
कुलदीप सिंह सेंगर की बर्बादी में अखिलेश यादव का है सबसे बड़ा हाथ, बीजेपी से भी निकलवाया, हैरान करने वाला खुलासा
लखनऊ. उन्नाव गैंगरेप केस (Unnao Gangrape Case) के मुख्य आरोपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर (MLA Kuldeep Singh Sengar) के कहा जाता है कि वह उत्तर प्रदेश की सियासत में हवा का रुख पहले ही भांप जाता था और उसी के मुताबिक अपनी पार्टी बदलता था। बीजेपी (BJP) से निष्कासित विधायक कुलदीप सेंगर (Kuldeep Singh Sengar) ने वैसे तो अपने राजनीति जीवन की शुरुआत यूथ कांग्रेस (Youth Congress) से की था, लेकिन 2002 में पहली बार वह बीएसपी (BSP) के टिकट पर भगवंतनगर विधानसभा सीट (Bhagwant Nagar Vidhan Sabha Seat) से विधायक बना। इसके बाद सेंगर 2007 और 2012 में समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) के टिकट पर विधायक चुना गया। इसके बाद 2017 में कुलदीप सिंह सेंगर ने बीजेपी (BJP) का दामन थामा और उसी के टिकट पर बांगरमऊ विधानसभा सीट से विधानसभा पहुंचा।
अखिलेश यादव से कर दी थी बगावत
कुलदीप सिंह सेंगर जब समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) से भगवंत नगर विधानसभा सीट (Bhagwant Nagar Vidhasabha Seat) से विधायक थे, उसी समय साल 2016 में जिला पंचायत अध्यक्ष का चुनाव होना था। जिसमें कुलदीप सिंह सेंगर (MLA Kuldeep Singh Sengar) ने अखिलेश यादव से अपनी पत्नी संगीता सिंह के लिए समाजवादी पार्टी का टिकट मांगा। सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और तात्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) ने कुलदीप सिंह की पत्नी संगीता सेंगर (Sangeeta Sengar) को टिकट न देकर ज्योति रावत (Jyoti Rawat) को यहां से जिला पंचायत अध्यक्ष (Jila Panchayat Adhyaksh) पद का प्रत्याशी बना दिया। इस पर कुलदीप सिंह सिंगर ने बगावत कर दी और अपनी पत्नी संगीता सेंगर (Sangeeta Sengar) को निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव मैदान में उतार दिया।
कुलदीप सिंह सेंगर ने अपनी पत्नी को जिताया था चुनाव
समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) की सरकार रहने के बाद भी अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) यहां पर कुलदीप सिंह सेंगर (Kuldeep Singh Sengar) के तिलिस्म को तोड़ नहीं पाये। सपा की तरफ से पूरी ताकत लगाने के बाद भी कुलदीप सिंह सेंगर की पत्नी संगीता सेंगर ने पूरी दमदारी से चुनाव लड़ा। रिजल्ट आया तो दोनों को मिले वोट बराबर थे। उस समय सिक्का उछाल कर चुनाव का फैसला हुआ। जिसमें कुलदीप सेंगर की पत्नी संगीता सिंह सेंगर की जीत हुई और वह जिला पंचायत अध्यक्ष चुनी गईं। कुलदीप सिंह सेंगर की इस जीत से उस समय समाजवादी पार्टी और अखिलेश यादव को यहां तगड़ा झटका लगा था।
अखिलेश से मोर्चा लेना सेंगर को पड़ा भारी
उसी के ठीक बाद साल 2017 का विधानसभा चुनाव (UP Vidhansabha Election) पास आ गया और अखिलेश सिंह यादव (Akhilesh Yadav) ने कुलदीप सिंह सेंगर (Kuldeep Singh Sengar) से किनारा कर लिया। अब कुलदीप सिंह सेंगर को विधानसभा का चुनाव लड़ने के लिए एक मजबूत राजनीतिक पार्टी चाहिए थी। जिसको देखते हुए कुलदीप सेंगर ने भारतीय जनता पार्टी (Bhartiya Janta Party) का दामन थामा। बीजेपी (BJP) में शामिल होते ही कुलदीप को उन्नाव की बांगरमऊ विधानसभा (Bangarmau Vidhansabha Seat) की सीट चुनाव लड़ने के लिए तोहफे के रूप में मिल गई। जहां से कुलदीप सिंह (Kuldep Singh) चौथी बार विधायक चुने गए। चौथी बार विधायक बनने के बाद कुलदीप सेंगर का कद इतना बढ़ गया कि उनके पार्टी के नेता ही अंदर ही अंदर उनकी बगावत करने लगे। जिसके बाद कुलदीप ने तेजी से पूरे जिले में पांव पसारना शुरू कर दिया था और लोकसभा चुनाव (Loksabha Election) लड़ने की तैयारी करने लगा। कुलदीप के इसकदर बढ़ते हुए कद से उनके क्षेत्र में दिग्गजों को अपनी जमीन खिसकती हुई नजर आने लगी।
कुलदीप सिंह सेंगर की कराई पार्टी से छुट्टी
बीते साल अप्रैल महीने में विधायक कुलदीप सिंह सेंगर (MLA Kuldeep Singh Sengar) का नाम दुराचार मामले से जुड़ा तो सपा (SP) ने कुलदीप का जोरदार विरोध किया। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) ने खुद विधायक के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। 4 दिन पहले रायबरेली (Raebareli) में हादसे में पीड़िता जख्मी हो गई और चाची-चचेरी मौसी की मौत हुई तो अखिलेश (Akhilesh) को मौका मिल गया। अखिलेश यादव ने कुलदीप सिंह सेंगर को भारतीय जनता पार्टी (Bhartiya Janta Party) से निकलवाने के लिए सड़क से लेकर संसद तक संघर्ष करना चालू कर दिया। अखिलेश ने कुलदीप के खिलाफ अपनी पूरी पार्टी लगा दी। एक तरह से अखिलेश यादव और अन्य विरोधी दल कुलदीप सिंह सेंगर (Kuldeep Singh Sengar) के खिलाफ पार्टी से भी कार्रवाई करवाने में पूरी तरह से सफल साबित हुए। अब कुलदीप सिंह सेंगर (Kuldeep Singh Sengar) को भाजपा (BJP) से निकाले जाने के बाद विरोधी दलों ने राहत की सांस ली है।
Published on:
02 Aug 2019 11:51 am
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