिया जोर

Refresher Training: न्यायिक प्रशिक्षण और अनुसंधान संस्थान (JTRI), लखनऊ ने जूनियर डिवीजन के सिविल जजों के लिए चल रहे रेफ्रेशर प्रशिक्षण कार्यक्रम के अंतर्गत आज यानी बुधवार को 'निष्पक्ष निर्णय लेने और विवादों के बेहतर प्रबंधन करने’ विषय पर एक ट्रेनिंग सेशन का आयोजन किया गया। इस ट्रेनिंग में 65 सिविल जजों ने हिस्सा लिया, जिनको आईआईएम इंदौर के मैनेजर नवीन कृष्ण राय ने सम्बोधित किया। बता दें, इस ट्ट्रेनिंग सेशन का मुख्य उद्देश्य जजों को मैनज्मेंट से सम्बंधित कॉन्सेप्ट्स और सिधांतों से अवगत कराना था।

आईआईएम इंदौर के मैनेजर श्री राय ने डिसिज़न विज्ञान, प्रबंधन, नेगोशीएशन सिद्धांत और मनोविज्ञान से सम्बंधित विभिन्न कान्सेप्ट्स के माध्यम से ट्रेनिंग में हिस्सा ले रहे जजों को ‘विवादों के बेहतर प्रबंधन करने और उचित निर्णय लेने’ की तरीकों के बारे में बताया।

ट्रेनिंग सेशन में स्कीमा सिद्धांत पर भी हुई चर्चा
ट्रेनिंग के दौरान नवीन कृष्ण राय ने स्कीमा सिद्धांत पर बात करते हुए बताया कि हर एक व्यक्ति के जीवन के अलग-अलग अनुभव ही उनके दृष्टिकोण को अन्य व्यक्तियों से अलग बनाते हैं। इसलिए किसी भी केस में निर्णय देते समय उन्हें आरोपी, पीड़ित व अपने स्वयं के स्कीमा के बारे में एक बार विचार अवश्य कर लेना चाहिए, जिससे कि यह सुनिश्चित हो सके कि वह जो भी निर्णय दे रहे हों वह निष्पक्ष और सर्वश्रेस्ठ है। और उसमें नियम-क़ानून के साथ-साथ मानवता के पहलूओं को भी ध्यान रखा गया है। उन्होंने विवादों के बेहतर मैनेजमेंट करने के लिए इंट्रेस्ट बनाम पोजीशन अर्थात् हित बनाम स्थिति-केंद्रित दृष्टिकोण के बारे में भी चर्चा की। इसके माध्यम से उन्होंने किसी विवाद में शामिल पक्षों द्वारा विभिन्न मुद्दों पर बताई गई उनकी स्थिति और उनके हितों, जिन्हें कोई भी पक्ष स्पष्ट रूप से बताता नहीं हैं, के बीच अंतर करने के महत्व के बारे में बताया। उन्होंने आगे बताया कि इन दोनो के बीच के अंतर को समझ पाने का कौशल विकसित करने से जजों को किसी भी विवाद के मूल कारणों का निदान करने में मदद मिलती है और इससे अधिक प्रभावी और निष्पक्ष समाधान का मार्ग प्रशस्त होता है। इस ट्रेनिंग सेशन में में फ़िलॉसफर जॉन रॉल्स द्वारा बताई गई “अज्ञानता का पर्दा” जैसी अवधारणाओं के बारे में भी चर्चा हुई, जो किसी व्यक्ति को किसी प्रकार का निर्णय लेने के दौरान उसके द्वारा निष्पक्षता और भावनात्मक अलगाव जैसे गुणों को प्रदर्शित करने की वकालत करती हैं।

नवीन कृष्ण राय ने कहा कि निष्पक्ष निर्णय लेने और विवादों का कुशलता पूर्वक समाधान करने का कौशल जजों के लिए न केवल कोर्ट रूम में जरूरी है, बल्कि यह उनके व्यक्तिगत जीवन का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह कौशल उन्हें व्यक्तिगत और संगठनात्मक विवादों से कुशलतापूर्वक निपटते हुए निष्पक्ष निर्णय लेने में सक्षम बनाते हैं। निष्पक्ष निर्णय लेना किसी भी जज के कौशल की नींव होती है, जिससे उसकी प्रभावशीलता सुनिश्चित होती है, जबकि विवादों का सफल निष्पादन उनके प्रदर्शन को बढ़ाने के साथ-साथ उनकी नेतृत्व क्षमताओं को भी मजबूत करता है।