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Lucknow यूनिवर्सिटी में लाल बारादरी विवाद, गंगाजल शुद्धिकरण और हनुमान चालीसा से गरमाया कैंपस

Hanuman Chalisa Lucknow University: लखनऊ विश्वविद्यालय की लाल बारादरी को लेकर विवाद ने तूल पकड़ लिया है। नमाज प्रकरण के बाद छात्रों ने गंगाजल से शुद्धिकरण कर हनुमान चालीसा का पाठ किया। हंगामे के बीच पुलिस ने हस्तक्षेप कर कई छात्रों को हिरासत में लिया।

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लखनऊ

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Ritesh Singh

Feb 24, 2026

नमाज विवाद के बाद हनुमान चालीसा, लाल बारादरी बना टकराव का केंद्र (फोटो सोर्स : WhatsApp News Group)

नमाज विवाद के बाद हनुमान चालीसा, लाल बारादरी बना टकराव का केंद्र (फोटो सोर्स : WhatsApp News Group)

Lucknow University Clash: लखनऊ का प्रतिष्ठित लखनऊ विश्वविद्यालय सोमवार को उस समय विवाद और तनाव का केंद्र बन गया, जब लाल बारादरी परिसर को लेकर छात्रों के दो गुट आमने-सामने आ गए। नमाज पढ़ने और रोजा इफ्तार की घटना के बाद हिंदू छात्र संगठनों ने विरोध जताते हुए गंगाजल से शुद्धिकरण और सामूहिक हनुमान चालीसा पाठ का आयोजन किया। पूरे घटनाक्रम के दौरान विश्वविद्यालय परिसर में भारी पुलिस बल तैनात रहा और कई छात्रों को हिरासत में भी लिया गया।

कैसे शुरू हुआ पूरा विवाद

लखनऊ विश्वविद्यालय परिसर स्थित ऐतिहासिक लाल बारादरी इमारत हाल ही में चर्चा का विषय बनी हुई है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की रिपोर्ट के आधार पर इस संरक्षित भवन की मरम्मत और फेंसिंग कार्य शुरू कराया था। सुरक्षा कारणों से इमारत को अस्थायी रूप से बंद कर बैरिकेडिंग लगा दी गई थी।

इसी बीच कुछ दिन पहले मुस्लिम छात्रों के एक समूह ने लाल बारादरी परिसर में नमाज अदा की और रोजा इफ्तार किया। इस घटना की जानकारी फैलते ही विश्वविद्यालय के अन्य छात्र संगठनों में नाराजगी बढ़ गई। हिंदू छात्र संगठनों ने इसे नियमों के उल्लंघन और परिसर की परंपराओं के खिलाफ बताते हुए विरोध प्रदर्शन की घोषणा कर दी।

गंगाजल से किया गया शुद्धिकरण

सोमवार को बड़ी संख्या में छात्र लाल बारादरी परिसर पहुंचे। हिंदू छात्र संगठनों से जुड़े छात्रों ने गंगाजल लेकर परिसर में प्रवेश किया और लाल बारादरी को “पवित्र” करने का दावा करते हुए शुद्धिकरण किया। इस दौरान छात्रों ने सामूहिक रूप से हनुमान चालीसा का पाठ शुरू कर दिया। परिसर में “जय श्री राम” और “जय बजरंगबली” के नारे गूंजने लगे। छात्रों का कहना था कि विश्वविद्यालय परिसर शिक्षा का केंद्र है और यहां किसी भी प्रकार की धार्मिक गतिविधि की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।

दो गुटों की अलग-अलग मांग

  • इस विवाद के बीच छात्रों के दो गुट साफ तौर पर सामने आ गए।
  • पहला गुट लाल बारादरी को खोलने और छात्रों के लिए सामान्य रूप से उपलब्ध कराने की मांग कर रहा था।
  • दूसरा गुट सुरक्षा कारणों और निर्माण कार्य का हवाला देते हुए इमारत को बंद रखने के प्रशासनिक फैसले का समर्थन कर रहा था।
  • दोनों पक्षों के आमने-सामने आने से माहौल तनावपूर्ण हो गया और विश्वविद्यालय परिसर कुछ समय के लिए अखाड़े जैसा दिखाई देने लगा।

पुलिस और छात्रों में झड़प

स्थिति बिगड़ती देख विश्वविद्यालय प्रशासन ने तुरंत पुलिस को सूचना दी। भारी संख्या में पुलिस बल, पीएसी और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे। पुलिस लगातार छात्रों को समझाने का प्रयास करती रही, लेकिन नारेबाजी और विरोध प्रदर्शन जारी रहा। हनुमान चालीसा पढ़ रहे छात्रों को पुलिस ने हटाने की कोशिश की, जिसके बाद कुछ देर के लिए पुलिस और छात्रों के बीच धक्का-मुक्की की स्थिति बन गई। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस ने कई छात्रों को हिरासत में ले लिया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, प्रशासन बार-बार छात्रों से शांतिपूर्ण तरीके से परिसर खाली करने की अपील करता रहा, लेकिन छात्र अपनी मांगों पर अड़े रहे।

विश्वविद्यालय प्रशासन का बयान

विश्वविद्यालय प्रशासन ने स्पष्ट किया कि लाल बारादरी को किसी धार्मिक विवाद के कारण नहीं, बल्कि सुरक्षा और संरक्षण कार्य के चलते बंद किया गया है। प्रशासन का कहना है कि यह एक संरक्षित ऐतिहासिक इमारत है और मरम्मत कार्य पूरा होने तक किसी भी छात्र या समूह को वहां प्रवेश की अनुमति नहीं दी जा सकती। अधिकारियों ने कहा कि विश्वविद्यालय परिसर में किसी भी प्रकार की धार्मिक या राजनीतिक गतिविधि से बचना चाहिए ताकि शैक्षणिक माहौल प्रभावित न हो।

कैंपस बना सुरक्षा छावनी

घटना के बाद विश्वविद्यालय परिसर को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया। मुख्य गेटों पर पुलिस बल तैनात रहा, जबकि संवेदनशील स्थानों पर अतिरिक्त निगरानी रखी गई। प्रशासन ने छात्रों से अफवाहों पर ध्यान न देने और शांति बनाए रखने की अपील की। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि स्थिति अब नियंत्रण में है, लेकिन एहतियातन सुरक्षा व्यवस्था जारी रहेगी।

छात्र राजनीति और धार्मिक मुद्दों पर बहस

यह घटना एक बार फिर इस सवाल को सामने लाती है कि विश्वविद्यालय जैसे शैक्षणिक संस्थानों में धार्मिक गतिविधियों की सीमा क्या होनी चाहिए। कई शिक्षकों और पूर्व छात्रों ने चिंता जताई कि शिक्षा के मंदिर माने जाने वाले संस्थानों में बढ़ती वैचारिक और धार्मिक टकराहट पढ़ाई के माहौल को प्रभावित कर सकती है। सोशल एक्टिविस्ट नीरज का मानना है कि कैंपस में संवाद और प्रशासनिक स्पष्टता की कमी कई बार छोटे विवादों को बड़े टकराव में बदल देती है।

सोशल मीडिया पर छाया मामला

लखनऊ विश्वविद्यालय का लाल बारादरी विवाद सोशल मीडिया पर भी तेजी से ट्रेंड करने लगा। घटना के वीडियो और तस्वीरें वायरल होने के बाद राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रियाओं का सिलसिला शुरू हो गया। कई लोगों ने इसे धार्मिक स्वतंत्रता का मुद्दा बताया, तो कई ने विश्वविद्यालय परिसर में अनुशासन बनाए रखने की मांग की।