
लखनऊ में गैस की कमी से बदली रसोई की तस्वीर (फोटो सोर्स : भाषा WhatsApp News Group)
Lucknow LPG Gas Crisis: राजधानी लखनऊ में इन दिनों रसोई गैस की किल्लत ने आम लोगों से लेकर होटल, रेस्टोरेंट और स्ट्रीट वेंडर्स तक की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। हालात ऐसे बन गए हैं कि शहर की कई गलियों में अस्थायी भट्टियां जलती दिखाई दे रही हैं। कई रेस्तरां और छोटे दुकानदार गैस की कमी से निपटने के लिए लकड़ी, कोयला और इंडक्शन चूल्हों का सहारा लेने को मजबूर हो गए हैं। गैस सिलिंडर की कमी के कारण खानपान से जुड़े व्यवसायों की व्यवस्था पूरी तरह बदलती नजर आ रही है।
शहर के कई रेस्टोरेंट और ढाबों ने अपनी कार्यप्रणाली में बदलाव कर दिया है। कुछ जगहों पर रसोई में इंडक्शन चूल्हे लगाए गए हैं, तो कई स्थानों पर लकड़ी और कोयले की भट्टियां जलाकर खाना बनाया जा रहा है। फास्ट फूड स्टॉल, चाट ठेले और छोटे खानपान के ठिकानों पर सबसे ज्यादा असर देखा जा रहा है।
लखनऊ के कई दुकानदारों का कहना है कि जब तक गैस सिलेंडर उपलब्ध रहेगा, तब तक वे उसी पर काम करेंगे, लेकिन सिलिंडर खत्म होते ही उन्हें वैकल्पिक व्यवस्था अपनानी पड़ रही है। कुछ जगहों पर आधी वैरायटी का खाना ही बनाया जा रहा है, ताकि सीमित संसाधनों में काम चलाया जा सके। (दुकानदार - सुमित , रवि , प्रदीप , कौशल्या )
शहर के शैक्षणिक संस्थानों के आसपास भी गैस संकट का असर देखने को मिल रहा है। छात्रावासों और मेस में मैदान में भट्टियां लगाकर खाना बनाया जा रहा है। लकड़ी और कोयले के सहारे बड़ी मात्रा में भोजन तैयार किया जा रहा है ताकि छात्रों को समय पर खाना मिल सके। मेस संचालकों का कहना है कि गैस सिलेंडर की आपूर्ति अनियमित होने के कारण उन्हें मजबूरन इस व्यवस्था को अपनाना पड़ा है। हालांकि इस तरीके में अधिक मेहनत और समय लगता है, लेकिन फिलहाल यही विकल्प बचा है।
गैस संकट के कारण लकड़ी और कोयले की मांग तेजी से बढ़ गई है। लकड़ी बेचने वाले व्यापारियों का कहना है कि पिछले दो दिनों में ही मांग में काफी बढ़ोतरी हुई है। जहां पहले एक छोटी लकड़ी की गट्ठर 7 रुपये के आसपास मिलती थी, वहीं अब इसकी कीमत 20 से 21 रुपये तक पहुंच गई है। इसी तरह कोयले के दाम भी बढ़ गए हैं। lucknow व्यापारियों के अनुसार, अचानक मांग बढ़ने से आपूर्ति करना भी मुश्किल हो रहा है। कई जगहों पर लकड़ी और कोयले की उपलब्धता सीमित हो गई है।
गैस की कमी के चलते घरेलू इंडक्शन चूल्हों की मांग में भी तेजी आई है। इलेक्ट्रॉनिक दुकानों के मालिकों का कहना है कि पिछले कुछ दिनों में इंडक्शन चूल्हों की बिक्री लगभग 50 प्रतिशत तक बढ़ गई है।हालांकि दुकानदारों का कहना है कि इंडक्शन पर सीमित प्रकार का भोजन ही बनाया जा सकता है। दाल-चावल जैसे व्यंजन तो आसानी से बन जाते हैं, लेकिन रोटी या तली-भुनी चीजें बनाना मुश्किल हो जाता है। इसी कारण कई परिवारों को खाना बनाने में काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
गैस संकट का सबसे बड़ा असर फास्ट फूड कारोबार पर पड़ा है। समोसा, चाउमीन, पकोड़ी और अन्य तली हुई चीजें बनाने वाले दुकानदारों को भारी दिक्कत हो रही है। कई स्टॉल मालिकों ने बताया कि गैस की कमी के कारण उन्हें अपने मेनू में कटौती करनी पड़ी है। कुछ दुकानों पर केवल सीमित आइटम ही बनाए जा रहे हैं। कई दुकानदारों ने डिश के दाम भी करीब 10 प्रतिशत तक बढ़ा दिए हैं ताकि बढ़ते खर्च की भरपाई की जा सके।
शहर में टिफिन सेवा देने वाले संचालक भी इस संकट से जूझ रहे हैं। उनका कहना है कि गैस सिलेंडर समय पर नहीं मिलने के कारण नियमित रूप से भोजन तैयार करना मुश्किल हो गया है। सुजाता टिफिन सेवा संचालक ने बताया कि उनके पास कई ऐसे ग्राहक हैं जो रोजाना घर का बना खाना मंगवाते हैं। लेकिन गैस की कमी के कारण उन्हें ग्राहकों को समय पर टिफिन देना चुनौती बन गया है। कुछ संचालकों ने कहा कि अगर यही स्थिति रही तो आने वाले दिनों में उन्हें अपनी सेवा अस्थायी रूप से बंद करनी पड़ सकती है।
टिफिन सेवा लेने वाले ग्राहकों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कई लोग ऐसे हैं जो नौकरी या पढ़ाई के कारण खुद खाना नहीं बना पाते और टिफिन सेवा पर निर्भर रहते हैं। वन क्षेत्र की निवासी मीना श्रीवास्तव का कहना है कि वह पिछले कुछ समय से टिफिन सेवा ले रही हैं। लेकिन अब टिफिन समय पर नहीं मिलने के कारण उन्हें खुद खाना बनाने की चिंता सता रही है।
पीजी और हॉस्टल में रहने वाले छात्रों के सामने भी खाना बनाने की समस्या खड़ी हो गई है। कई छात्र इंडक्शन पर खाना बनाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन उसमें सीमित व्यंजन ही बन पाते हैं। छात्र राहुल ने बताया कि पढ़ाई के साथ-साथ खाना बनाना भी अब चुनौती बन गया है। कई बार उन्हें बाहर से खाना मंगवाना पड़ता है, जिससे खर्च बढ़ रहा है।
शहर की गैस एजेंसियों पर इन दिनों लंबी कतारें देखने को मिल रही हैं। लोग घंटों इंतजार कर रहे हैं ताकि उन्हें नया सिलेंडर मिल सके। कई लोगों का कहना है कि सिलेंडर मिलने में देरी हो रही है, जिससे घरों की रसोई प्रभावित हो रही है।
स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने गैस एजेंसियों की निगरानी भी शुरू कर दी है। अधिकारियों की टीम समय-समय पर एजेंसियों का निरीक्षण कर रही है ताकि किसी प्रकार की कालाबाजारी न हो। नगर निगम और प्रशासनिक अधिकारी भी स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।
गैस से संबंधित शिकायतों के लिए अलग-अलग हेल्पलाइन नंबर जारी किए गए हैं। उपभोक्ता इंडियन ऑयल, एचपी और नगर निगम के टोल-फ्री नंबरों पर संपर्क कर सकते हैं।
गैस संकट का असर नगर निगम की सफाई व्यवस्था पर भी पड़ने लगा है। कुछ स्थानों पर डीजल उपलब्ध न होने के कारण नगर निगम के वाहनों के संचालन में भी दिक्कत आ रही है। यदि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है तो शहर की सफाई व्यवस्था भी प्रभावित हो सकती है।
हालांकि प्रशासन का कहना है कि यह समस्या अस्थायी है और जल्द ही गैस आपूर्ति सामान्य हो जाएगी। अधिकारियों का दावा है कि आपूर्ति व्यवस्था को सुधारने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। फिलहाल शहर के लोग इस संकट से निपटने के लिए वैकल्पिक उपाय अपना रहे हैं। गली-गली जलती भट्टियां इस बात का संकेत दे रही हैं कि लोग किसी भी तरह अपनी रसोई को चलाने की कोशिश में जुटे हुए हैं।
Updated on:
12 Mar 2026 01:59 pm
Published on:
12 Mar 2026 01:53 pm
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