
शंकराचार्य से मिले अखिलेश यादव
Akhilesh Yadav reached to meet Shankaracharya Avimukteshwarananda: लखनऊ में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती का दौरा काफी चर्चा में है। वे गो-रक्षा और गाय की प्रतिष्ठा से जुड़े अभियान के लिए यहां आए हैं। इस दौरान समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव उनसे मिलने पहुंचे।
लखनऊ के कृष्णा नगर में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती प्रवास पर रुके हुए हैं। अखिलेश यादव उनके पास पहुंचे और उनसे मिले। उनके साथ पूर्व सांसद अनु टंडन भी थीं। मुलाकात से पहले अखिलेश यादव ने दरवाजे पर मिले अन्य संतों को हाथ जोड़कर प्रणाम किया। यह मुलाकात काफी सम्मानजनक तरीके से हुई। बताया जा रहा है कि दोनों ने धर्म, गौ-रक्षा और मौजूदा समय के मुद्दों पर बातचीत की। यह मुलाकात राजनीतिक और धार्मिक महत्व की मानी जा रही है।
शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने लखनऊ में गो-प्रतिष्ठा जनजागरण अभियान की शुरुआत की। यह अभियान तीन दिनों का है और गाय को राष्ट्र माता मानकर उसकी रक्षा के लिए जन-जागरण करने का मकसद रखता है। उन्होंने बुधवार को सभा को संबोधित किया और गो-रक्षा के महत्व पर जोर दिया। कार्यक्रम में काफी संख्या में संत और समर्थक मौजूद थे। प्रशासन ने इस कार्यक्रम के लिए 26 शर्तों के साथ अनुमति दी थी, जिस पर भी काफी चर्चा हुई।
सभा में शंकराचार्य ने मजेदार अंदाज में बात की। उन्होंने कहा कि यह शराब की दुकान नहीं है, यह शुद्ध गाय की दुकान है। उनका मतलब था कि अगर भीड़ ज्यादा होती तो लोग इसे शराब की दुकान समझते, लेकिन यहां कम भीड़ है, इसलिए यह सच्चे गो-भक्तों की सभा है। उन्होंने कहा कि जो लोग इतनी मुश्किलों के बावजूद आए हैं, वे असली गो-भक्त हैं। कार्यक्रम खत्म होने के बाद उनका नाम नोट करवाने को कहा, क्योंकि वे इस अभियान के संस्थापक सदस्य होंगे। शंकराचार्य ने भाजपा पर तंज कसा और कहा, "भाजपा अब भागपा हो गई है।" उनका इशारा था कि लोग डर के कारण भाग रहे हैं, लेकिन सच्चे भक्त नहीं डरते। उन्होंने समर्थकों को प्रोत्साहित किया कि वे गो-रक्षा के लिए मजबूत रहें।
कार्यक्रम के दौरान एक महिला को मंच पर जाने से रोका गया। वह भड़क गई और महिला पुलिसकर्मियों से धक्का-मुक्की करने लगी। इससे कुछ देर के लिए अफरा-तफरी मच गई। पुलिस ने स्थिति संभाली। इस घटना ने कार्यक्रम में थोड़ी विवादास्पदता जोड़ दी। अखिलेश यादव ने पहले भी शंकराचार्य के कार्यक्रम पर लगी शर्तों की आलोचना की थी। उन्होंने कहा था कि इतनी शर्तें कमजोर सत्ता की निशानी हैं। शंकराचार्य का अभियान गौ-रक्षा पर केंद्रित है, जो कई राजनीतिक दलों के लिए संवेदनशील मुद्दा है।
Updated on:
12 Mar 2026 03:17 pm
Published on:
12 Mar 2026 01:57 pm
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