शुजा-उद-दौला की मौत के बाद उनके बेटे आसफ-उद-दौला ने लखनऊ की ओर रुख किया। उन्होंने लखनऊ को अवध की नयी राजधानी बनाया। नवाबों के लखनऊ जाने के बाद दिलकुशा में अंग्रेज़ों ने अपना ऑफिस खोला। क्योंकि यह ऑफिस नारकोटिक्स का था, इसलिए इस जगह को अफीम कोठी नाम से जाना जाने लगा। आजादी के बाद इस नवाबी कोठी और जमीन जो तब कैसर-ए-हिंद अफीम सरकार 'के पास थी, केंद्रीय जांच एजेंसी नारकोटिक्स को दे दी गयी। नारकोटिक्स विभाग के अधिकारी डीके सिंह ने बताया कि 2012 में यह ऑफिस बंद कर दिया गया है। पर इस इमारत का हाल बेहाल काफी समय पहले से था। पहली मंज़िल की छत भी ढह चुकी है।