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PK की I-PAC संभाली अखिलेश यादव का चुनावी कैंपेन, दिल्ली-बंगाल में हुईं दो सीक्रेट मीटिंग

I-PAC lead Akhilesh Yadav Election Campaign : यूपी विधानसभा चुनाव-2027 में अखिलेश यादव का चुनावी कैंपेन PK की I-PAC संभालेगी।
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लखनऊ

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Avaneesh Kumar Mishra

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Updated: 24 Feb 2026, 4:44 PM IST

अखिलेश यादव का चुनावी कैंपेन संभालेगी PK की I-PAC, PC-X

लखनऊ : उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भाजपा और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को चुनौती देने के लिए व्यापक चुनावी रणनीति पर काम शुरू कर दिया है। इसी कड़ी में चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर की कंपनी Indian Political Action Committee (I-PAC) को सपा के कैंपेन की कमान सौंपी गई है।

जानकारी के मुताबिक, I-PAC की टीम जल्द ही लखनऊ में सक्रिय होगी। सूत्र बताते हैं कि 28 मार्च को अखिलेश यादव नोएडा से ‘PDA भागीदारी रैली’ के जरिए चुनावी अभियान का आगाज कर सकते हैं।

बताया जा रहा है कि तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के.स्टालिन और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी अखिलेश को I-PAC के साथ काम करने की सलाह दी थी। दिसंबर 2025 में दिल्ली में अखिलेश और प्रशांत किशोर की पहली मुलाकात हुई, जिसके बाद जनवरी 2026 में पश्चिम बंगाल दौरे के दौरान दोनों के बीच लंबी बातचीत हुई। इसी के बाद सपा ने आधिकारिक तौर पर I-PAC को हायर किया।

कई कंपनियों को अखिलेश यादव ने दी जिम्मेदारी

सपा केवल एक कंपनी पर निर्भर नहीं है। डेटा एनालिसिस और रणनीतिक इनपुट का जिम्मा मुंबई की एक कंसल्टिंग फर्म को दिया गया है, जबकि सर्वे का काम कर्नाटक की एक एजेंसी ने पूर्वांचल से शुरू कर दिया है। बूथ स्तर तक संगठन को सक्रिय करने, कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षित करने और वोटर टर्नआउट बढ़ाने के लिए टेक्नोलॉजी आधारित टूल्स के इस्तेमाल की भी तैयारी है।

‘करो या मरो’ की स्थिति

लोकसभा चुनाव 2024 में 37 सीटें जीतने के बाद सपा का मनोबल बढ़ा है। 2022 के विधानसभा चुनाव में 111 सीटों पर जीत के बावजूद पार्टी सत्ता से दूर रह गई थी। अब 2027 को अखिलेश यादव निर्णायक अवसर मान रहे हैं। कानून-व्यवस्था, बेरोजगारी और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों पर वे लगातार भाजपा सरकार को घेर रहे हैं और सीधे मुख्यमंत्री पर निशाना साध रहे हैं।

2014 में मोदी का किया था इलेक्शन कैंपेन

प्रशांत किशोर का नाम भारतीय चुनावी रणनीति की दुनिया में स्थापित है। 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा के लिए कैंपेन मैनेजमेंट से चर्चा में आए। 2015 में बिहार में नीतीश कुमार की जीत, 2017 में पंजाब में अमरिंदर सिंह की वापसी और पश्चिम बंगाल व तमिलनाडु में क्षेत्रीय दलों की सफलताओं में I-PAC की अहम भूमिका मानी जाती है।

हालांकि हाल के वर्षों में प्रशांत किशोर ने अपनी राजनीतिक पहल ‘जन सुराज’ के जरिए बिहार में सक्रिय भूमिका निभानी शुरू की है, जबकि I-PAC का संचालन अब उनकी टीम संभाल रही है।

माना जा रहा है कि प्रशांत किशोर सीधे सामने आए बिना रणनीतिक दिशा तय करेंगे, जबकि I-PAC की टीम जमीनी स्तर पर कैंपेन की रूपरेखा लागू करेगी। सपा की कोशिश है कि 2027 की लड़ाई को संगठन, तकनीक और माइक्रो-मैनेजमेंट के सहारे निर्णायक बनाया जाए। उत्तर प्रदेश की सियासत में अब मुकाबला केवल नारों का नहीं, बल्कि रणनीति और संसाधनों के प्रबंधन का भी होगा।