26 मार्च 2026,

गुरुवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

Video News: लखनऊ विश्वविद्यालय में दिखी मिसाल: मस्जिद बंद होने पर बाहर पढ़ी नमाज़, हिन्दू छात्रों ने संभाली सुरक्षा व्यवस्था

लखनऊ विश्वविद्यालय परिसर में मस्जिद बंद होने के बाद मुस्लिम छात्रों ने लाल बारादरी के बाहर अज़ान देकर नमाज़ अदा की। इस दौरान हिन्दू छात्रों ने सुरक्षा घेरा बनाकर आपसी भाईचारे और गंगा-जमुनी तहज़ीब की मिसाल पेश की। घटना ने सामाजिक सौहार्द और छात्र एकता का संदेश दिया।

4 min read
Google source verification

लखनऊ

image

Ritesh Singh

Feb 23, 2026

LU Students: मस्जिद बंद, लाल बारादरी के बाहर नमाज़; हिन्दू छात्रों ने बनाई सुरक्षा घेराबंदी Lucknow University

LU Students: मस्जिद बंद, लाल बारादरी के बाहर नमाज़; हिन्दू छात्रों ने बनाई सुरक्षा घेराबंदी Lucknow University

Lucknow University: लखनऊ स्थित लखनऊ विश्वविद्यालय परिसर रविवार  को उस समय चर्चा का केंद्र बन गया, जब परिसर में स्थित मस्जिद के दरवाजे बंद पाए जाने के बाद मुस्लिम छात्रों ने ऐतिहासिक लाल बारादरी के बाहर अज़ान देकर नमाज़ अदा की। इस दौरान एक ऐसा दृश्य देखने को मिला जिसने सामाजिक सौहार्द और आपसी भाईचारे की मिसाल पेश कर दी। नमाज़ के दौरान हिन्दू छात्रों ने हाथों में हाथ डालकर सुरक्षा घेरा बनाया, जिससे परिसर में शांति और व्यवस्था बनी रही।

मस्जिद बंद होने के बाद बदली स्थिति

प्राप्त जानकारी के अनुसार, लखनऊ विश्वविद्यालय परिसर में बनी मस्जिद को प्रशासनिक कारणों से रविवार को बंद कर दिया गया था। जब नियमित रूप से नमाज़ पढ़ने आने वाले छात्र मस्जिद पहुंचे, तो उन्होंने दरवाजों पर ताला लगा पाया। अचानक उत्पन्न हुई इस स्थिति ने छात्रों को असमंजस में डाल दिया, क्योंकि नमाज़ का समय हो चुका था। मुस्लिम छात्रों ने शांतिपूर्ण तरीके से समाधान निकालते हुए मस्जिद के बाहर ही नमाज़ अदा करने का निर्णय लिया। इसके बाद लाल बारादरी परिसर के बाहर अज़ान दी गई और निर्धारित समय पर नमाज़ पढ़ी गई।

लाल बारादरी बना इबादत का स्थल

विश्वविद्यालय परिसर के अंदर स्थित ऐतिहासिक लाल बारादरी आम दिनों में छात्रों के बैठने और सांस्कृतिक गतिविधियों का केंद्र रहती है, लेकिन सोमवार को यह स्थान धार्मिक आस्था का केंद्र बन गया। छात्रों ने बिना किसी विवाद या नारेबाजी के अनुशासन बनाए रखते हुए नमाज़ अदा की। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, पूरी प्रक्रिया शांतिपूर्ण रही। नमाज़ के दौरान छात्रों ने आपसी सम्मान और संयम का परिचय दिया। परिसर में मौजूद अन्य छात्रों ने भी सहयोगात्मक रवैया अपनाया।

हिन्दू छात्रों ने बनाया सुरक्षा घेरा

इस पूरे घटनाक्रम का सबसे उल्लेखनीय पहलू हिन्दू छात्रों की भूमिका रही। नमाज़ के समय किसी प्रकार की अव्यवस्था या बाहरी हस्तक्षेप न हो, इसके लिए हिन्दू छात्रों ने स्वेच्छा से सुरक्षा घेरा बनाया। उन्होंने हाथों में हाथ डालकर नमाज़ अदा कर रहे छात्रों के चारों ओर खड़े होकर व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग किया।

छात्रों का कहना था कि विश्वविद्यालय शिक्षा और भाईचारे की जगह है, जहां सभी धर्मों और विचारों का सम्मान होना चाहिए। एक छात्र ने बताया कि “हम सब पहले छात्र हैं, धर्म बाद में आता है। हमारे दोस्त नमाज़ पढ़ रहे थे, इसलिए हमने उनकी सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित करना जरूरी समझा।”

परिसर में कायम रही शांति

घटना के दौरान विश्वविद्यालय परिसर में कहीं भी तनाव या विवाद की स्थिति नहीं बनी। छात्रों ने संयम और परिपक्वता का परिचय देते हुए माहौल को सौहार्दपूर्ण बनाए रखा। कई शिक्षकों और कर्मचारियों ने भी छात्रों के इस व्यवहार की सराहना की।

विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से अभी तक आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है कि मस्जिद को किस कारण से बंद किया गया था। हालांकि सूत्रों के अनुसार, यह कदम प्रशासनिक या सुरक्षा संबंधी कारणों से उठाया गया हो सकता है।

प्रशासन और छात्रों के बीच संवाद की जरूरत

घटना के बाद छात्रों के बीच यह मांग भी उठी कि प्रशासन और छात्र प्रतिनिधियों के बीच संवाद स्थापित किया जाए, ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति उत्पन्न न हो। छात्रों का कहना है कि धार्मिक गतिविधियों से जुड़े मामलों में पूर्व सूचना देना आवश्यक होता है, जिससे अनावश्यक असमंजस से बचा जा सके। विश्वविद्यालय के कुछ वरिष्ठ छात्रों ने सुझाव दिया कि परिसर में सभी धार्मिक स्थलों के संचालन को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश तय किए जाने चाहिए, जिससे सभी समुदायों की भावनाओं का सम्मान बना रहे।

सोशल मीडिया पर चर्चा

घटना की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गए। विशेष रूप से हिन्दू छात्रों द्वारा सुरक्षा घेरा बनाने का दृश्य लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया। कई लोगों ने इसे भारत की गंगा-जमुनी तहज़ीब और सामाजिक एकता का उदाहरण बताया। सोशल मीडिया पर विभिन्न प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं, जहां बड़ी संख्या में लोगों ने छात्रों के व्यवहार की सराहना करते हुए इसे सकारात्मक संदेश बताया।

गंगा-जमुनी तहज़ीब की झलक

लखनऊ शहर ऐतिहासिक रूप से अपनी गंगा-जमुनी संस्कृति के लिए जाना जाता है, जहां विभिन्न धर्मों और समुदायों के लोग आपसी सम्मान और सद्भाव के साथ रहते आए हैं। विश्वविद्यालय परिसर में घटित यह घटना उसी परंपरा की झलक मानी जा रही है। प्रत्यक्षदर्शियो  का मानना है कि युवा पीढ़ी द्वारा दिखाई गई यह संवेदनशीलता समाज के लिए प्रेरणादायक है। जब देश के विभिन्न हिस्सों में धार्मिक मुद्दों पर तनाव की खबरें सामने आती हैं, ऐसे में छात्रों द्वारा प्रदर्शित एकता समाज को सकारात्मक दिशा देने वाली मानी जा रही है।

यूनिवर्सिटी की तरफ से नहीं आया कोई बयान

विश्वविद्यालय परिसर में स्थित मस्जिद से जुड़े विवाद को लेकर अब तक विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। इस बीच छात्र संगठनों ने मामले को लेकर नाराजगी जताते हुए आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी है। मस्जिद के बाहर एक नोटिस चस्पा मिला, जिसमें भवन को जर्जर और असुरक्षित बताते हुए किसी भी व्यक्ति को अंदर प्रवेश न करने की अपील की गई थी।

बताया जा रहा है कि यह भवन भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) द्वारा संरक्षित है और संभवतः इसके जीर्णोद्धार या मरम्मत कार्य के मद्देनजर प्रवेश पर रोक लगाई गई होगी। हालांकि, छात्रों का आरोप है कि प्रशासन ने मस्जिद को बंद करने या सुरक्षा कारणों से लगाए गए प्रतिबंध की पूर्व सूचना नहीं दी, जिससे भ्रम और असंतोष की स्थिति पैदा हुई।

छात्र संगठनों का कहना है कि यदि प्रशासन पहले ही स्पष्ट जानकारी दे देता तो विवाद की नौबत नहीं आती। फिलहाल परिसर में स्थिति सामान्य बनाए रखने के लिए सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है, जबकि छात्र प्रशासन से पारदर्शिता और आधिकारिक स्पष्टीकरण की मांग कर रहे हैं।