
Mayawati Akhilesh
लखनऊ. समाजवादी पार्टी राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव व बहुजन समाज पार्टी सुप्रीमो मायावती की संयुक्त प्रेस कांफ्रेस ने सत्ता पक्ष में हड़कंप मचा दिया है। शनिवार को दोनों नेताओं ने 38-38 सीटों पर गठबंधन तय किया साथ ही इस गठबंधन को आगे भी जारी रखने की बात कही। लेकिन इस दौरान अखिलेश यादव के संबोधन का अंदाज बिल्कुल जुदा रहा जो लोगों में काफी चर्चा का विषय बना हुआ है।
मायावती की तरह पन्नों को पढ़कर अखिलेश ने दिया बयान-
बसपा सुप्रीमो का भाषण देने का अंदाज तो हमेशा से एक तरह का ही रहा है। वो पारंपरिक रूप से हमेशा से पन्नों में अपनी बातों को समेट कर लाती हैं और चाहे प्रेस कांफ्रेस हो या कोई जनसभा, वह उसे पढ़कर ही लोगों को संबोधित करती हैं। लेकिन उनसे अलग अखिलेश यादव अपनी बातचीत में काफी अर्थपूर्ण रहें हैं। वह बातों को खुलकर बोलते रहे हैं। जो दिल में होता है, उसे जनता के सामने वैसे ही परोस देते हैं। उन्होंने कभी भी मायावती की तरह पढ़कर भाषण देने का विकल्प नहीं रखा था, लेकिन शनिवार को पहली बार वह बसपा सुप्रीमो की तरह ऐसा करते दिखे।
क्या यह पहले ही तय था-
कुछ लोगों का मानना है कि यह पहले से ही तय था। चूकिं पहला संबोधन मायावती का था और गठबंधन से संबंधित अधिकांश बातें उन्होंने बोल दी थीं, ऐसे में अखिलेश ने एहतियातन प्लान कर अपना भी संबोधन तैयार किया। जिससे मायावती व उनकी बातें लोगों को एक जैसी न लगे। मायावती के बाद उन्होंने भी अपने संबोधन में उन्हीं की भांति पढ़कर अपनी बातें कही। अखिलेश यादव का यह नया अंदाज क्या आगे भी जारी रहेगा? या सिर्फ यह मायावती के साथ संयुक्त प्रेस वार्ता तक ही सीमित था? इसका जवाब फिलहाल किसी के पास नहीं है लेकिन, लोगों में इसको लेकर खूब चर्चा हो रही है।
अखिलेश ने कहा यह-
अपने संबोधन में मायावती का धन्यवाद दिया। उन्होंने इस गठबंधन को पारिवारिक गठबंधन भी करार दिया। इसी के साथ जहां उन्होंने सपा कार्यकर्ताओं को बसपा का पूरा सहयोग व सम्मान करने का निवेदन किया तो वहीं भाजपा को उन्होंने हिदायत देते हुए कहा कि अब मायावती का अपमान मेरा अपमान होगा।
Updated on:
12 Jan 2019 09:09 pm
Published on:
12 Jan 2019 04:35 pm
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