तारा ने बताया कि जब हम रोटी मांगते बच्चों, बूढों को देखते थे तो लगता था सारी आदर्शों की बातें बेकार हैं। इसके बाद दस घरों से दो रोटी सब्जी जमा होना शुरू हुई। चौराहों रेलवे स्टेशन, बस स्टेशन जैसी जगहों पर 20 से 25 भूखे गरीबों को हर रोज खाना खिलाने की शुरुआत हुई थी, लेकिन लोग आते गये कारवां बनता गया। आज लगभग 700 घरों से रोटियां आती हैं और करीब 450 से 500 लोगों का पेट भरता है बुन्देली समाज