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गोला उपचुनाव नहीं लड़कर भी क्यों सपा से भिड़ी हुई हैं मायावती, जानिए क्या है इस तूतू-मैंमैं की असलियत

गोला सीट पर हुए उपचुनाव के बाद उत्तर प्रदेश की दो प्रमुख विपक्षी पार्टियां इस समय एक दूसरे से भिड़ गई हैं। सपा की ओर से बसपा को धोखेबाज कहा जा रहा है तो वहीं बसपा ने भी सपा को आड़े हाथ लिया है। दोनों दलों के बीच इस नए टकराव का विश्लेषण-

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लखनऊ

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Rizwan Pundeer

Nov 08, 2022

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उत्तर प्रदेश की गोला गोकर्णनाथ सीट पर हुए उपचुनाव के नतीजे रविवार को घोषित हो गए हैं। चुनाव में भाजपा के अमन गिरि ने सपा के विनय तिवारी को बड़े अंतर से हराया है। इस चुनाव में बसपा ने कैंडिडेट नहीं उतारा था लेकिन नतीजों के बाद सपा और बसपा में घमासान हो गया है।

सपा ने बसपा को कहा- मुस्लिमों को धोखा देने वाला
गोला के नतीजे आने के बाद रविवार शाम को समाजवादी पार्टी की ओर से कहा गया कि बसपा ने भी चुनाव में बीजेपी की मदद की है। सपा ने कहा, "बसपा अपना वोट भाजपा में साइलेंटली ट्रांसफर करवाती है। पिछड़ों और मुसलमानों के साथ बसपा की ये धोखेबाजी है। बसपा प्रमुख मायावती केंद्र सरकार के दबाव में सपा को हराने का ठेका लेती हैं।

मायावती ने भी किया सपा पर पलटवार
बसपा प्रमुख मायावती ने सोमवार को गोला चुनाव को लेकर ट्वीट करते हुए लिखा कि भाजपा की जीत से ज्यादा सपा की 34,298 वोटों से करारी हार चर्च में है। बीएसपी इस चुनाव में नहीं थी। अब सपा अपनी इस हार के लिए कौन सा नया बहाना बनाएगी?

मायावती ने आगे लिखा, "अब सपा के सामने मैनपुरी लोकसभा और रामपुर विधानसभा की अपनी पुरानी सीटों को आजमगढ़ की तरह ही बचाने की चुनौती है। देखना होगा सपा ये सीटें भाजपा को हराकर फिर से जीत पाएगी या फिर से ये साबित होगा कि वह भाजपा को हराने में सक्षम नहीं है।"

सपा-बसपा के एक दूसरे से भिड़ने के हैं ये कारण
सपा और बसपा के बीच हो रहे इस टकराव को हम 2022 विधानसभा के नतीजों के बाद से समझ सकते हैं। 2022 के विधानसभा चुनाव में मायावती की पार्टी की बेहद खराब हालत रही, वो सिर्फ एक सीट जीत सकीं। वहीं सपा भी भाजपा को मुकाबला नहीं दे सकी।

2022 के चुनाव में देखा गया कि मुस्लिमों के वोट एकतरफा सपा और उसके साथ लड़ रहे दलों को गया। मायावती ने इसका कई बार जिक्र किया कि मुस्लिमों ने उनको वोट नहीं दिया। इसके बाद अखिलेश यादव के इस्तीफे से खाली हुई आजमगढ़ लोकसभा पर उपचुनाव हुआ। इस उपचुनाव में गुड्डू जमाली को बसपा ने टिकट दिया। गुड्डू ने भाजपा और सपा को अच्छा मुकाबला इस उपचुनाव में दिया।

आजमगढ़ सीट पर भाजपा की जीत हुई तो सपा ने इसका बड़ा कारण गुड्डू जमाली को मिला मुस्लिमों का समर्थन माना। दूसरी ओर से आजमगढ़ उपचुनाव से मायावती का हौसला बढ़ा। उनकी ओर से ये कहने की कोशिश की जा रही है कि मुसलमान अगर बसपा को वोट दें तो वो भाजपा को हरा सकती है।

मायावती ने पहले आजमगढ़ में गुड्डू जमाली तो अब सहारनपुर में इमरान मसूद को पार्टी में लेकर मुस्लिमों के बीच संदेश देने की भी कोशिश की है। बसपा के नेता लगातार मुस्लिमों को जोड़ने की बात कर रहे हैं। वहीं सपा के सामने मुस्लिमों को साथ जोड़े रखने की चुनौती है।

इसलिए मुस्लिमों को जोड़ने की कोशिश में सपा-बसपा
ऐसा लगता है कि सपा और बसपा दोनों ही मान चुके हैं कि भाजपा से मुकाबला आसान नहीं है। खासतौर से उच्च जातियों का वोट तोड़ना मुश्किल काम है। ऐसे में दोनों ही दल मुस्लिमों को जोड़ना चाहते हैं।

बसपा मुस्लिमों के बीच ये संदेश देने की कोशिश कर रही है कि भाजपा को हराना सपा के बस की बात नहीं है। वो खुलेतौर पर कह रही हैं कि मुसलमान सपा को वोट देकर देख चुके हैं और इससे कुछ हासिल नहीं हुआ है। दूसरी ओर सपा कह रही है कि मायावती खुद भाजपा के दबाव में हैं।

ये है तनातनी की वजह?
सपा और बसपा में नई तनातनी की वजह भाजपा विरोधी वोटों, खासतौर से मुस्लिमों, दलितों, पिछड़ों कोल अपने पाले में लाने की कोशिश दिख रही है। अब कौन किसके पाले में आता है, ये आने वाला समय ही बताएगा।