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स्वामी मौर्य के मंच से अखिलेश देंगे कांशी राम का संदेश, मायावती के वोट बैंक में सेंध मारने की तैयारी

अखिलेश यादव दलित वोटरों में सेंध मारने की तैयारी में हैं। इसी सिलसिले में सोमवार को स्वामी प्रसाद के कॉलेज में कांशी राम की मूर्ति का अनावरण कर संदेश देने का काम करेंगे।

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लखनऊ

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Anand Shukla

Apr 02, 2023

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सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव अपनी खोई हुई जमीन पाने में जुटे हुए हैं। इसी के चलते वह अपने राजनीति विरोधियों को साथ लेने मे कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। सोमवार को अखिलेश यादव रायबरेली में राजनीति में धुर प्रतिद्वंद्वी बसपा के संस्थापक कांशीराम की प्रतिमा का अनावरण करेंगे। यह प्रतिमा मान्यवर कांशीराम महाविद्यालय में लगाई गई है। इस कॉलेज की प्रबंधक सपा एमएससी स्वामी प्रसाद मौर्य की पत्नी शिवा मौर्या हैं। इसके साथ ही स्वामी के पिता बदलू मौर्य की प्रतिमा का भी अनावरण होगा।

स्वामी प्रसाद मौर्य के मंच से अखिलेश यादव दलित वोटरों को साधेंगे लेकिन इससे सपा को भीतर घात नुकसान हो सकता है। दरअसल स्वामी प्रसाद मौर्य लगातार रामचरितमानस के एक चौपाई को विवादित बता रहे हैं और उसे हटाने की मांग कर रहे हैं। स्वामी के इस बयान से सपा के कुछ नेता किनारा कर रहे हैं।

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सपा में स्वामी मौर्य को मिला था प्रमोशन

रामचरितमानस विवाद पर सपा के कुछ नेता चाहते थे कि अखिलेश यादव उन पर कारवाई करेंगे लेकिन हुआ इसके उलट। स्वामी प्रसाद मौर्य को पार्टी में प्रमोशन मिला। स्वामी के मंच पर अखिलेश की मौजूदगी इसका भी संदेश है कि रामचरितमानस सहित दूसरे विवादों को लेकर अखिलेश बहुत चिंतित नहीं हैं। गैर-यादव ओबीसी वोटों को जोड़ने के अजेंडे में स्वामी की अहमियत बनी हुई है।

सपा बसपा को हो चुका है गठबंधन

ऐसा नहीं है कि अखिलेश यादव कांशी के सहारे नई रणनीति बना रहे हैं। इससे पहले भी 1993 में मुलायम सिंह यादव के साथ गठबंधन कर कांशी राम ने भाजपा का विजय रथ रोका था। 2019 में सपा-बसपा गठबंधन के चलते सपा के मंचों से कांशीराम फिर याद किए जाने लगे, लेकिन चुनावी नतीजा पक्ष में नहीं रहा। गठबंधन टूट गया, लेकिन सपा ने कांशीराम से 'नाता' नहीं तोड़ा।

कई नेता सपा में हो चुके हैं शामिल

सपा और बसपा के गठबंधन से भले राजनीतिक फायदा नहीं हुआ लेकिन दोनों पार्टी के नेताओं के बीच दूरियां कम हुई है। 2019 से लेकर अभी तक बसपा के कई नेताओं ने सपा का थामन थाम लिया है। इंद्रजीत सरोज, स्वामी प्रसाद मौर्य, लालजी वर्मा, रामअचल राजभर, केके सचान, आरएस कुशवाहा जैसे नेता सपा में शामिल हुए हैं। इनमें चार तो बसपा के प्रदेश अध्यक्ष रहे हैं। गैर-यादव ओबीसी व दलितों को जोड़ने में सपा को 2022 में सफलता भी मिली, जब पार्टी को 32% से अधिक वोट मिले।

कांशी राम अजेंडे पर काम कर रही है सपा

2024 लोकसभा चुनाव में सपा जातीय जनगणना मुद्दे को पुरजोर तरीके से उठाना चाहती है। इसी के जरिए सपा बसपा के वोटरों में सेंध मारना चाहती है। बसपा की मुस्लिम वोटों में सेंधमारी की कोशिश के बीच सपा उसके गैर-जाटव दलित वोटों को जोड़ने में लगी है। इसलिए कांशीराम भी अजेंडे पर सपा काम कर रही है।

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