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अब ज़मीनों का भी होगा आधार कार्ड, मिलेगी 14 अंकों का विशिष्ट भूखण्ड पहचान संख्या

Unique Land Parcel Identification Number: जमीन का ब्योरा जुटाने के लिए आम आदमी को रेवेन्यू ऑफिस के चक्कर नहीं लगाने होंगे। सरकार अब आधार कार्ड की तर्ज़ पर अब जमीनों को भी 14 अक्षरों और अंकों की विशिष्ट पहचान संख्या दे रही है, जिसे ULPIN यानि Unique Land Parcel Identification Number कहा जाएगा।

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Unique Land Parcel Identification Number: जमीन का ब्योरा जुटाने के लिए आम आदमी को रेवेन्यू ऑफिस के चक्कर नहीं लगाने होंगे। जमीन के दस्तावेज में छेड़छाड़ या किसी तरह का घपला-घोटाला भी नहीं किया जा सकेगा। अब घर बैठे ऑनलाइन ही लैंड रिकॉर्ड देखा जा सकेगा और उसे प्रिंट भी किया जा सकेगा। दरअसल, सरकार अब आधार कार्ड की तर्ज़ पर अब जमीनों को भी 14 अक्षरों और अंकों की विशिष्ट पहचान संख्या दे रही है। इन Alpha-Numeric पहचान संख्या को ULPIN यानि Unique Land Parcel Identification Number कहा जाएगा।

ULPIN सभी बैंकों और सरकारी संस्थाओं के पास उपलब्ध होगा। जिस तरह आधार कार्ड से व्यक्ति की पहचान की जाती है, उसी तरह जहां भी जमीन की पहचान की जरूरत होगी, वहां यूएलपीआईएन बताकर काम निपटाया जाएगा।यूएलपीआईएन क्षैतिज और दंडवत (Latitude and Longitude) के आधार पर बनाया जाएगा।

ULPIN के फायदे

जमीन का ब्योरा जुटाने के लिए रेवेन्यू ऑफिस के चक्कर नहीं लगाने होंगे। इस एक नंबर से जमीन की खरीद-बिक्री का हर ब्योरा उपलब्ध हो जाएगा। इस तरह, बाबुओं की जेब गरम करने में पैसे खर्च करने की जरूरत नहीं रहेगी। अब घर बैठे ऑनलाइन ही लैंड रिकॉर्ड देखा जा सकेगा और उसे प्रिंट भी किया जा सकेगा। जमीन के दस्तावेज में छेड़छाड़ या किसी तरह का घपला-घोटाला नहीं किया जा सकेगा। जमीन विवाद के मामले घटेंगे। गलत तरीके से जमीन की रजिस्ट्री असली जमीन मालिक के अलावा दूसरे के नाम पर नहीं किया जा सकेगा। एक ही जमीन पर अलग-अलग बैंकों से लोन नहीं लिया जा सकेगा। जमीन को लेकर धोखाधड़ी के मामले कम होंगे। बेनामी लेनदेन पर रोक लगेगी। जमीन की रजिस्ट्री आसान हो जाएगी।

94 फीसदी काम पूरा

डिजिटल भारत भूखंड ब्योरा आधुनिकीकरण कार्यक्रम (Digital India Land Record Modernization Program) की शुरुआत 2008 से ही हुई थी। 2016 में डिजिटल इंडिया मिशन लॉन्च होने के बाद इस काम में तेज गति आई। देश के कुल 6.56 लाख में से 6.08 लाख गांवों के जमीन रिकॉर्ड को डिजिटल बनाकर वेब पोर्टल पर डाल दिया गया है। इस तरह, जमीन दस्तावेज को डिजिटल फॉर्मेट में लाने का काम 94% पूरा हो चुका है। देश के सभी 5,220 रजिस्ट्री ऑफिसों में से 4,883 को ऑनलाइन किया जा चुका है। 19 राज्यों में पायलट प्रॉजेक्ट चल रहा है। 13 राज्यों में सात लाख भूखंडों के लिए यूएलआईपीएन जारी हो चुके हैं।

अब नहीं होंगे विवाद

अब तक गांव को इकाई मानकर जमीन की पहचान की जाती थी। इस कारण हर रजिस्ट्री में इकाई के रूप में गांव का ही जिक्र होता था। घर का रिकॉर्ड चौहद्दी के अनुसार तैयार किया जाता था जो विवाद का कारण बनता था।